Sep 24, 2026
इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ अलग-अलग स्वरूपों की प्रतिदिन आराधना होती है। प्रथम शैलपुत्री से लेकर सिद्धदात्री तक हर रूप का अपना विशेष महत्व और भोग है। मान्यता है कि नवदुर्गा की पूजा से जीवन के सभी दुख और कष्ट दूर होते हैं।
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नवरात्रि के दौरान गुजरात और महाराष्ट्र समेत देशभर में गरबा-डांडिया की धूम रहती है। लोग पारंपरिक वेशभूषा पहनकर मां की भक्ति में रातभर नृत्य और उत्सव मनाते हैं। यह उत्सव केवल धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक एकता का भी अद्भुत प्रतीक है।
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नवरात्रि के आठवें और नौवें दिन अष्टमी और नवमी तिथि का विशेष विधान होता है। इस दिन माता रानी को हलवा, पूरी और काले चने का प्रसाद अर्पित किया जाता है। कई श्रद्धालु इन तिथियों पर व्रत का पारण कर मां का विशेष आशीर्वाद लेते हैं।
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अष्टमी या नवमी के दिन छोटी कन्याओं को मां दुर्गा का रूप मानकर पूजा जाता है। कन्याओं के पैर धोकर उन्हें आदरपूर्वक भोजन कराया जाता है और उपहार दिए जाते हैं। यह परंपरा समाज में नारी शक्ति के सम्मान और पूजा के महत्व को दर्शाती है।
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दसवें दिन यानी विजयादशमी को मां दुर्गा की प्रतिमाओं का विसर्जन किया जाता है। इसी दिन भगवान राम द्वारा रावण वध की खुशी में अधर्म पर धर्म की जीत का जश्न मनाते हैं। दशहरे के दिन रावण दहन कर अच्छाई के रास्ते पर चलने का संकल्प लिया जाता है।
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