Mar 1, 2026
मथुरा वृंदावन में ये लठमार और फूलों वाली होली के रूप में मनाई जाती है। यहां मंदिरों में राधा-कृष्ण के भजनों के बीच रंगों की भारी बौछार होती है। वाराणसी के घाटों पर लोग गंगा स्नान के बाद अबीर-गुलाल से एक-दूसरे का स्वागत करते हैं।
Credit: The Sootr
वाराणसी के घाटों पर होली का एक अलग ही आध्यात्मिक और जोश भरा रूप देखने को मिलता है। यहां लोग गंगा किनारे एकत्र होकर संगीत की धुन पर नाचते हैं और हर्बल रंगों का इस्तेमाल करते हैं। शाम को होने वाली खास गंगा आरती और मसान की होली यहां के उत्सव को अनोखा बनाती है।
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एमपी में होली का असली जलवा इंदौर की गेर और रंग पंचमी में दिखाई देता है। यहां सड़कों पर पानी की मिसाइलों से रंग छोड़ा जाता है और हजारों की भीड़ जुटती है। मालवा क्षेत्र में लोग पारंपरिक लोक गीतों पर नाचते हुए पकवानों का आनंद लेते हैं।
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छत्तीसगढ़ में इसे फाग के नाम से जानते हैं, जहां गांव-गांव में नगाड़ों की थाप सुनाई देती है। लोग डंडा नृत्य करते हैं और एक-दूसरे को गुलाल लगाकर चीला और फरा जैसे पकवान खिलाते हैं। यहां की होली में ग्रामीण संस्कृति और आपसी भाईचारे का अनूठा संगम दिखता है।
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जयपुर और उदयपुर में होली राजसी अंदाज में मनाई जाती है, जिसमें हाथियों और ऊंटों का जुलूस निकलता है। लोग चंग नामक वाद्य यंत्र बजाते हैं। लोक नृत्य करते हुए चंग की थाप पर झूमते हैं। यहां की आतिशबाजी और पारंपरिक 'घेवर' की मिठास होली का मजा दोगुना कर देती है।
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बंगाल में इसे डोल पूर्णिमा कहते हैं। यहां लोग पीले कपड़े पहनकर सांस्कृतिक कार्यक्रम करते हैं। शांतिनिकेतन में रवींद्र संगीत पर नृत्य करते हुए गुलाल के साथ यह उत्सव मनाया जाता है। यहां भगवान कृष्ण और राधा की प्रतिमा को पालकी में बिठाकर जुलूस निकालते हैं।
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महाराष्ट्र में इसे रंग पंचमी और गोवा में शिमगो के नाम से बड़े स्तर पर मनाया जाता है। गोवा में सड़कों पर झांकियां निकलती हैं। लोग पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ नाचते-गाते हैं। महाराष्ट्र में मटकी फोड़ प्रतियोगिताएं और पूरण पोली का भोग इस पर्व की मुख्य पहचान है।
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