Sep 22, 2025
Maihar का मां शारदा मंदिर 52 शक्तिपीठों में से एक है। मान्यता है कि यहां आज भी आल्हा-ऊदल माता की आरती करने आते हैं।
Credit: The Sootr
देवास की टेकरी पर छोटी माता (मां चामुंडा देवी) और बड़ी माता (तुलजा भवानी) एक साथ विराजित हैं। यहां देवी सती के रक्त से इन देवियों की उत्पत्ति हुई थी।
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उज्जैन में महाकाल मंदिर के पास स्थित हरसिद्धि माता मंदिर 51 शक्तिपीठों में शामिल है। यह स्थान शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है।
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दतिया का पीतांबरा देवी पीठ दस महाविद्याओं में से एक है। इन्हें ब्रह्मांड को स्थिर रखने वाली स्तंभ शक्ति माना जाता है।
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सीहोर के सलकनपुर में स्थित मां विजयासन का मंदिर 800 फीट ऊंचे पहाड़ पर है। भक्त 1401 सीढ़ियां चढ़कर दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
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छिंदवाड़ा में हिंगलाज माता का मंदिर सतपुड़ा की वादियों में स्थित है। माता सती के मस्तिष्क के यहां गिरने से यह शक्तिपीठ बना था, और उनके रौद्र रूप को शांत करने के कारण इनका नाम हिंगलाज पड़ा।
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इंदौर के बिजासन माता मंदिर में देवी दुर्गा के नौ स्वरूप एक साथ विराजमान हैं। इस मंदिर को सौभाग्य और संतानदायिनी माना जाता है।
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जबलपुर में मां नर्मदा के किनारे स्थित चौंसठ योगिनी मंदिर हजारों साल पुराना है। यहां भगवान शिव और पार्वती की विवाह के समय की अनोखी प्रतिमा स्थापित है।
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