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News In Short
- ग्वालियर में 62 लाख के प्लॉट के लिए फैक्ट्री संचालक प्रेम कुमार का फर्जी डेथ सर्टिफिकेट तैयार किया गया।
- आरोपियों ने फर्जी वसीयत बनाई और नोटरी के जरिए उसे सर्टिफाइड भी करवा लिया।
- ट्रांसपोर्ट नगर स्थित कीमती प्लॉट को हड़पने के लिए पूरी जालसाजी रची गई।
- मुख्य आरोपी सुभाषचंद्र खुशीरमानी समेत 6 लोगों पर गंभीर धाराओं में केस दर्ज।
- पुलिस अब फर्जी डाक्यूमेंट्स बनाने वाले रैकेट और नोटरी करने वालों की संलिप्तता की जांच कर रही है।
News In Detail
मध्य प्रदेश के ग्वालियर से जालसाजी का एक ऐसा किस्सा सामने आया है, जिसे सुनकर आप दंग रह जाएंगे। यहां एक जीवित व्यक्ति को कागजों पर मृत घोषित कर दिया गया, ताकि उसकी करोड़ों की संपत्ति पर कब्जा किया जा सके। यह पूरी साजिश किसी फिल्मी स्क्रिप्ट जैसी लगती है। जहां जालसाजों ने फर्जी वसीयत से लेकर डेथ सर्टिफिकेट तक सब कुछ असली जैसा तैयार कर लिया।
क्या है पूरा मामला?
ग्वालियर के विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब एक शख्स ने थाने पहुंचकर कहा- साहब, मैं जिंदा हूं! इस शख्स का नाम है प्रेम कुमार, जो पेशे से एक फैक्ट्री संचालक हैं। प्रेम कुमार पहले ग्वालियर के गांधी नगर में रहते थे, लेकिन अब वे हरियाणा में रह रहे हैं।
जब उन्हें भनक लगी कि ग्वालियर में उनकी प्रॉपर्टी को लेकर कुछ कालाबाजारी हुई है, तो वे तुरंत वहां पहुंचे। पुलिस के सामने जब उन्होंने अपनी पहचान बताई, तो अधिकारी भी हैरान रह गए, क्योंकि सरकारी डाक्यूमेंट्स में उन्हें मृत घोषित किया जा चुका था।
प्रेम कुमार की औद्योगिक क्षेत्र बिरला नगर में यूनिवर्सल ऑटो की असली जड़ बना उनका एक प्लॉट, जो ट्रांसपोर्ट नगर न्यू लोहा मंडी क्षेत्र में स्थित है। इस प्लॉट की मौजूदा कीमत करीब 62 लाख 10 हजार रुपए है। इसी बेशकीमती जमीन के लालच में आरोपियों ने प्रेम कुमार को कागजों में ठिकाने लगाने की योजना बनाई।
फर्जी वसीयत और नोटरी का खेल
पुलिस की जांच में खुलासा हुआ कि, मुख्य आरोपी सुभाषचंद्र खुशीरमानी ने अपने साथियों के साथ मिलकर इस साजिश को अंजाम दिया। उन्होंने सबसे पहले प्रेम कुमार की एक फर्जी वसीयत तैयार कराई। जालसाजी की हद तो देखिए, इस वसीयत में प्रेम कुमार की फोटो लगाकर उसे नोटरी से प्रमाणित भी करा लिया गया। ऐसा दिखाया गया जैसे प्रेम कुमार ने अपनी मर्जी से यह संपत्ति आरोपियों के नाम कर दी हो।
वसीयत बनाने के बाद अगला कदम और भी खौफनाक था। आरोपियों ने नगर निगम या संबंधित विभाग के नाम पर प्रेम कुमार का फर्जी डेथ सर्टिफिकेट बनवा लिया। इस फर्जी सर्टिफिकेट का इस्तेमाल कर उन्होंने जमीन का बैनामा अपने नाम करवा लिया। इस तरह कागजों पर एक जीवित व्यक्ति की संपत्ति को पूरी तरह से हड़प लिया गया।
छह आरोपियों पर केस, पुलिस की तलाश जारी
विश्वविद्यालय थाने की पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए, सुभाषचंद्र खुशीरमानी, शकुंतला खुशीरमानी, हरीश कुमार, जगदीश कुशवाह और योगेश पाल सहित कुल छह लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।
सीएसपी रोबिन जैन के मुताबिक, आरोपियों के खिलाफ धोखाधड़ी और दस्तावेजों की कूटनीति की धाराओं में केस दर्ज किया गया है। पुलिस अब उन लोगों की भी जांच कर रही है जिन्होंने इन फर्जी दस्तावेजों को प्रमाणित करने में मदद की।
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