Mar 27, 2025
राजनांदगांव के डोंगरगढ़ में स्थित यह मंदिर पहाड़ी की चोटी पर है और ऐतिहासिक महत्व रखता है। नवरात्रि के दौरान यहां ज्योति कलश जलाए जाते हैं और भक्त दूर-दूर से दर्शन के लिए आते हैं।
Credit: The Sootr
दंतेवाड़ा में स्थित यह मंदिर 52 शक्ति पीठों में एक है और यहां दीपक जलाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। यह बस्तर राज्य की कुल देवी का मंदिर भी है, जहां देवी सती का दांत गिरने की कथा प्रसिद्ध है।
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रतनपुर, बिलासपुर में स्थित यह मंदिर 52 शक्तिपीठों में गिना जाता है और इसकी वास्तुकला अद्भुत है। नवरात्रि में यहां भक्तों की भारी भीड़ होती है और मां की पूजा से मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
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जांजगीर चांपा में महानदी के किनारे स्थित यह मंदिर नवरात्रि के दौरान लाखों भक्तों को आकर्षित करता है। भक्तों का मानना है कि मां चंद्रहासिनी देवी सच्चे मन से की गई प्रार्थनाओं को स्वीकार करती हैं।
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राजगढ़ में स्थित बंजारी माता का मंदिर भक्तों के लिए विशेष है और नवरात्रि के दौरान यहां भारी भीड़ रहती है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मन्नत मांगने पर वह पूरी होती है।
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रायपुर से 85 किलोमीटर दूर स्थित जतमई घटारानी मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा हुआ है और साल भर खुला रहता है। यह स्थान भक्तों के लिए धार्मिक अनुभव के साथ-साथ प्रकृति की सुंदरता का भी अनुभव कराता है।
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कांकेर में स्थित यह मंदिर देवी दुर्गा और काली को समर्पित है। भक्तों का मानना है कि यहां विधिपूर्वक पूजा करने से मां आशीर्वाद देती हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।
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राजनांदगांव में स्थित पाताल भैरवी मंदिर तीन हिस्सों में बंटा हुआ है, जिसमें शिवलिंग, त्रिपुर सुंदरी और पाताल भैरवी की मूर्तियां हैं। यह मंदिर भक्तों के लिए एक प्रमुख आस्था केंद्र है।
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