चर्चा है..: प्रहलाद-नरोत्तम की गुफ्तगू, मंत्राणी का ज्योतिषी, खुजली मिटाने की अनमोल सलाहें

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चर्चा है..: प्रहलाद-नरोत्तम की गुफ्तगू, मंत्राणी का ज्योतिषी, खुजली मिटाने की अनमोल सलाहें

भोपाल. मध्य प्रदेश में कड़ाके की ठंड पड़ने लगी है। पहाड़ों से आ रही सर्द हवा नश्तर चुभो रही है। लेकिन इन सबके इतर राजनीतिक गलियारों में सरगर्मी की कोई कमी नहीं है। पिछले हफ्ते पंचायत चुनाव को लेकर दायर याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी तूफान बरपाए रही। सत्ताधारी दल और विपक्ष इसे अपनी-अपनी तरह से बखान करते रहे और खुद की पीठ थपथपाते रहे। कुछ खबरें दिखीं तो कुछ अंदरखाने पकती रहीं। मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल की गुपचुप गुफ्तगू की खुशबू फिजाओं में तैर रही है। एक मंत्री महोदया को उनके ज्योतिषी ने गड़बड़झालों की वजह बताई है। एक मंत्री जी की खुजली को लेकर तमाम सलाहियतें दी जा रही हैं। तो अंदर की खबरों को देखने के लिए सीधे अंदर उतर आइए...

दो मंत्रियों की नजदीकियां 

बीजेपी में भले ही ऊपर से सब कुछ अच्छा दिख रहा है, लेकिन अंदरखाने में उठापटक जारी है। यही वजह है कि बीजेपी के बड़े नेताओं से लेकर छोटे कार्यकर्ता हर छोटी-बड़ी राजनीतिक गतिविधियों के मायने अपने हिसाब से निकाल रहे हैं। ऐसा ही एक मामला इन दिनों राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का बाजार गरम किए हुए है। हाल ही में केंद्रीय मंत्री प्रहलाद पटेल ने राजधानी के चुनिंदा पत्रकारों को भोज पर आमंत्रित किया था। इस आयोजन में गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने भी शिरकत की। उनका आना भले ही सामान्य हो, लेकिन कहते हैं ​ना, जहां आपकी सोच खत्म होती है, नेता वहां से सोचना शुरु करते हैं। प्रहलाद पटेल के आयोजन में अकेले नरोत्तम का पहुंचना और दोनों मंत्रियों का एकांत में खड़े होकर लंबे समय तक चर्चा करना अब तूल पकड़ रहा है। कुछ बीजेपी नेता तो बाकायदा भोज में शामिल पत्रकारों को फोन लगाकर इसके मायने समझने की कोशिश कर रहे हैं। बहरहाल ये तो आने वाला समय ही बता पाएगा कि ओबीसी और ब्राह्मण नेता का ये गठजोड़ क्या वाकई आने वाले समय में कोई गुल खिला पाएगा।   

मंत्राणी को ज्योतिष की सलाह

शिवराज कैबिनेट की तेजतर्रार महिला मंत्री इन दिनों चुप-चुप सी हैं, सभी उनकी चुप्पी का राज जानना चाहते हैं। दो महीने पहले तक कैबिनेट में भी अपनी बात को जोरदार तरीके से रखने वाली मंत्राणी अब मौन साधे हुए हैं। दरअसल, एक ज्योतिष ने मंत्राणी से कहा है कि आप का गुस्सा ही आपका सबसे बड़ा दुश्मन है। यही वजह है कि आपने बेवजह अपने ​दुश्मन बना लिए हैं। जितना आप चुप रहेंगी, उतना आपका सम्मान और पार्टी में कद बढ़ेगा। ज्योतिष की बात में कितना दम है, ये तो समय बताएगा। लेकिन इतना तय है कि शिवराज जी जरूर राहत महसूस कर रहे हैं, क्योंकि हर दूसरी कैबिनेट में मंत्राणी का विरोध मीडिया की सुर्खी बनता था, जिससे सरकार की किरकिरी होती थी।

खुजली से ज्यादा सलाहकारों से परेशान मंत्रीजी

एक मंत्री अपनी खुजली से ज्यादा उन सलाहकारों से परेशान हैं, जो खुजली मिटाने के नाम पर कोई न कोई ऊटपटांग फार्मूला दे जाते हैं। अंदरखानों की माने तो एक जानकार ने मंत्री को खुजली भगाने के लिए पूरे शरीर पर गोबर का लेप लगाने की सलाह दी। मरता क्या न करता, खुजली से निजात पाने के लिए मंत्रीजी ने गोबर का लेप लगाकर 2-3 घंटे तक धूप भी सेंक ली। लेकिन खुजली है कि जाने का नाम ही नहीं ले रही। अब मंत्रीजी उस जानकार को ढूंढ रहे हैं, जिसने गोबर का लेप लगाने की सलाह दी थी। उसके चक्कर में तीन घंटे तक गोबर की बदबू से बचने के लिए मंत्रीजी को पूरे समय मुंह पर रूमाल रखना पड़ा।  

