1 साल बाद आज रात को 12 बजे खुलेंगे नागचंद्रेश्वर मंदिर के कपाट, जानिए मंदिर का इतिहास

Pratibha ranaa

Aug 8, 2024

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उज्जैन के नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट आज रात 12 बजे खुलेंगे, जो साल में सिर्फ एक बार नागपंचमी के दिन खुलता है।

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यह मंदिर केवल 24 घंटे के लिए दर्शनार्थियों के लिए खुला रहेगा, जिसमें लाखों श्रद्धालु भगवान नागचंद्रेश्वर के दर्शन करेंगे।

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नागपंचमी पर्व भगवान नागचंद्रेश्वर के जन्मदिन के रूप में मनाया जाता है और इस दिन मंदिर के दर्शन से कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष खत्म होने की मान्यता है।

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महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य शिखर के तीसरे खंड में स्थित यह मंदिर 11वीं शताब्दी की प्रतिमा को समर्पित है, जिसमें शिव और पार्वती नाग के आसन पर विराजित हैं।

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मंदिर में भगवान शिव, देवी पार्वती, भगवान गणेश, सप्तमुखी नाग देवता और उनके वाहन नंदी और सिंह की प्रतिमाएं भी हैं।

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मंदिर का इतिहास 1050 ईस्वी का है, जब परमार राजा भोज ने इसका निर्माण करवाया था और 1732 में महाराज राणोजी सिंधिया ने इसका जीर्णोद्धार करवाया था।

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मंदिर की विशेषता है कि यह साल में केवल नागपंचमी के दिन ही खुलता है, बाकी समय बंद रहता है।

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नागचंद्रेश्वर मंदिर का नाम नाग और चंद्रमा के संयोग को दर्शाता है, जो हिंदू धर्म में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

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इस मंदिर के बारे में कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं, जिनमें मान्यता है कि भगवान शिव ने नागराज तक्षक को शरण दी थी।

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मंदिर का निर्माण वास्तु शास्त्र के अनुरूप किया गया है, जिससे इसे खास आध्यात्मिक महत्व प्राप्त होता है।

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