Aug 23, 2025
करीब 5,000 बच्चों ने मिलकर मिट्टी से गणेश प्रतिमाएं बनाई, जो पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्य से तैयार की गईं। यह पहल बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुई।
Credit: The Sootr
इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाएं बच्चों को पारंपरिक तरीके से गणेश उत्सव मनाने का एक नया तरीका प्रदान करती हैं। इससे मिट्टी से बनी प्रतिमाएं अधिक प्राकृतिक और सुरक्षित होती हैं।
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गणेश प्रतिमाएं बनाते समय बच्चों में गजब का आनंद और उत्साह देखा गया। उनकी मेहनत और जोश ने इस कार्यक्रम को खास बना दिया। मिट्टी से प्रतिमाएं बनाते वक्त उनके चेहरे पर खुशी और सृजनात्मकता की झलक साफ दिखाई दी।
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बच्चों ने एकजुट होकर शपथ ली कि वे केवल मिट्टी के गणेश बनाएंगे और उनका ही पूजन करेंगे। इस पहल से उन्होंने पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी को समझा और पारंपरिक तरीकों को अपनाने का संकल्प लिया। यह शपथ उनके जागरूकता और सशक्तिकरण का प्रतीक बन गई।
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करीब 35 स्कूलों के बच्चों ने उत्साह के साथ मिट्टी से गणेश प्रतिमाएं बनाई। इस प्रयास से बच्चों ने अपनी कला और सृजनात्मकता को प्रदर्शित किया, साथ ही पारंपरिक गणेश उत्सव (ganpati) में अपनी भागीदारी सुनिश्चित की।
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बच्चों ने 100 प्रशिक्षकों की मार्गदर्शन और मदद से गणेश प्रतिमाएं बनाई। प्रशिक्षकों की विशेषज्ञता ने बच्चों को तकनीकी रूप से सही तरीके से काम करने में सहायता दी, जिससे हर प्रतिमा का निर्माण सहज और प्रभावी रहा।
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आईएएस रौशन कुमार सिंह, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा और श्री संजय अग्रवाल की उपस्थिति में 5,000 से अधिक बच्चों ने मिट्टी के गणेश बनाए। इस मौके पर बच्चों द्वारा पर्यावरण संरक्षण का दिया जा रहा है संदेश और साथ ही समुदाय में जागरूकता बढ़ाने का प्रयास भी किया जा रहा।
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