कौन हैं रितिका चोपड़ा, जिनकी चुनाव आयोग पर खोजी रिपोर्टिंग ने मचाई देशभर में हलचल?
कौन हैं रितिका चोपड़ा?
रितिका चोपड़ा करीब 19 साल से पत्रकारिता में सक्रिय हैं। वह फिलहाल इंडियन एक्सप्रेस की मुंबई की स्थानीय संपादक (Resident Editor) हैं। इससे पहले वह दिल्ली में सरकार से जुड़ी खबरों की प्रमुख (Chief of National Bureau-Government) रह चुकी हैं। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा संपादक (National Education Editor) की जिम्मेदारी भी संभाली है। यानी उनके पत्रकारिता करियर में राजनीति, सरकार, शिक्षा और चुनाव जैसे विषय लगातार अहम रहे हैं।
रितिका ने अपने पत्रकारिता करियर की शुरुआत साल 2006 में की थी। उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स में प्रशिक्षु (Intern) के तौर पर काम शुरू किया था। इसके बाद साल 2007 में वह दिल्ली चली गईं। यहां उन्होंने राजनीति के साथ शिक्षा, सामाजिक मुद्दों और चुनाव आयोग से जुड़ी खबरों पर काम किया। धीरे-धीरे सरकारी नीतियों और बड़े संस्थानों की कार्यप्रणाली उनकी रिपोर्टिंग का अहम हिस्सा बन गई।
कहां की रहने वाली हैं रितिका?
रितिका चोपड़ा का जन्म कोलकाता में हुआ है। उन्होंने सेंट जेवियर्स कॉलेज, कोलकाता से पढ़ाई की। यहां उन्होंने जनसंचार और वीडियो निर्माण (Mass Communication and Videography) की पढ़ाई की। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पत्रकारिता की दुनिया में कदम रखा और साल 2006 में हिंदुस्तान टाइम्स से करियर शुरू किया।
एक साल बाद वह दिल्ली चली गईं और यहां उनकी रिपोर्टिंग का दायरा बढ़ता गया। उन्होंने राजनीति के साथ शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को भी कवर किया। इसी दौरान चुनाव आयोग भी उनकी रिपोर्टिंग का एक अहम हिस्सा बन गया।
किन बड़े मीडिया संस्थानों में काम किया?
इंडियन एक्सप्रेस से पहले रितिका चोपड़ा कई बड़े मीडिया संस्थानों में काम कर चुकी हैं। हिंदुस्तान टाइम्स के बाद वह द इकोनॉमिक टाइम्स से जुड़ीं, जहां उन्होंने राजनीति से जुड़ी खबरों पर काम किया। इसके बाद उन्होंने मेल टुडे में भी जिम्मेदारी संभाली।
साल 2015 में रितिका इंडियन एक्सप्रेस से जुड़ीं। यहां उन्होंने सरकार, राजनीति और शिक्षा से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर रिपोर्टिंग की। आगे चलकर उन्हें राष्ट्रीय स्तर की कई बड़ी जिम्मेदारियां भी मिलीं।
अभी क्या जिम्मेदारी संभाल रही हैं रितिका चोपड़ा?
