मोदी विकसित भारत की पहचान, बड़ा काम कर रहे : प्रोफेसर अलेक्जेंडर डुगिन
रूसी दार्शनिक और राजनीतिक विज्ञानी प्रोफेसर अलेक्जेंडर डुगिन (Professor Alexander Dugin) ने भारतीय सभ्यता, बहुध्रुवीय दुनिया, और वैश्विक राजनीति पर अपने विचार प्रस्तुत किए। उनके अनुसार, भारत की सभ्यता का पुनर्जन्म और अखंड भारत की कल्पना वैदिक जड़ों पर आधारित है। एक इंटरव्यू में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी कई महत्तवपूर्ण बातें कहीं।
अखंड भारत का विचार बेहद विस्तृत है
नाम परिवर्तन और मानसिक दासता से मुक्ति
प्रोफेसर डुगिन ने इंडिया की जगह भारत नाम के प्रचार का समर्थन किया। उनका मानना है कि नाम केवल पहचान नहीं, बल्कि मानसिक स्थिति को भी दर्शाते हैं। उन्होंने कहा, 'इंडिया' एक औपनिवेशिक नाम है, और इससे मानसिक दासता झलकती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) नाम परिवर्तन के माध्यम से मानसिक आजादी की दिशा में काम कर रहे हैं।
जॉर्ज सोरोस को बताया आधुनिक असुर
प्रोफेसर डुगिन ने अमेरिकी व्यापारी और निवेशक जार्ज सोरोस (George Soros) को "कलियुग का असुर" बताया। उन्होंने कहा, सोरोस हर सुव्यवस्थित, सत्य और सुंदर चीज से घृणा करता है। वह भारत, मोदी, रूस और पुतिन जैसे नेतृत्व का विरोध करता है। भारत में वह दलितों को सरकार के खिलाफ उकसाकर अस्थिरता फैलाना चाहता है। उन्होंने कहा, सोरोस को विकृति और नीचाई पसंद है। वह राहुल गांधी और बाइडेन जैसे नेताओं का समर्थन करता है क्योंकि वे परंपरा और सुव्यवस्था को समाप्त करने की दिशा में बढ़ते हैं। बता दें कि कुछ समय पहले जार्ज सोरोस ने पीएम मोदी के खिलाफ काफी बयानबाजी की थी।
पुतिन और यूक्रेन संघर्ष
प्रोफेसर डुगिन ने रूस-यूक्रेन युद्ध को महाभारत के कुरुक्षेत्र से जोड़ा। उन्होंने कहा, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) अर्जुन की तरह हैं, जो अपनों पर प्रहार करने से हिचक रहे हैं। लेकिन युद्ध के अंत में पुतिन विजय प्राप्त करेंगे।
भारत-चीन विवाद का समाधान
भारत-चीन विवाद पर प्रोफेसर डुगिन ने कहा कि सीमाओं का सिद्धांत औपनिवेशिक काल की देन है। प्राचीन भारत में सीमाएं नहीं, सीमांत क्षेत्र होते थे। भारत और चीन के बीच विवाद को सुलझाने के लिए गहन आध्यात्मिक संवाद की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, इन क्षेत्रों में संस्कृतियों का मेल होता था, सहयोग और मित्रता पैदा होती थी। भारत और चीन के बीच का विवाद सुलझाने के लिए गहन आध्यात्मिक सिद्धांतों पर आधारित संवाद होना चाहिए न कि पश्चिम द्वारा थोपे गए सतही सीमा के आधार पर। इस तरह की सीमाओं का सिद्धांत भारतीय सिद्धांतों से मेल नहीं खाता।
( साभार : प्रोफेसर अलेक्सांद्र दुगिन ने यह साक्षात्कार hindi.sputniknews.inके लिए कृष्णमोहन मिश्र को दिया है )
FAQ
- जॉर्ज सोरोस को असुर क्यों कहा गया है?
प्रो. डुगिन के अनुसार, जॉर्ज सोरोस हर उस चीज़ के खिलाफ हैं, जो सत्य, सुंदर और सुव्यवस्थित है। उन्होंने सोरोस पर समाज को अस्थिर करने का आरोप लगाया। - पुतिन की तुलना अर्जुन से क्यों की गई है?
डुगिन ने यूक्रेन संघर्ष को कुरुक्षेत्र बताते हुए कहा कि पुतिन अपने लोगों के खिलाफ खड़े होने से हिचकिचा रहे हैं, जैसे अर्जुन महाभारत में। - अखंड भारत का विचार क्या है?
अखंड भारत का मतलब है वैदिक परंपराओं पर आधारित एक सभ्यता, जहां सह-अस्तित्व और सांस्कृतिक पुनर्जागरण को बढ़ावा मिले। - नाम परिवर्तन को क्यों महत्वपूर्ण बताया गया है?
डुगिन के अनुसार, नाम केवल शब्द नहीं, बल्कि मानसिक स्वरूप बदलते हैं। 'इंडिया' औपनिवेशिक दासता का प्रतीक है, जबकि 'भारत' स्वतंत्रता का। - भारत-चीन विवाद के समाधान के लिए दुगिन का क्या सुझाव है?
डुगिन ने कहा कि भारत-चीन सीमा विवाद को आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टिकोण से सुलझाने की जरूरत है, न कि पश्चिमी सीमांत सिद्धांतों पर।
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