Aug 14, 2025
ये उज्जैन का वही पवित्र स्थान है जहां भगवान श्री कृष्ण, उनके भाई बलराम और मित्र सुदामा ने गुरु महर्षि सांदीपनि से शिक्षा प्राप्त की थी। माना जाता है कि यहीं पर भगवान कृष्ण ने 64 कलाएं और वेदों का ज्ञान सीखा था। आश्रम के पास एक अंकपट भी है जहां कहा जाता है कि कृष्ण ने सबसे पहले अंक लिखने का अभ्यास किया था।
Credit: The Sootr
यह मंदिर उज्जैन के पुराने शहर में स्थित है और करीब 200 साल पुराना है। यह अपने भव्य वास्तुकला और ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है, जिसके गर्भगृह में लगा रत्न जड़ित द्वार महमूद गजनवी द्वारा लूटा गया था। यहां जन्माष्टमी के साथ-साथ 'हरिहर का पर्व' भी धूमधाम से मनाया जाता है, जिसमें भगवान महाकाल और गोपाल कृष्ण का मिलन होता है।
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उज्जैन में स्थित यह मंदिर श्री राधा मदन मोहन मंदिर के नाम से भी जाना जाता है और भगवान कृष्ण के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र है। मंदिर की वास्तुकला बहुत ही आकर्षक है, जहां सफेद संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है और दीवारों पर भगवान कृष्ण के जीवन की कहानियों को दर्शाया गया है। यहां हर दिन भक्तों के लिए कीर्तन, भजन और आध्यात्मिक होते हैं जो कृष्ण भक्ति को बढ़ावा देते हैं।
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जबलपुर के संस्कारधानी क्षेत्र में स्थित यह मंदिर गोंड काल की स्थापत्य शैली को दर्शाता है, जिसकी छत लकड़ी के गाटरों पर टिकी है। इस मंदिर में स्थापित भगवान कृष्ण (राधाकृष्ण) की मूर्ति 500 साल पुरानी है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से भक्त आते हैं।
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इंदौर के राजवाड़ा क्षेत्र में बना यह (इंदौर गोपाल मंदिर) मंदिर होलकर परिवार ने बनवाया था, जो अपनी कला और वास्तुकला के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर की स्थापत्य शैली में मालवा और मराठा शैली का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है।
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