The Sootr

Rahul Garhwal

Apr 18, 2024

The Sootr

दोपहर ठीक 12 बजे अभिजीत मुहूर्त में रामलला के माथे पर सूर्य की किरणें 3 मिनट तक पड़ीं।

Credit: The Sootr

The Sootr

सूर्य तिलक के साथ ही रामलला का जन्म हो गया।

Credit: The Sootr

The Sootr

सूर्य तिलक के लिए अष्टधातु के 20 पाइप से 65 फीट लंबा सिस्टम बनाया गया। इसमें 4 लेंस और 4 मिरर के जरिए गर्भ गृह तक रामलला के मस्तक पर किरणें पहुंचाई गईं। ये आप अगली स्लाइड में देख सकते हैं।

Credit: The Sootr

The Sootr

Credit: The Sootr

The Sootr

आदित्य L-1 बनाने वाले बेंगलुरु के संस्थान इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स के साइंटिस्ट ने ही रामलला का सूर्य तिलक किया।

Credit: The Sootr

The Sootr

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी रामलला का सूर्य तिलक देखा।

Credit: The Sootr

The Sootr

भारत सरकार ने ऐलान किया कि हर रामनवमी पर रामलला का इसी तरह सूर्य तिलक किया जाएगा।

Credit: The Sootr

Thanks For Reading!

Next: Google Wallet App: डिजी लॉक को टक्कर देने आ गया गूगल वॉलेट, जानें इसके फायदे