Apr 12, 2026
आशा ने बहुत कम उम्र में पिता को खो दिया था। घर चलाने के लिए उन्होंने बचपन में ही गाना शुरू किया। बड़ी बहन लता मंगेशकर के साथ उन्होंने खूब मेहनत की। मंगेशकर परिवार ने संगीत के लिए बहुत संघर्ष देखा है।
Credit: The Sootr
लता मंगेशकर इंडस्ट्री में नंबर वन की कुर्सी पर थीं। उनके साए से बाहर निकलना आशा के लिए मुश्किल था। लेकिन उन्होंने अपनी मेहनत से अपनी अलग पहचान बनाई। उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी एक नई राह चुनी।
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आशा जी ने 16 साल की उम्र में भागकर शादी की। उनका वैवाहिक जीवन बहुत ही दुखों और उतार-चढ़ाव से भरा था। ससुराल वालों और पति ने उन्हें काफी परेशान किया था। तीन बच्चों के साथ उन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा था।
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संगीतकार ओपी नैयर ने आशा जी के टैलेंट को पहचाना। उन्होंने आशा की आवाज को एक बोल्ड अंदाज दिया। नया दौर जैसी फिल्मों ने उन्हें बड़ी कामयाबी दिलाई। यहीं से उनकी आवाज घर-घर में मशहूर होने लगी।
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आरडी बर्मन और आशा की जोड़ी ने इतिहास रच दिया। दोनों ने मिलकर बॉलीवुड को बहुत आधुनिक संगीत दिया। दम मारो दम जैसे गानों ने सबको हैरान कर दिया। यह जोड़ी प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ में बहुत हिट रही।
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गजल और शास्त्रीय गायकी में भी आशा जी का जवाब नहीं। फिल्म उमराव जान के लिए उन्होंने अपना सुर बदला। उनकी मखमली आवाज ने इस फिल्म को अमर बना दिया। इस फिल्म के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड भी मिला।
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आशा जी ने हर दौर के संगीत को खुले दिल से अपनाया। एआर रहमान के साथ रंगीला में उन्होंने कमाल कर दिया। 90 के दशक में भी उनकी आवाज बिल्कुल जवान रही। वे नई पीढ़ी के संगीतकारों की भी पहली पसंद रहीं। आशा ताई की आवाज और उनकी मुस्कान हमेशा हमारे दिलों में रहेगी।
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