रितिका चोपड़ा फिलहाल इंडियन एक्सप्रेस की मुंबई की स्थानीय संपादक (Resident Editor) हैं। इस जिम्मेदारी में मुंबई और आसपास की महत्वपूर्ण खबरों के साथ संपादकीय कामकाज देखना शामिल है। इससे पहले वह सरकार से जुड़ी खबरों की प्रमुख और राष्ट्रीय शिक्षा संपादक की जिम्मेदारी संभाल चुकी हैं।
उनकी रिपोर्टिंग में केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, शिक्षा व्यवस्था और सार्वजनिक नीतियों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे हैं। यही वजह है कि उनकी मौजूदा चुनाव आयोग वाली रिपोर्ट को उनके लंबे पत्रकारिता अनुभव से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
चुनाव आयोग की रिपोर्टिंग से बनी अलग पहचान
रितिका चोपड़ा लंबे समय से चुनाव आयोग को कवर करती रही हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने चुनाव आयोग से जुड़े कई मामलों पर रिपोर्टिंग की थी। उस दौरान चुनाव आचार संहिता (Model Code of Conduct) से जुड़े मामलों और आयोग के कामकाज पर उनकी रिपोर्टिंग चर्चा में रही।
चुनाव आयोग से जुड़ी उनकी रिपोर्टिंग को पत्रकारिता के कई पुरस्कार भी मिले हैं। उन्हें इंटरनेशनल प्रेस इंस्टीट्यूट का भारत पत्रकारिता पुरस्कार और रामनाथ गोयनका उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार मिल चुका है। चुनाव आयोग की अंदरूनी कार्यप्रणाली पर उनकी रिपोर्टिंग को रामनाथ गोयनका पुरस्कार से भी जोड़ा गया है।
रितिका को मिले हैं कई बड़े पुरस्कार
रितिका चोपड़ा को अपने पत्रकारिता करियर में कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं। साल 2018 में उन्हें यूएनएफपीए-लाडली मीडिया पुरस्कार (UNFPA-Laadli Media Award) मिला था। यह सम्मान हरियाणा पंचायत चुनाव से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले की रिपोर्टिंग के लिए दिया गया था।
इसी दौरान उनकी इंजीनियरिंग शिक्षा पर की गई खोजी रिपोर्टिंग भी चर्चा में रही। उनकी रिपोर्ट सीरीज Devalued Degree को एसीजे खोजी पत्रकारिता पुरस्कार (ACJ Investigative Journalism Awards) में विशेष उल्लेख मिला था।
साल 2021 में उन्हें रामनाथ गोयनका उत्कृष्ट पत्रकारिता पुरस्कार मिला। वहीं साल 2024 में उन्हें चमेली देवी जैन पुरस्कार भी दिया गया। यह पुरस्कार उन्हें स्वतंत्र पत्रकार ग्रीष्मा कुथार के साथ संयुक्त रूप से मिला था।
इंजीनियरिंग शिक्षा पर भी की बड़ी पड़ताल
रितिका की पत्रकारिता सिर्फ राजनीति और चुनाव आयोग तक सीमित नहीं रही है। उन्होंने देश में इंजीनियरिंग शिक्षा की स्थिति पर भी खोजी रिपोर्टिंग की है। उनकी रिपोर्ट सीरीज Devalued Degree में इंजीनियरिंग कॉलेजों में पढ़ाई की गुणवत्ता और छात्रों से जुड़े कई सवालों की पड़ताल की गई थी।
इस रिपोर्टिंग के जरिए उन्होंने यह दिखाने की कोशिश की कि बड़ी संख्या में इंजीनियरिंग संस्थानों के सामने किस तरह की चुनौतियां हैं। इस काम के लिए उन्हें एसीजे खोजी पत्रकारिता पुरस्कार में विशेष उल्लेख मिला था।
हरियाणा पंचायत चुनाव में भी की थीं शानदार रिपोर्टिंग
रितिका ने हरियाणा पंचायत चुनाव से जुड़े एक अहम मामले की भी रिपोर्टिंग की थी। इस मामले में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए उम्मीदवारों की शैक्षणिक योग्यता का मुद्दा सामने आया था। मामला बाद में सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा था।
इस मामले की रिपोर्टिंग के लिए भी रितिका को पत्रकारिता सम्मान मिला। इससे यह साफ होता है कि उनका काम केवल राजनीति या चुनाव आयोग तक सीमित नहीं रहा है। शिक्षा, सरकारी नीतियों और सामाजिक मुद्दों पर भी वह लंबे समय से रिपोर्टिंग करती रही हैं।
अब किस रिपोर्ट को लेकर चर्चा में हैं रितिका?
अब रितिका चोपड़ा की सबसे ज्यादा चर्चा चुनाव आयोग पर की गई उनकी हालिया खोजी रिपोर्ट को लेकर हो रही है। इस रिपोर्ट में चुनाव आयोग के अंदर अलग-अलग मुद्दों पर दर्ज आपत्तियों की जानकारी सामने रखी गई है।
रिपोर्ट के मुताबिक, दो चुनाव आयुक्तों ने करीब दस महीने के दौरान कई मामलों पर आपत्ति दर्ज की थी। इनमें मतदाता सूची, नए मतदाताओं के नाम जोड़ने, चुनावी सॉफ्टवेयर और आयोग के काम करने के तरीके से जुड़े मुद्दे शामिल थे। रिपोर्ट में चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी की ओर से दर्ज आपत्तियों का भी जिक्र किया गया है।
रितिका ने इन आपत्तियों से जुड़ी जानकारी के लिए दस्तावेजों और लिखित पत्राचार का सहारा लिया है। इसी वजह से उनकी रिपोर्ट सामने आने के बाद चुनाव आयोग के अंदरूनी कामकाज को लेकर बहस तेज हुई।
Form 6 को लेकर क्या विवाद है?
