Oct 14, 2025
इंदौर के पास गौतमपुरा में दिवाली के अगले दिन एक अनोखी लड़ाई होती है, इसमें दो टीमें 'हिंगोट' (एक तरह का छोटा बम) एक-दूसरे पर फेंकती हैं।
Credit: The Sootr
झाबुआ और मालवा में दिवाली के बाद एक अनोखी रस्म होती है। मन्नतें पूरी होने पर लोग गोमाता के झुंड के ठीक नीचे जमीन पर लेट जाते हैं।
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मंडला जिले के कई गांवों में लोग एक दिन पहले दिवाली मना लेते हैं, ये गांव अपनी सदियों पुरानी ग्राम देवता की आज्ञा वाली इस परंपरा को नहीं तोड़ते,वे मानते हैं कि अगर ये रस्म तोड़ी गई, तो कोई बड़ी अनहोनी हो सकती है।
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धार जिले के डही इलाके के करीब 62 गांव में दिवाली का त्योहार दो महीने तक चलता है, जिसे वे दीवा कहते हैं,
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छिंदवाड़ा के रावनवाड़ा गांव में दिवाली पर कोई दीया या जश्न नहीं होता, बल्कि लोग सवा महीने तक शोक मनाते हैं, यहां के आदिवासी रावण को अपना पूर्वज मानते हैं और उनकी मृत्यु का गम मनाते हैं।
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रतलाम महालक्ष्मी मंदिर Diwali पर करोड़ों के नोटों और गहनों से सजाया जाता है, फूलों की जगह यहां धन की देवी का श्रृंगार पैसे से होता है।
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