चंद्रमा और सूर्य के बाद अब सागर की गहराई को नापने की तैयारी, मिशन 'समुद्रयान' का 2024 में होगा पहला परीक्षण

Pratibha Rana | Sept 12, 2023, 24:00 IST
चंद्रमा और सूर्य के बाद अब सागर की गहराई को नापने की तैयारी, मिशन 'समुद्रयान' का 2024 में होगा पहला परीक्षण
भारत अब नया इतिहास रचने की तैयारी में जुट गया है। पहले चंद्रयान-3 की सफलता, फिर सूर्य की कुंडली खंगालने आदित्य एल1 को भेजा और अब समुद्र की गहराई में छिपे रहस्यों को जानने की बारी है।

New Delhi. भारत अब नया इतिहास रचने की तैयारी में जुट गया है। पहले चंद्रयान-3 की सफलता, फिर सूर्य की कुंडली खंगालने आदित्य एल1 को भेजा और अब समुद्र की गहराई में छिपे रहस्यों को जानने की बारी है। इसके लिए भारत समुद्रयान मिशन की तैयारी कर रहा है। मिशन के तहत स्वदेशी पनडुब्बी ‘मत्स्य 6000’ तीन समुद्रयात्रियों को समुद्र में छह किलोमीटर की गहराई में लेकर जाएगी। इसका पहला परीक्षण अगले वर्ष यानी 2024 की शुरुआत में किया जा सकता है। केंद्रीय पृथ्वी विज्ञान मंत्री किरण रिजिजू ने सोमवार (11 सितंबर) को मानवयुक्त पनडुब्बी मत्स्य 6000 का निरीक्षण किया, जो मिशन समुद्रयान के तहत रहस्य खंगालने के लिए समुद्र की गहराई में डुबकी लगाएगी। इसके लिए राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान तैयारी में जुट गया है।



रिजिजू ने शेयर किया वीडियो



केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू ने सोशल मीडिया 'एक्स’ (पहले ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा- ‘अब समुद्रयान की बारी... पनडुब्बी मत्स्य 6000 चेन्नई में राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान में बनाया गया है। गहरे समुद्र में भारत के पहले मानव मिशन समुद्रयान के तहत समुद्र में छह किलोमीटर की गहराई में तीन समुद्रयात्रियों को भेजने की तैयारी है। ये समुद्रयात्री समुद्र के संसाधनों और जैव विविधता का अध्ययन करेंगे’।



टाइटेनियम एलॉय से बनी है ‘मत्स्य 6000’



नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ ओशन टेक्नोलॉजी (एनआईओटी) के डायरेक्टर जी.ए. रामदास ने ‘मत्स्य 6000’ सबमर्सिबल की खासियत बताई है। उन्होंने कहा- ये 12-16 घंटे तक बिना रुके लगातार चल सकती है। इसमें 96 घंटे तक ऑक्सीजन सप्लाई रहेगी। इसका व्यास 2.1 मीटर है। इसमें तीन लोगों के बैठने की क्षमता है। ये 80 एमएम के टाइटेनियम एलॉय से बनी है। ये 6 हजार मीटर की गहराई पर समुद्र तल के दबाव से 600 गुना ज्यादा यानी 600 बार (दबाव मापने की इकाई) प्रेशर झेल सकती है। इसके अलावा इसमें कई और गुण भी हैं।



मकसद : समुद्र से धातुएं निकालने की कवायद



वर्तमान में ग्‍लोबल वार्मिंग से लड़ने के लिए ई-वाहनों और उनके लिए बैटरियों की मांग में लगातार तेजी आ रही है। इसके कारण इनको बनाने में इस्‍तेमाल होने वाले संसाधन दुनियाभर में कम होते जा रहे हैं। समुद्र की गहराई में पाया जाने वाला लीथियम, तांबा और निकल बैटरी में इस्‍तेमाल होते हैं, वहीं इलेक्ट्रिक कारों के लिए जरूरी कोबाल्‍ट और स्‍टील इंडस्‍ट्री के लिए जरूरी मैगनीज भी समुद्र की गहराई में उपलब्‍ध है। ऐसे में भारत का समुद्रमिशन दुनिया के लिए भी अहम हो गया है।



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दुनिया में बढ़ रही लीथियम और कोबाल्ट की मांग



अनुमान के मुताबिक, तीन साल में दुनिया को दोगुना लीथियम और 70% ज्यादा कोबाल्ट की जरूरत होगी, वहीं अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी का अनुमान है कि 2030 तक करीब पांच गुना ज्यादा लीथियम और चार गुना ज्यादा कोबाल्ट की जरूरत होगी। इन रॉ-मटेरियल का उत्पादन मांग से काफी कम हो रहा है। इस अंतर को बैलेंस करने के लिए समुद्र की गहराई में खुदाई को विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। इसमें भारत को सफलता मिलती है तो विश्व के लिए यह बड़ी उपलब्धि होगी।



क्या है पनडुब्बी और सबमर्सिबल?



पनडुब्बी और सबमर्सिबल दोनों पानी के अंदर चलते हैं, लेकिन उनके डिजाइन, काम और उद्देश्य अलग-अलग हैं।



1- पनडुब्बी : यह एक प्रकार का जलयान है, जो सतह और पानी के नीचे दोनों पर काम कर सकता है। यह बिजली या डीजल इंजन से चलता है। पनडुब्बियां आमतौर पर आकार में बड़ी होती हैं और कई लोगों को ले जा सकती हैं। इनका उपयोग मुख्य रूप से टोही, निगरानी और सैन्य उद्देश्यों के लिए किया जाता है।



2- सबमर्सिबल : यह एक प्रकार का वॉटरक्राफ्ट है, जिसे सिर्फ पानी के नीचे संचालित करने के लिए डिजाइन किया गया है। यह आमतौर पर आकार में छोटा होता है और सीमित संख्या में लोगों को ले जा सकता है। सबमर्सिबल का उपयोग आमतौर पर रिसर्च के लिए किया जाता है। ये मिलिट्री ऑपरेशन्स के लिए नहीं बने होते। सबमर्सिबल को पानी के अंदर जाने के लिए जहाज या प्लेटफॉर्म की जरूरत होती है। ये बात सबमर्सिबल को पनडुब्बियों से अलग करती है क्योंकि पनडुब्बियां स्वतंत्र रूप से ऑपरेट कर सकती हैं।



मून मिशन : चंद्रयान-3 को कब लॉन्च किया गया?



चंद्रयान-3 को 14 जुलाई को दोपहर दो बजकर 35 मिनट पर लॉन्च किया गया। इसने 23 अगस्त को शाम छह बजकर चार मिनट पर चांद के दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग की। इसके साथ ही भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल हो गया, जिसने चांद पर सॉफ्ट लैडिंग की हो। इसी के साथ दक्षिणी ध्रुव पर सॉफ्ट लैंडिंग करने वाला भारत दुनिया का पहला देश बन गया है।



सन मिशन : आदित्य एल1 को कब लॉन्च किया गया?



आदित्य एल1 को दो अगस्त को सुबह 11 बजकर 50 मिनट पर लॉन्च किया गया। यह 15 लाख किमी दूर एल1 प्वाइंट पर जाएगा और सूर्य का अध्ययन करेगा। अभी यह यान तीसरी कक्षा में प्रवेश कर चुका है।



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