रितिका की रिपोर्ट में Form 6 का मामला भी काफी अहम है। फॉर्म 6 का इस्तेमाल नए मतदाता का नाम मतदाता सूची में जोड़ने के लिए किया जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ऑनलाइन Form 6 में कुछ बदलाव किए गए थे और इसमें पुराने मतदाता रिकॉर्ड से जुड़ी अतिरिक्त जानकारी मांगी गई थी। पढ़ें पूरी खबर...
सोशल मीडिया पर भी तेजी से बढ़े फॉलोअर्स
चुनाव आयोग रिपोर्ट सामने आने के बाद रितिका चोपड़ा का नाम सोशल मीडिया पर भी तेजी से फैला है। उनके एक्स अकाउंट (@RitikaChopra_) के फॉलोअर्स दोगुणा हो गया है। वर्तमान में एक्स पर उन्हें लगभग 1 लाख लोग फॉलो करते हैं। वह मई 2013 से इस प्लेटफॉर्म पर सक्रिय हैं और अब तक करीब 12.8 हजार पोस्ट कर चुकी हैं।
रितिका अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पत्रकारिता से जुड़े अपडेट, रिपोर्ट और विश्लेषण साझा करती हैं।
19 साल में बनाया अलग पत्रकारिता करियर
रितिका चोपड़ा ने साल 2006 में पत्रकारिता शुरू की थी। करीब 19 साल के इस सफर में उन्होंने कई बड़ी जिम्मेदारियां संभाली हैं। उन्होंने राजनीति, सरकार, शिक्षा और चुनाव से जुड़े मुद्दों पर लगातार काम किया है।
कई महत्वपूर्ण संस्थानों की कार्यप्रणाली और सरकारी नीतियों पर भी उन्होंने रिपोर्टिंग की है। अब वह इंडियन एक्सप्रेस में मुंबई की स्थानीय संपादक हैं। हालांकि, चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दे उनकी पत्रकारिता का लगातार अहम हिस्सा बने हुए हैं।
इसलिए चर्चा में है रितिका चोपड़ा का नाम
रितिका चोपड़ा की मौजूदा चर्चा किसी एक रिपोर्ट तक सीमित नहीं है। चुनाव आयोग पर उनका काम कई साल पुराना है। 2019 के चुनाव से लेकर मतदाता सूची से जुड़े हालिया मामलों तक उन्होंने इस संस्था को करीब से कवर किया है।
इस बार उनकी रिपोर्ट में चुनाव आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों, मतदाता सूची, Form 6 और डिजिटल व्यवस्था से जुड़े सवाल सामने रखे गए हैं। रिपोर्ट के बाद चुनाव आयोग की ओर से भी फैसले और स्पष्टीकरण सामने आए हैं।
यही वजह है कि रितिका चोपड़ा का नाम इस समय चुनाव आयोग से जुड़ी राष्ट्रीय चर्चा में लगातार सामने आ रहा है। उनके करीब दो दशक लंबे पत्रकारिता करियर और मौजूदा रिपोर्टिंग को साथ देखकर उनकी प्रोफाइल को समझना ज्यादा आसान हो जाता है।
एक नजर में रितिका चोपड़ा को जानें
- नाम: रितिका चोपड़ा
- पेशा: पत्रकार और संपादक
- मौजूदा जिम्मेदारी: मुंबई की स्थानीय संपादक (Resident Editor), द इंडियन एक्सप्रेस
- पत्रकारिता अनुभव: करीब 19 साल
- शिक्षा: जनसंचार और वीडियो निर्माण (Mass Communication and Videography)
- पत्रकारिता की शुरुआत: 2006, हिंदुस्तान टाइम्स
- इंडियन एक्सप्रेस से जुड़ाव: 2015
- रिपोर्टिंग के प्रमुख क्षेत्र: राजनीति, सरकार, शिक्षा और चुनाव आयोग
- प्रमुख सम्मान: रामनाथ गोयनका पुरस्कार, चमेली देवी जैन पुरस्कार, यूएनएफपीए-लाडली मीडिया पुरस्कार और इंटरनेशनल प्रेस इंस्टीट्यूट पुरस्कार।