सागर सेंट्रल जेल के कैदी सजा पूरी होने के बाद बनेंगे कर्मकांडी, गर्भधारण से लेकर मृत्यु तक के कराएंगे संस्कार

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BP Shrivastava
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सागर  सेंट्रल जेल के  कैदी सजा पूरी होने के बाद बनेंगे कर्मकांडी, गर्भधारण से लेकर मृत्यु तक के कराएंगे संस्कार

विपिन दुबे, SAGAR. सागर सेंट्रल जेल में एक नवाचार किया जा रहा है। जिसमें गायत्री परिवार के सहयोग से जेल में बंद कैदियों को अध्यात्म की शिक्षा दी जा रही है। इसकी पहली कड़ी में 28 महिला कैदियों समेत 98 कैदियों ने गायत्री परिवार से दीक्षा ली है। इन्हें गर्भधारण से लेकर मृत्यु तक से संस्कार सिखाए जा रहे हैं। जो जेल से रिहा होने के बाद 'कर्मकांडी' बनकर बाकी का जीवन व्यतीत कर सकेंगे। इस बारे में सेंट्रल जेल के अधीक्षक दिनेश नरगावे ने बताया कि इस नवाचार से जेल में सकारात्मक माहौल बन रहा है। साथ ही इस कार्य में जेल का कोई अतिरिक्त खर्च भी नहीं हो रहा है।



98 कैदियों ने ली गायत्री परिवार की दीक्षा



जेल अधीक्षक दिनेश नरगावे ने 70 पुरुष और 28 महिला सजायाफ्ता कैदियों को गायत्री परिवार की दीक्षा दिलाई है। पिछले महीने उन्होंने जेल में 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन किया था, जिसमें करीब 100 कैदी दीक्षित हुए हैं।



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गर्भधारण से लेकर मृत्यु तक के संस्कार सिखाए जा रहे



उन्होंने बताया गायत्री परिवार से दीक्षित इन कैदियों को गर्भधारण से लेकर मृत्यु तक के संस्कार सिखाए जा रहे हैं। इसके लिए ऐसे कैदियों का चयन किया गया है जो दसवीं पास हैं और जिनकी संस्कृत में रुचि है। पैरोल पर रिहा होने या सजा पूरी होने के बाद यह कैदी कर्मकांडी बनकर अध्यात्म की राह में अपना बाकी जीवन व्यतीत करेंगे। 



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 45 दिन का शैक्षणिक संस्कार शिविर जून में



उन्होंने बताया समाज में एक विद्वान मंत्रोच्चार के साथ जो कार्य करता उन्हीं संस्कारों की शिक्षा इन कैदियों को दी जा रही है। अगले महीने यानी जून में गायत्री परिवार से दीक्षित कैदियों के लिए 45 दिन का शैक्षणिक संस्कार शिविर लगाया जा रहा है। सागर का गायत्री परिवार ट्रस्ट कैदियों के लिए गायत्री मंत्र लेखन के लिए पेन सहित अन्य सामग्री उपलब्ध कराता है। जीरो बजट पर जेल प्रशासन का यह नवाचार काबिल-ए-तारीफ है।



1100 कैदी रखते हैं एकादशी का व्रत



सागर की सेंट्रल जेल में  894 कैदियों के रहने की क्षमता है, लेकिन वर्तमान में जेल में 2043 कैदी हैं। जिनमें से आधे से ज्यादा कैदी यानी करीब 1100 कैदी एकादशी का व्रत रखते हैं। सभी के गले में तुलसी की माला है और जेल प्रशासन उनके लिए फलाहार की व्यवस्था करता है। कैदियों के लिए अध्यात्म से मोक्ष का रास्ता मिले, इसी मकसद से जेल प्रशासन बीते 4 महीनों में राम कथा, भागवत कथा और 108 कुंडीय गायत्री महायज्ञ का आयोजन कर चुका है। यानी कह सकते हैं जेल में अध्यात्म का माहौल तैयार हो रहा है।




 


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