सावधान! अब बच्चों ही नहीं वयस्कों में भी दिखाई दे रहे ADHD के लक्षण
अब तक ADHD को बच्चों की समस्या माना जाता था। लेकिन हाल के सालों में कई एडल्ट भी खुद में इसके लक्षण पहचान रहे हैं। जागरूकता बढ़ने से डॉक्टर अब एडल्ट्स में भी इसकी पहचान आसानी से कर पा रहे हैं। कई लोग 40-50 की उम्र में यहजान रहे हैंकि उनकीपरेशानी सिर्फ आलस या लापरवाही नहीं,बल्कि ADHD (ADHD –Attention DeficitHyperactivity Disorder) है।सही जानकारी औरइलाज से इसस्थिति को बेहतरतरीके से संभालाजा सकता है।
कैसे सामने आया मामाला
इसे आप ऐसे समझ सकते हैं कि एक गृहिणी अपने बच्चे से बहुत परेशान थी। वह बच्चा पढ़ने में तो अच्छा था, पर किसी एक चीज में ध्यान नहीं लगा पाता था। जांच कराने पर पता चला कि उसे ADHD है। इस महिला जिसे वो अपनी भूल मना रही थी दरअसल वो ADHD है।
एडल्ट्स में भी दिख रहे ADHD के लक्षण
पहले की तुलना में आज बच्चों में ADHD के ज्यादा मामले सामने आ रहे हैं। वहीं अब 40 से 50 साल की उम्र के लोगों में भी इसके लक्षणों की पहचान हो रही है। कई लोग जिन समस्याओं को अब तक आलस्य या ध्यान की कमी मानते रहे, वे वास्तव में ADHD यानी Attention-Deficit Hyperactivity Disorder से जुड़ी हो सकती हैं।
देरी से पहचान:कई एडल्ट्स में बचपन से ही ADHD के लक्षण मौजूद होते हैं। जानकारी के अभाव में इन्हें केवल लापरवाही या आलस्य मान लिया जाता है।
रोजमर्रा के जीवन पर असर:ADHD का असर दैनिक जीवन पर भी दिखाई देता है। काम टालना, चीजें भूलना, बेचैनी महसूस करना और बिना सोचे-समझे फैसले लेना इसके लक्षण हो सकते हैं। इसके अलावा एडल्ट्स के करियर और निजी रिश्तों पर भी इसका असर पड़ सकता है।
जागरूकता और निदान:NIMHANS के विशेषज्ञों के मुताबिक, पहले की तुलना में अब लोग मानसिक स्वास्थ्य को लेकर ज्यादा जागरूक हो रहे हैं। कई बार एडल्ट चिंता या डिप्रेशन के इलाज के लिए विशेषज्ञ के पास जाते हैं और जांच के दौरान ADHD की पहचान होती है।
विशेषज्ञ से परामर्श:ADHD के लक्षण दिखाई देने पर क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट या मनोचिकित्सक से मिलकर मूल्यांकन कराना सही होता है।
व्यवहार थेरेपी (CBT):कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी की मदद से टाइम मैनेजमेंट और व्यवहार से जुड़ी समस्याओं को बेहतर तरीके से संभालना सीखा जा सकता है।
लाइफस्टाइल में बदलाव:नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद और मेडिटेशन जैसी आदतों से जीवनशैली को बेहतर बनाया जा सकता है।
एडल्ट्स में दिखाई देने वाले लक्षण
ध्यान की कमी (Inattention)
- लंबे समय तक किसी काम पर ध्यान केंद्रित न कर पाना।
- बार-बार ध्यान भटकना।
- चीजों को व्यवस्थित रखने में कठिनाई।
- काम अधूरा छोड़ देना या जरूरी बातें भूल जाना।
अत्यधिक सक्रियता (Hyperactivity)
- अक्सर बेचैनी महसूस होना।
- शांत बैठने में परेशानी।
- लगातार कुछ न कुछ करते रहने की इच्छा।
आवेगपूर्ण व्यवहार (Impulsivity)
- बिना सोचे-समझे फैसले लेना।
- खुद पर नियंत्रण रखने में कठिनाई।
- भावनात्मक प्रतिक्रियाएं तुरंत देना।
एडल्ट्स के जीवन पर प्रभाव
ADHD से पीड़ित एडल्ट्स को अक्सर पढ़ाई, नौकरी और व्यक्तिगत रिश्तों में चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। समय पर काम पूरा करना, अपॉइंटमेंट याद रखना, बड़े प्रोजेक्ट पूरे करना और रोजमर्रा के कार्य व्यवस्थित ढंग से करना उनके लिए कठिन हो सकता है।
