Mar 11, 2026
विंध्य पर्वत पर स्थित यह मंदिर पूरे भारत में प्रसिद्ध है, जहां माता के दर्शन के लिए 1000 से ज्यादा सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। माना जाता है कि यहां आज भी आल्हा और ऊदल सबसे पहले मां की पूजा करने अदृश्य रूप में आते हैं।
Credit: The Sootr
यह मां बगलामुखी का सबसे बड़ा शक्तिपीठ माना जाता है। माना जाता है कि यहां राजसत्ता और शत्रुओं पर विजय की मनोकामना के लिए भक्त दूर-दूर से आते हैं। यहां की आरती और साधना का अनुभव नवरात्रि के दौरान बहुत ही दिव्य और अलौकिक होता है।
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इंदौर की एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित ये मंदिर नौ रूपों की शक्ति का केंद्र है। यहां नवरात्रि में विशाल मेला लगता है। माना जाता है कि मां के नौ स्वरूपों के दर्शन मात्र से भक्तों की सूनी गोद भर जाती है और सभी कष्ट दूर होते हैं।
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बस्तर की आराध्य देवी मां दन्तेश्वरी का यह मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता का दांत गिरा था। नवरात्रि में यहां की आदिवासी परंपरा और मां की विशेष पूजा देखने के लिए हजारों लोग इकट्ठा होते हैं।
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पहाड़ी पर स्थित मां बम्लेश्वरी का ये दरबार बहुत ऊंचा और भव्य है। जहां पहुंचने के लिए अब रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है। इस मंदिर की मान्यता इतनी है कि नवरात्रि में यहां पैदल यात्रा करने वालों का तांता लगा रहता है।
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इन्हें चूहों वाली माता के नाम से भी जाना जाता है। यहां सफेद चूहे के दर्शन को साक्षात मां का आशीर्वाद माना जाता है। देशनोक स्थित इस मंदिर में नवरात्रि के दौरान चमत्कारिक ऊर्जा महसूस होती है जो भक्तों को मंत्रमुग्ध कर देती है।
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अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित मां जीण का ये मंदिर चौहान वंश की कुलदेवी का है और सदियों पुराना है। यहां की अखंड ज्योति और मां की आठ भुजाओं वाली प्रतिमा के दर्शन नवरात्रि में बहुत ही फलदायी माने जाते हैं।
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