ECI के समर्थन में उतरे 124 पूर्व IAS-IFSअफसर, बोले-हारने पर सिस्टम धांधली वाला नहीं हो सकता
किन अफसरों ने किए हस्ताक्षर
चिट्ठी पर कई पूर्व बड़े अफसरों के हस्ताक्षर हैं। पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल इनमें शामिल हैं। उनके साथ आरडी कपूर, समिंद्र चटर्जी, गोपाल कृष्णा, विवेक भारद्वाज और नवनीत सहगल जैसे पूर्व अफसरों ने भी दस्तखत किए। कुल 124 पूर्व आईएएस (IAS) आईएफएस (IFS) और एलाइड सर्विसेज (संबद्ध सेवाओं) के अफसर इस पत्र के साथ हैं। इन सभी ने देशवासियों को सीधे संबोधित किया है।
जंतर-मंतर पर क्या हुआ शनिवार को
शनिवार को कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कोशिश की। पार्टी सीईसी (CEC – Chief Election Commissioner) Gyanesh Kumar के इस्तीफे की मांग कर रही थी। दिल्ली पुलिस ने इसे नियम-विरुद्ध बताया। पुलिस दिन भर प्रदर्शन रोकने में जुटी रही। ऐसे में पूर्व वरिष्ठ अधिकारियों का खुला पत्र खास मायने रखता है।
बूथ कैप्चरिंग से यहां तक का सफर
अफसरों ने चुनावी प्रक्रिया में हुए बदलावों और सुधारों की बात की। उन्होंने बताया कि भारतीय चुनावी प्रक्रिया बूथ कैप्चरिंग (बूथ पर कब्जा) से उबरी है। बैलेट बॉक्स लूटने, उससे छेड़छाड़ और चुनावी हिंसा से भी देश निकल चुका है।
बिहार चुनाव 2025 के आंकड़े क्या बताते हैं
अफसरों ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक वहां एक भी रिपोलिंग (दोबारा मतदान) की जरूरत नहीं पड़ी। वोटर टर्नआउट (मतदान प्रतिशत) 1951 के बाद सबसे ज्यादा रहा।
जीत और हार पर एक सिस्टम का तर्क
अफसरों ने इसी तर्क को आंकड़ों से जोड़ा। उनका कहना है कि बीजेपी केंद्र में सरकार की अगुवाई कर रही है। इसी चुनाव आयोग के रहते वह कई राज्यों में विधानसभा चुनाव हारी है। 2024 के आम चुनावों में भी वह बहुमत से पिछड़ चुकी है।
चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर तर्क
चिट्ठी में चुनाव आयोग (Election Commission ) की स्वतंत्रता का भी बचाव किया गया है। अफसरों के मुताबिक एक से ज्यादा सदस्य होने की वजह से आयोग संस्थागत रूप से सुरक्षित है।
आरोप और सबूत पर अफसरों की राय
अफसरों ने सबूतों के अभाव का भी हवाला दिया। उनके मुताबिक सवाल उठाने और आरोपों की पुष्टि के लिए सबूत नहीं दिखते।
एसआईआर को क्यों बताया जरूरी
अफसरों ने एसआईआर को पुख्ता Voter list के लिए जरूरी बताया। इसके लिए उन्होंने बिहार का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक एसआईआर से 22 लाख मृत वोटरों के नाम हटाने में मदद मिली। सात लाख डुप्लीकेट (दोहरे) मतदाताओं के नाम भी बाहर किए गए। करीब 21.5 लाख नए वोटरों के नाम जोड़े भी गए। ये सारे बदलाव मतदाता सूची में हुए।
गलत मतदाता सूची पर अफसरों का जवाब
चिट्ठी का संदेश दो हिस्सों में है। पहला, चुनावी व्यवस्था में सुरक्षा के कई इंतजाम हैं। दूसरा, आरोप लगाने वाले को सबूत भी देना चाहिए।
FAQ
- 124 पूर्व अफसरों ने किसने नाम चिट्ठी लिखी हैं?
चिट्ठी 124 पूर्व आईएएस, आईएफएस और एलाइड सर्विसेज के अफसरों ने लिखी है। इस पर पूर्व विदेश सचिव कंवल सिब्बल समेत कई पूर्व अफसरों के हस्ताक्षर हैं। यह चिट्ठी देशवासियों के नाम है। - चिट्ठी में एसआईआर के बारे में क्या कहा गया है?
अफसरों ने एसआईआर को पुख्ता मतदाता सूची के लिए जरूरी बताया है। उनके मुताबिक बिहार में इससे 22 लाख मृत वोटरों के नाम हटाने में मदद मिली। सात लाख डुप्लीकेट नाम बाहर हुए और करीब 21.5 लाख नए वोटर जुड़े।