Nov 27, 2025
इस महापर्व का निर्धारण मुख्य रूप से देवगुरु बृहस्पति के राशि परिवर्तन पर निर्भर करता है। ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, बृहस्पति को एक राशिचक्र पूरा करने में लगभग बारह वर्ष लगते हैं।
Credit: The Sootr
सिंहस्थ नाम बृहस्पति के सिंह राशि में प्रवेश करने के कारण पड़ता है। उज्जैन में सिंहस्थ कुंभ तब लगता है जब बृहस्पति सिंह राशि में और सूर्य मेष राशि में होते हैं।
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ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, नासिक (त्र्यंबकेश्वर) में भी कुंभ पर्व तब आयोजित होता है जब देवगुरु बृहस्पति सिंह राशि में प्रवेश करते हैं। गोदावरी नदी के तट पर होने वाले इस कुंभ का बहुत बड़ा धार्मिक महत्त्व है।
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ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, कुंभ पर्व के स्नान की शुभ तिथियां सूर्य, चंद्र और बृहस्पति के गोचर पर निर्भर करती हैं। शाही स्नान के दिन इन तीनों ग्रहों की स्थिति विशेष रूप से पवित्र योग बनाती है।
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पौराणिक कथाओं के मुताबिक, अमृत कलश से बूंदें चार स्थानों पर छलकी थीं। इन चारों स्थानों पर अमृत योग तभी बनता है जब ग्रह विशेष शुभ स्थिति में आते हैं।
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अगला सिंहस्थ कुंभ मेला 2028 मध्य प्रदेश के उज्जैन में वर्ष 2028 में आयोजित होगा। इस महापर्व के लिए प्रशासन और सरकार ने अभी से भव्य तैयारियां शुरू कर दी हैं।
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ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, उज्जैन सिंहस्थ पर्व के दौरान शिप्रा नदी में स्नान करने से सभी पापों से मुक्ति मिलती है। इस शुभ योग में किया गया स्नान व्यक्ति को मोक्ष और पुण्य प्रदान करता है।
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