Nov 14, 2025
देवास की टेकरी पर माता चामुंडा और माता तुलजा भवानी विराजमान हैं। नवरात्रि में यहां देश भर से भक्त माता के दर्शन करने के लिए उमड़ते हैं।
Credit: The Sootr
यह स्थान शक्तिपीठ नहीं, बल्कि रक्तपीठ कहलाता है। मान्यता है कि यहीं पर देवी मां का रक्त गिरा था, जिससे मां चामुण्डा का प्राकट्य हुआ।
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एक कथा के अनुसार, बड़ी माता (तुलजा भवानी) और छोटी माता (चामुंडा) में मतभेद हुआ था। इसी कारण तुलजा भवानी का मुख दक्षिण की ओर और चामुंडा का मुख उत्तर की ओर है।
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मां तुलजा भवानी भक्तों को एक दिन में तीन अलग-अलग रूपों में दर्शन देती हैं। सुबह बाल रूप, दोपहर में युवा अवस्था और रात में वृद्ध स्वरूप दिखाई देता है।
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मंदिर परिसर में एक प्राचीन कुंड मौजूद है। पुजारियों के मुताबिक, मान्यता है कि माता रानी प्रतिदिन इसी पवित्र कुंड में स्नान करती हैं।
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यह भी माना जाता है कि राजा भर्तृहरि 45 किलोमीटर लंबी गुप्त सुरंग उज्जैन से माता के पूजन के लिए एक गुप्त सुरंग से यहां आते थे। आज भी छोटी माता मंदिर के पास उस पुरानी गुफा का द्वार मौजूद है।
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भक्त यहां सुहाग का सामान, चांदी की जीभ या चांदी के चरण जैसे विशेष भेंट अर्पित करते हैं। मनोकामना पूरी होने के लिए उल्टा स्वास्तिक बनाया जाता है, जिसे इच्छा पूरी होने पर सीधा किया जाता है। डिस्क्लेमर: इस आर्टिकल में दी गई जानकारी पूरी तरह से सही या सटीक होने का हम कोई दावा नहीं करते हैं। ज्यादा और सही डिटेल्स के लिए, हमेशा उस फील्ड के एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।
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