Aug 2, 2025
यह त्योहार भाई-बहन के पवित्र प्रेम और अटूट विश्वास का प्रतीक है। बहनें भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधकर उनकी सुरक्षा, लंबी आयु और सफलता की कामना करती हैं। यह सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि स्नेह और सुरक्षा का एक मजबूत बंधन है।
Credit: The Sootr
महाभारत में एक बार शिशुपाल का वध करते समय भगवान श्रीकृष्ण की उंगली कट गई थी। खून बहता देख द्रौपदी ने तुरंत अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर उनकी उंगली पर पट्टी बांध दी। यह निःस्वार्थ काम प्रेम और सेवा का सर्वोच्च उदाहरण था।
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द्रौपदी के इस उपकार के बदले में, भगवान श्रीकृष्ण ने हमेशा उनकी रक्षा का वचन दिया था। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक, इसी घटना के बाद से रक्षासूत्र या राखी बांधने की परंपरा की शुरुआत हुई, जहां भाई अपनी बहन की सुरक्षा का संकल्प लेते हैं।
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दूसरी प्रमुख कथा भगवान विष्णु के भक्त राजा बलि से जुड़ी है, जो बहुत दानी थे। भगवान विष्णु ने वामन अवतार में राजा बलि से तीन पग भूमि मांगी और उन्हें पाताल में निवास करने के लिए कहा। इससे राजा बलि को अपना सब कुछ गंवाना पड़ा।
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भगवान विष्णु के पाताल में रहने से चिंतित मां लक्ष्मी ने एक गरीब महिला का वेष धारण कर राजा बलि को राखी बांधी। राखी के बदले में राजा ने उनकी इच्छा पूछी, जिस पर मां लक्ष्मी अपने असली रूप में आईं और भगवान विष्णु को वापस मांगा। राखी का मान रखते हुए राजा बलि ने भगवान विष्णु को वापस जाने दिया।
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ये कथाएं बताती हैं कि रक्षाबंधन (Raksha Bandhan) का पर्व केवल सगे भाई-बहन तक सीमित नहीं है। यह प्रेम, विश्वास, त्याग और एक-दूसरे की रक्षा के वचन का प्रतीक है, जो किसी भी रिश्ते में निस्वार्थ भाव से निभाया जा सकता है।
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सदियों पुरानी ये पौराणिक कथाएं आज भी रक्षाबंधन (रक्षाबंधन 2025) के त्योहार की नींव हैं। जब बहनें अपने भाई को राखी बांधती हैं, तो वे इन्हीं प्राचीन प्रतिज्ञाओं और प्रेम की भावना को जीवंत करती हैं, जिससे यह परंपरा हमेशा पवित्र और महत्वपूर्ण बनी रहेगी।
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