Mar 18, 2024
सिम की गड़बड़ से आर्थिक परेशानी को झेलने से बचाने के लिए अर्थारिटी ने इसी माह 15 मार्च को नए नियम की जानकारी मुहैया कराई है और बताया है कि 1 जुलाई से लागू होने वाले इस नियम कई तरह के ऑनलाइन फ्रॉड पर तो रोक लगेगी ही, साथ ही लोग मानसिक परेशानी से भी बच पाएंगे।
Credit: The Sootr
जो नियम बनाया गया है, उसके अनुसार मोबाइल उपभोक्ता ने हाल ही में अपने सिम कार्ड स्वैप किया है, तो वह अपना मोबाइल नंबर पोर्ट नहीं कर पाएगा। असल में सिम स्वैप का अर्थ है कि उपभोक्ता ने अपना सिम कार्ड खो जाने, उसके टूट जाने या अन्य वजह से काम न करने पर बदला है।
Credit: The Sootr
इसके लिए करना यह होता है कि उपभोक्ता टेलीकॉम कंपनी के ऑपरेटर से संपर्क साधकर पुराने नंबर का ही नया सिम हासिल कर लेता है। नए नियम को फ्रॉड करने वालों को सिम स्वैपिंग या फिर रिप्लेसमेंट के तुरंत बाद मोबाइल कनेक्शन को पोर्ट करने से रोकने से रोकने के लिए उठाया गया है। पोर्ट का अर्थ यह होता है कि उपभोक्ता अपने नंबर को दूसरी टेलीकॉम कंपनी में ट्रांसफर नहीं करवा सकता है।
Credit: The Sootr
पोर्ट का चलन इसलिए बढ़ गया है कि अनेकों उपभोक्ताओं को अपने इलाके में किसी टेलीकॉम कंपनी का नंबर नहीं लगता है तो वह बदल लेता है। लोग अपना लेन-देन मोबाइल के जरिए ही कर रहे हैं, इसलिए सिम स्वैपिंग भी फ्रॉड बढ़ गए हैं, जिसमें फ्रॉड करने वाले उपभोक्ता के पेन कार्ड और आधार की फोटो कॉपी आसानी से पा लेते हैं और उसके बाद मोबाइल खो जाने का हवाला देकर नया सिम कार्ड जारी करा लेते हैं।
Credit: The Sootr
Thanks For Reading!