Aug 6, 2024
1988 में इरशाद शासन के दौरान चटगाँव में शेख हसीना के काफिले पर हमला हुआ था।
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1989 में ढाका के धनमंडी में उनके आवास पर फ्रीडम पार्टी के हथियारबंद लोगों ने हमला किया।
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1991 में उपचुनावों के दौरान हसीना पर गोलियां चलाई गईं, लेकिन वे सुरक्षित रहीं।
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1994 में यात्रा के दौरान उनके रेल कोच पर गोलियां चलाई गईं, लेकिन वे बच गईं।
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2000 में गोपालगंज में रैली के दौरान विस्फोटक बरामद हुए, जिससे उनकी हत्या की साजिश नाकाम हो गई।
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2004 में ढाका में ग्रेनेड हमले में 24 लोग मारे गए, लेकिन शेख हसीना बाल-बाल बचीं।
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2011 में अंतरराष्ट्रीय समूह ने हसीना की हत्या की साजिश रची थी, लेकिन वह सफल नहीं हो पाई।
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2014 में प्रशिक्षित महिला आतंकवादियों द्वारा हसीना की हत्या की साजिश रची गई थी।
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