कई लोग बेचैनी के कारण एक साथ कई काम शुरू कर देते हैं। वहीं आवेग में आकर जोखिम भरे फैसले भी ले सकते हैं।
जागरूकता बढ़ने से हो रही ज्यादा पहचान
बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (NIMHANS) की क्लिनिकल साइकोलॉजी विभाग की प्रोफेसर पॉलोमी सुधीर के मुताबिक, पिछले कुछ वर्षों में एडल्ट्स में ADHD की पहचान और जांच के मामलों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।
इसकी एक बड़ी वजह लोगों में बढ़ती जागरूकता है। इसके अलावा मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों द्वारा चिंता, डिप्रेशन या नशे की लत जैसी अन्य समस्याओं के इलाज के दौरान भी ADHD की पहचान हो रही है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ADHD काफी हद तक आनुवंशिक रोग हो सकता है। इसलिए यह कई बार परिवारों में पीढ़ी-दर-पीढ़ी भी देखने को मिलता है।
पहले समझा जाता था बच्चों की समस्या
ADHD को पहले मुख्य रूप से बच्चों से जुड़ी समस्या माना जाता था। लेकिन समय के साथ इसके बारे में समझ बढ़ी है। अब यह माना जाता है कि इसके लक्षण एडल्ट अवस्था में भी बने रह सकते हैं।
पहले जो बच्चा कक्षा में शांत नहीं बैठता था, उसे अक्सर शरारती कहा जाता था। वहीं पढ़ाई में अच्छा होने के बावजूद खोया-खोया रहने वाले बच्चे को लापरवाह समझ लिया जाता था।
हाल के कुछ अध्ययनों में दिल्ली-NCR के युवाओं में ADHD से जुड़े लक्षण पाए जाने की बात भी सामने आई है। इससे यह संकेत मिलता है कि युवाओं में भी इसकी पहचान को लेकर जागरूकता बढ़ रही है।
सही इलाज से सामान्य जीवन संभव
मनोचिकित्सकों का कहना है कि ADHD को सही इलाज, थेरेपी और व्यवहारिक कौशल की मदद से बेहतर तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है। सही मार्गदर्शन मिलने पर व्यक्ति सामान्य और सफल जीवन जी सकता है।
ADHD लाइफ कोच अंकिता जगतियानी का कहना है कि दवाओं के साथ जीवन कौशल भी जरूरी हैं। नियमित व्यायाम, टू-डू लिस्ट बनाना, जर्नल लिखना और टाइम मैनेजमेंट जैसी आदतें मददगार हो सकती हैं।
ADHD कमजोरी नहीं, बन सकता है ताकत
विशेषज्ञों का मानना है कि ADHD वाले कई लोग बेहद रचनात्मक, इमेजनेटिव और एनर्जेटिक होते हैं। वे नए विचारों के साथ काम करने में भी सक्षम होते हैं। सही मार्गदर्शन और सहयोग मिलने पर यही गुण उनकी ताकत बन सकते हैं।
एडल्ट्स में ADHD की बढ़ती पहचान यह दिखाती है कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज की सोच बदल रही है। समय पर निदान, उचित इलाज और परिवार व कार्यस्थल का सहयोग मिलने से ADHD से पीड़ित व्यक्ति भी संतुलित और सफल जीवन जी सकता है।
महिलाओं में ADHD की नहीं होती पहचान
एक रिसर्च की मानें करीब 14% वयस्क ADHD के बावजूद बिना निदान के रह सकते हैं। पुरुषों की तुलना में महिलाओं में ADHD की पहचान आसानी से नहीं पाती है। शोध बताते हैं कि पुरुषों और महिलाओं में ADHD के लक्षण अलग हो सकते हैं। महिलाओं में हाइपरएक्टिविटी की तुलना में ध्यान की कमी वाले लक्षण अधिक दिखाई देते हैं। ऐसे लक्षण कम स्पष्ट होने के कारण कई महिलाओं को समय पर जांच के लिए नहीं भेजा जाता।
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