Feb 14, 2026
इस साल महाशिवरात्रि पर 15 फरवरी सुबह 6 बजे से लेकर 16 फरवरी तक मंदिर के पट लगातार 44 घंटे खुले रहेंगे। इस दौरान श्रद्धालु बिना किसी रुकावट के बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन कर अपनी मनोकामनाएं मांग सकेंगे।
Credit: The Sootr
उज्जैन में महाशिवरात्रि से 9 दिन पहले (6 फरवरी से) शिव नवरात्रि शुरू हो चुकी थी। ये महादेव के विवाह उत्सव के रूप में मनाई जाती है। मान्यता है कि माता पार्वती ने शिव को पति रूप में पाने के लिए इन्हीं 9 दिनों में कठिन तपस्या की थी।
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16 फरवरी को शिव नवरात्रि के समापन पर दोपहर 12 बजे विशेष भस्म आरती की जाएगी। पूरे साल में केवल महाशिवरात्रि के अगले दिन ही बाबा महाकाल की भस्म आरती दोपहर में आयोजित करने की परंपरा है।
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दोपहर की भस्म आरती से पहले भगवान महाकाल को फलों, फूलों और सात तरह के अनाजों से बना सुंदर सेहरा सजाया जाएगा। ये अद्भुत दृश्य देखने के लिए दुनियाभर से श्रद्धालु उज्जैन नगरी पहुंचते हैं।
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महाशिवरात्रि पर्व (महाकाल का दरबार) के दिन और रात के चारों प्रहर में महादेव की विशेष आराधना और अभिषेक किया जाता है। माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और शिव नाम का जाप करने से जीवन में सुख-समृद्धि और शांति आती है।
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महाकाल मंदिर को सिंगापुर, हांगकांग और स्विट्जरलैंड जैसे देशों से मंगाए गए 40 प्रजातियों के फूलों से सजाया जा रहा है। बेंगलुरु के 200 कलाकार दिन-रात मेहनत करके नंदी हॉल और गर्भगृह को हवाई मार्ग से आए इन खास फूलों से बेहद खूबसूरत रूप दे रहे हैं।
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इस बार मंदिर की सजावट दक्षिण भारत के प्रसिद्ध नटराज मंदिर की थीम पर की जा रही है, जो पूरी तरह प्राकृतिक होगी। पिछले 12 वर्षों से यह सेवा दे रहे कृष्णमूर्ति रेड्डी की टीम लाखों की लागत से मंदिर को एक दिव्य और अलौकिक स्वरूप दे रही है।
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