Aug 21, 2025
मानसून सत्र में विपक्ष के हंगामे ने संसद की कार्यवाही को पूरी तरह से प्रभावित किया, जिससे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा बाधित हुई और संसद की कार्यक्षमता पर असर पड़ा। सत्र का अंतिम दिन भी हंगामेदार रहा, जहां विपक्ष के विरोध, व्यवधान और बायकॉट से कार्यवाही पूरी तरह रुक गई।
Credit: The Sootr
राज्यसभा में इस सत्र के दौरान सिर्फ 38% कामकाज हुआ, बाकी समय हंगामे में बर्बाद हो गया। उपसभापति ने इसे निराशाजनक बताया। लोकसभा में केवल 37 घंटे की चर्चा हुई, जिसमें 12 विधेयक पारित हुए।
Credit: The Sootr
विपक्षी विरोध के बावजूद राज्यसभा में ऑनलाइन गेमिंग बिल ध्वनिमत से पारित कर दिया गया। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने विधेयक पेश किया, जिसका उद्देश्य ई-स्पोर्ट्स और ऑनलाइन मनी गेम्स को नियंत्रित करना था। विरोध और हंगामे के कारण कार्यवाही 10 मिनट के लिए रोक दी गई, लेकिन बिल पास हो गया।
Credit: The Sootr
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने सांसदों के आचरण पर कड़ी नाराजगी जताई, कहा कि हंगामे से लोकतंत्र की छवि को नुकसान हो रहा है। उन्होंने सांसदों को चेतावनी दी कि उनका व्यवहार देश की जनता के सामने निंदनीय है। शिष्टाचार बैठक बुलाने पर विपक्षी नेताओं ने इसका बहिष्कार किया, जिसमें राहुल गांधी भी शामिल थे, जो संसद में विरोध की राजनीति को दर्शाता है।
Credit: The Sootr
मानसून सत्र में लोकसभा में कुल 419 सवाल किए गए, जिनमें से महज 55 सवालों के ही उत्तर दिए गए। इससे पता चलता है कि कार्यवाही का अधिकांश समय विपक्षी हंगामे और व्यवधानों में बर्बाद हो गया।
Credit: The Sootr
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में हो रहे हंगामे और कार्यवाही की गति पर गहरी निराशा व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इस तरह के हंगामे से जनता के अहम मुद्दे प्रभावित होते हैं और देश की प्रगति में रुकावट आती है। प्रधानमंत्री ने लोकतंत्र की मर्यादा बनाए रखने का आह्वान किया।
Credit: The Sootr
विपक्ष के विरोध और नारेबाजी के बावजूद कई महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कर दिया गया। सदन में विरोध के बावजूद, सरकार ने अपने प्रस्तावों को मंजूरी दिलवाने में सफलता प्राप्त की। यह घटनाक्रम बताता है कि हंगामा फिर भी सदन की कार्यवाही को रोक नहीं पाया।
Credit: The Sootr
गृह मंत्री अमित शाह ने तीन महत्वपूर्ण विधेयकों को जॉइंट पार्लियामेंट्री कमेटी (JPC) में भेजने का प्रस्ताव रखा। इनमें प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री की गिरफ्तारी पर पद से इस्तीफा देने का प्रावधान था। इन विधेयकों पर विपक्षी विरोध के बावजूद चर्चा जारी रही।
Credit: The Sootr
Thanks For Reading!