कलेक्टर के बहन की शादी

प्रदेश के एक कलेक्टर की बहन की शादी की तैयारियां इन दिनों चर्चा में हैं। दरअसल, इन साहब का पूरा परिवार उत्तर प्रदेश में रहता है, लेकिन कलेक्टर साहब की इच्छा है कि उनकी बहन की शादी उनके जिले से हो। फिर क्या है फूड डिपार्टमेंट से लेकर पूरा अमला मेहमानों की वीवीआईपी मेजबानी करने की तैयारी में जुट गया है। हाल ये है कि जिस तरह से अमले ने शादी के लिए सुविधाएं मुहैया कराने के लिए जोर आजमाइश की है, वो पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गई है कि कलेक्टर साहब के बहन की शादी है तो धूमधाम तो होगी ही।

कथित पत्रकार ने प्रमोटी आईएएस अफसरों को लगाया चूना

मंत्रालय में पदस्थ प्रमोटी आईएएस अफसरों को एक फर्जी पत्रकार ने लाखों रुपए का चूना लगा दिया। दरअसल, ये प्रमोटी अफसर कलेक्टर बनने का इंतजार कर रहे हैं, उनकी दुखती रग का फायदा उठाते हुए एक ​कथित पत्रकार ने उन्हें कलेक्टर बनाने का सब्जबाग दिखाकर पैसे ऐंठ लिए। मजेदार बात ये है कि लूटने के बाद अब ये अफसर किसी से अपना दर्द साझा भी नहीं कर पा रहे हैं। हाल ही में लूटे हुए प्रमोटी आईएएस अफसरों की बैठक भी हुई कि आखिर कथित पत्रकार से कैसे वसूली की जाए। इस पर एक साहब बोले कि जो चला गया, जाने दो, अभी चुप बैठने में ही भलाई है। वक्त आने पर देखेंगे, कहीं ये बात बाहर आ गई तो उलटा हमारे लिए परेशानी खड़ी हो जाएगी।

घूस के भरोसे साहब के मुंडे की पढ़ाई

इंदौर में वन विभाग के एक बड़े अफसर इन दिनों दाएं-बाएं तक देखने में सकपका रहे हैं। जिधर से निकलते हैं, इतनी तेजी से गुजर जाते हैं कि कोई दर्शन करे, उससे पहले कैबिन में घुस जाते हैं। हुआ यूं कि उनके निकटस्थ जमूरे ने किसी पूर्व अफसर की फाइल निपटाने के लिए घूस मांग ली। यहां तक तो साहब बचे हुए थे। लेकिन शागिर्द ने घूस मांगते हुए यह भी कह दिया कि तुम्हारा पैसा आने की उम्मीद में मैंने साहब के बच्चे की 16 हजार रुपए की किताबें मंगवाकर दे दी। लब्बोलुआब ये कि तुम घूस दो तो मेरे नुकसान की भरपाई हो, साहब तो पैसा देने से रहे। पुराने अफसर घुटे हुए थे, उन्होंने शागिर्द की बातें रिकॉर्ड कीं और विराट आवेदन के साथ सारी रिकार्डिंग मामा (शिवराज) को तो भेजी हीं, खुले बाजार में भी उतार दी। अब विभाग में जिसे देखो, वो फोन पर सलमान के गाने से ज्यादा वो रिकार्डिंग सुन रहा है। इसके बोलों का अर्थ ये है कि साहब का मुंडा पढ़ाई भी घूस के भरोसे कर रहा है। बात बहुत बिगड़ गई है। पक्का है, किसी न किसी का कुछ तो बिगड़ेगा। या तो साहब का या शागिर्द का।

बाबा बड़े घाटे में चले गए

इंदौर के एक विधायक होते हैं, महेंद्र हार्डिया उर्फ बाबा। पुराने मंत्री भी रहे हैं लेकिन अभी बाबागिरी से ही काम चल रहा है। बाबा काम के मामले में इतने बाबा हैं कि पहला फोन जिसका चला जाए, उसे ही अंतिम सत्य मानकर, उसके पक्ष में अफसरों को घंटी लगा देते हैं। वो न तो वोटों का लाभ-हानि देखते हैं, ना सही गलत का। दो दिन पहले ऐसे ही मामले में बाबा बड़े घाटे में चले गए। हुआ यूं कि उनकी विधानसभा में नगर निगम की टीम में कार्रवाई कर दी। जिस जगह कार्रवाई की वहां की कब्जेधारियों की घुसपैठ इतनी ज्यादा थी कि जनता को लहराकर निकलना पड़ता था। बस इधर टीम पहुंची, उधर कब्जा टीम ने बाबा को घंटी लगा दी। बाबा के बारे में कहा जाता है, फायर ब्रिगेड और बाबा को एक साथ फोन लगाओ। पहले बाबा पहुंचेंगे। यहां बाबा तो नहीं पहुंचे, लेकिन उनका फोन निगम टीम के पास पहुंच गया...हटो वहां से..क्यों कार्रवाई कर रहे हो। अमला हट भी गया लेकिन हिदायत दे गया कि फिर फैलकर सड़क तक आए तो समेटने में देर नहीं करेंगे। ये अलग बात है कि इस फोन से कब्जेधारी भले ही खुश हो गए, लेकिन बाबा के खाते का वोट बैलेंस डेबिट हो गया। बाबा हैं। बाबा ऐसे ही होते हैं, लाभ-हानि की चिंता नहीं करते।

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