Oct 8, 2025
डॉ. हेडगेवार ने 1925 में संघ की स्थापना करके 'शाखा' की कार्यप्रणाली शुरू की, जिसका मुख्य उद्देश्य स्वयंसेवकों में राष्ट्रीय चरित्र और अनुशासन भरकर संगठन की नींव को मजबूत करना था।
Credit: The Sootr
श्री गुरुजी के कार्यकाल में, गांधीजी की हत्या के बाद संघ पर प्रतिबंध लगा, जो एक बड़ी रुकावट थी। हालांकि, उनके नेतृत्व में ABVP और BMS जैसे कई संगठन बनकर संघ का कार्यक्षेत्र व्यापक रूप से फैला।
Credit: The Sootr
बालासाहब देवरस ने सामाजिक समानता पर जोर दिया और उनके समय में 1975 में लगे आपातकाल के खिलाफ संघ ने बड़ा संघर्ष किया, साथ ही BJP की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
Credit: The Sootr
रज्जू भैया पहले प्रोफेसर सरसंघचालक थे, जिन्होंने संघ के विचारों में खुलापन लाया और HSS के जरिए संगठन के काम को विदेशों में तेजी से बढ़ाया।
Credit: The Sootr
के.एस. सुदर्शन ने 'स्वदेशी' विचार को सबसे आगे रखा, और उनके समय में संघ ने पहली बार डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में भी अपनी पहचान बनाई।
Credit: The Sootr
आरएसएस प्रमुख डॉ. मोहन भागवत के कार्यकाल में, संघ ने सामाजिक पहुंच और संवाद पर जोर दिया है, और वर्दी में बदलाव कर संगठन को एक आधुनिक पहचान दी है।
Credit: The Sootr
Thanks For Reading!