अग्निवीरों की नौकरी अब 4 नहीं, 6 साल की होगी: 75% को मिलेगा 2 साल का एक्सटेंशन, अच्छे प्रदर्शन पर परमानेंट होने का मौका
इस दौरान उनकी सैलरी और भत्ते भी बढ़ाए जाएंगे। वहीं, बेहतर प्रदर्शन करने वाले अग्निवीरों को सेना में परमानेंट नौकरी पाने का मौका मिलेगा। फिलहाल देश की तीनों सेनाओं में करीब 3.18 लाख अग्निवीर सेवा दे रहे हैं।
6 साल बाद भी मिल सकेगी परमानेंट नौकरी
नई व्यवस्था के तहत 6 साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीर नियमित सेना में भर्ती के लिए आवेदन कर सकेंगे। हालांकि, इसके लिए उन्हें तय Selection Process से गुजरना होगा।
सेना में स्थायी नौकरी देने का फैसला अग्निवीरों के प्रदर्शन, सेना की जरूरत और तय नियमों के आधार पर लिया जाएगा। यानी 6 साल की नौकरी पूरी करने के बाद सभी अग्निवीर अपने आप परमानेंट नहीं होंगे।
क्या है अग्निपथ योजना?
केंद्र सरकार ने 14 जून 2022 को अग्निपथ योजना शुरू की थी। इसके तहत 17.5 से 21 साल के युवाओं को थलसेना, नौसेना और वायुसेना में भर्ती किया जाता है। इन युवाओं को अग्निवीर कहा जाता है। योजना में अब तक नौकरी की अवधि 4 साल तय थी। इस दौरान अग्निवीरों को हर महीने वेतन मिलता है। सेवा पूरी होने पर करीब 11.71 लाख रुपये की सेवा निधि दी जाती है, लेकिन पेंशन का लाभ नहीं मिलता।
पुराने नियमों के मुताबिक, हर बैच के अधिकतम 25% अग्निवीरों को ही नियमित सेना में शामिल किया जा सकता है। बाकी 75% को सेवा से बाहर होना पड़ता है। हालांकि, उन्हें पुलिस और सुरक्षा बलों की भर्तियों में कुछ छूट मिलती है।
वायुसेना ने 712 अग्निवीरों को नियमित सेवा के लिए चुना
भारतीय वायुसेना ने पिछले महीने अपने पहले अग्निवीर वायु बैच से 712 युवाओं को नियमित सेवा में रखने का फैसला किया था। इस बैच में कुल 2,850 अग्निवीर भर्ती हुए थे। अग्निवीरों का चयन उनके काम, प्रदर्शन और सेना की जरूरत के आधार पर किया जाता है। नई व्यवस्था में भी नियमित नौकरी के लिए तय Selection Process से गुजरना होगा।
अग्निपथ योजना के क्या हैं फायदे?
इस योजना के समर्थकों का कहना है कि इससे सेना में युवाओं की संख्या बढ़ेगी। सैनिकों की औसत उम्र कम होने से सेना ज्यादा फिट और तकनीकी रूप से मजबूत बन सकेगी। युवाओं को कम उम्र में देश की सेवा करने का मौका मिलता है। साथ ही सेना में अनुशासन और काम का अनुभव भी मिलता है। सेवा पूरी होने पर मिलने वाली रकम से वे आगे की पढ़ाई या अपना कारोबार शुरू कर सकते हैं।
एक और तर्क यह है कि वेतन और पेंशन पर होने वाला खर्च कम होने से रक्षा बजट का ज्यादा पैसा आधुनिक हथियारों और नई तकनीक पर खर्च किया जा सकेगा।
अग्निपथ योजना का विरोध क्यों होता है?
इस योजना की सबसे बड़ी आलोचना नौकरी की सुरक्षा को लेकर होती रही है। विरोध करने वालों का कहना है कि 4 साल बाद 75% युवाओं को सेना छोड़नी पड़ती है। ऐसे में 22 से 25 साल की उम्र में उन्हें दोबारा नौकरी तलाशनी पड़ती है। पेंशन नहीं मिलने से भविष्य की आर्थिक चिंता भी बनी रहती है।
दूसरी चिंता Training Period को लेकर है। आलोचकों के मुताबिक, केवल 6 महीने की ट्रेनिंग युद्ध जैसी कठिन परिस्थितियों और आधुनिक हथियारों को संभालने के लिए कम हो सकती है।
इसके अलावा, कम समय की नौकरी से सैनिकों के बीच आपसी जुड़ाव, टीम भावना और मनोबल पर असर पड़ने की आशंका भी जताई जाती है।
अब क्या बदलेगा?
नई व्यवस्था से 75% अग्निवीरों को सेना में 2 साल और सेवा करने का मौका मिलेगा। इससे उन्हें ज्यादा अनुभव और अतिरिक्त वेतन का लाभ मिलेगा। हालांकि, 6 साल की सेवा पूरी करने के बाद भी नियमित नौकरी अपने आप नहीं मिलेगी। इसके लिए सेना के तय नियमों और प्रदर्शन के आधार पर चयन किया जाएगा।