Oct 15, 2025
माता लक्ष्मी जी की मूर्ति कमल के आसन पर बैठी हुई हो, ताकि उनकी कृपा मिले। साथ ही, उनके हाथ से धन की वर्षा हो रही हो। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, खड़ी हुई मुद्रा को अस्थिरता का प्रतीक माना जाता है।
Credit: The Sootr
गणेश जी की प्रतिमा में उनकी सूंड बाईं तरफ मुड़ी हुई ही शुभकारी मानी गई है। शास्त्रों में इसे सिद्धिदायक और सौम्य स्वरूप कहा गया है, जिसकी पूजा से घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है।
Credit: The Sootr
गणेश जी की मूर्ति में उनके हाथ में मोदक जरूर हो, (भगवान गणेश की कृपा ) यह खुशहाली की निशानी है। इसके साथ ही उनका वाहन मूषक भी मूर्ति में जरूर होना चाहिए।
Credit: The Sootr
भगवान गणेश और मां लक्ष्मी का मुख शांत और प्रसन्न मुद्रा में होना जरूरी है। यह स्वरूप घर में सकारात्मक ऊर्जा और आनंद लाता है।
Credit: The Sootr
मूर्ति खरीदते वक्त ध्यान रखें कि वह कहीं से टूटी-फूटी या खंडित न हो, और उसका रंग भी फीका या उतरा हुआ नहीं होना चाहिए। खंडित मूर्ति की पूजा अशुभ मानी जाती है।
Credit: The Sootr
दिवाली के लिए मिट्टी (टेराकोटा), पीतल, चांदी या अष्टधातु की मूर्ति लेना सबसे उत्तम माना जाता है। प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) या प्लास्टिक की मूर्ति से बचना चाहिए।
Credit: The Sootr
Thanks For Reading!