वैज्ञानिकों ने AI से खोला पक्षियों की भाषा का राज, सामने आए चौंकाने वाले नतीजे

Sanjay Dhiman | Jul 27, 2026, 23:44 IST
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वैज्ञानिकों ने AI की मदद से 1.16 लाख पक्षियों की आवाजें सुनीं। पता चला कि सभी गाने सिर्फ 8 बुनियादी ध्वनियों से बनते हैं। यह अब तक की सबसे बड़ी बर्ड सॉन्ग स्टडी मानी जा रही है।

वैज्ञानिकों ने AI की मदद से पक्षियों की 1 लाख 16 हजार आवाजें सुनीं। यह स्टडी 3160 से ज्यादा प्रजातियों पर की गई। नतीजों में सामने आया कि सभी पक्षी गीत सिर्फ 8 बुनियादी ध्वनियों से बनते हैं। ये ध्वनियां त्रिल, सीटी और हार्मोनिक साउंड जैसी होती हैं। पर्यावरण के हिसाब से इनका इस्तेमाल अलग-अलग तरीके से होता है।



चिड़ियों की चहचहाहट सुनने में जितनी अलग लगती है, विज्ञान उतना ही आसान निकला है। दुनिया भर में पक्षी अलग-अलग आवाजें निकालते नजर आते हैं। लेकिन नई रिसर्च ने इस पूरी विविधता के पीछे एक सीधा पैटर्न खोज लिया है। इस खोज ने पक्षियों की आवाज को समझने का नजरिया बदल दिया है।



AI स्टडी में क्या मिला

रिसर्चर्स ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI – Artificial Intelligence) की मदद से हजारों रिकॉर्डिंग का विश्लेषण किया। इसमें 3160 से ज्यादा पक्षी प्रजातियों के 116000 से अधिक गाने शामिल थे। नतीजा साफ था। लगभग हर पक्षी गीत सिर्फ 8 बुनियादी ध्वनि घटकों से बनता है।



टीम ने पाया कि पक्षी बार-बार इन्हीं आठ तरह की आवाजों को दोहराते हैं। यह पैटर्न हर महाद्वीप में एक जैसा दिखा। अलग-अलग आवासों में रहने वाले पक्षियों में भी यही नियम लागू होता पाया गया। इससे साबित हुआ कि पक्षियों के गानों के पीछे साझा प्राकृतिक नियम काम करते हैं।



8 बुनियादी ध्वनियां कौन सी हैं

जैसे इंसान शब्द बनाने के लिए अक्षरों का इस्तेमाल करते हैं, वैसे ही पक्षी भी गाने बनाने के लिए इन आठ ध्वनियों को जोड़ते हैं। AI ने इन्हें आठ समूहों में बांटा है।



धीमी त्रिल, तेज त्रिल और बेहद तेज त्रिल इनमें शामिल हैं। इसके अलावा सपाट सीटियां, धीमी-मॉड्यूलेटेड सीटियां और तेज-मॉड्यूलेटेड सीटियां भी पाई गईं। हार्मोनिक स्टैक्स और अव्यवस्थित नोट्स आखिरी दो श्रेणियां हैं। हर पक्षी अपने गाने में इन्हीं आठ ध्वनियों का अलग-अलग संयोजन इस्तेमाल करता है।



कैसे हुआ इतना बड़ा विश्लेषण

रिसर्च टीम ने Xeno-canto जैसे सार्वजनिक डेटाबेस से रिकॉर्डिंग जुटाईं। इसके बाद AI एल्गोरिदम की मदद से पैटर्न खोजे गए। एल्गोरिदम 3000 से ज्यादा सॉन्गबर्ड प्रजातियों में दोहराए जाने वाले साउंड को पहचानने में सफल रहा।



वैज्ञानिक इसे गाने वाली चिड़ियों पर अब तक की सबसे बड़ी स्टडी मान रहे हैं। इतने बड़े पैमाने पर डेटा जोड़ना इंसानों के लिए लगभग नामुमकिन था। AI ने यह काम बेहद कम समय में पूरा कर दिया।



आवाजों में अंतर क्यों होता है

गानों के बुनियादी घटक एक जैसे होने के बावजूद हर पक्षी की आवाज अलग सुनाई देती है। इसकी वजह पर्यावरण और विकासवादी प्रक्रिया है।



प्राकृतिक आवास का असर

घने जंगलों में रहने वाले पक्षी सरल गाने पसंद करते हैं। इससे उनकी आवाज पेड़-पत्तियों के बीच से आसानी से निकल पाती है। वहीं खुले इलाकों के पक्षी धीमे और विस्तृत गाने गाना पसंद करते हैं।



शरीर और व्यवहार का असर

पक्षी के शरीर का आकार और चोंच की बनावट भी आवाज तय करते हैं। इसके अलावा मेटिंग व्यवहार और इलाका भी गाने के तरीके पर असर डालते हैं।



यह शोध पक्षियों के संचार को समझने में बड़ा कदम माना जा रहा है। साथ ही यह दिखाता है कि प्रकृति के छिपे पैटर्न खोजने में AI कितना कारगर हो सकता है। आने वाले समय में इस तकनीक से और भी दिलचस्प खोजें संभव मानी जा रही हैं।



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