बाबा बर्फानी हुए अंतर्ध्यान, अमरनाथ यात्रियों को कुछ दिन रुकने की सलाह

Anjali Dwivedi | Jul 06, 2026, 18:20 IST
बाबा बर्फानी
अमरनाथ यात्रा जारी रहने के बीच मई में सात फीट ऊंचा रहने वाला पवित्र हिम शिवलिंग अब पिघलकर अंतर्ध्यान हो गया है। तीन जुलाई से शुरू हुई 57 दिवसीय यह यात्रा 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन समाप्त होगी।

अमरनाथ गुफा में बनने वाला पवित्र हिम शिवलिंग अब पूरी तरह पिघल गए हैं। मंगलवार सात जुलाई को इसकी नई तस्वीर सामने आई है। मई में यह शिवलिंग करीब सात फीट ऊंचा था। अब यह हिम शिवलिंग 100% पिघल चुका है। इसके बावजूद अमरनाथ यात्रा पहले की तरह जारी है।



अमरनाथ यात्रा तीन जुलाई से शुरू हुई थी। यह कुल 57 दिन तक चलेगी। यात्रा 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन खत्म होगी। हर साल की तरह इस बार भी लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।



बाबा बर्फानी पूरी तरह पिघले


शिवलिंग का आकार कैसे बदला

23 मई को सीमा सुरक्षा बल (BSF) के जवानों ने एक तस्वीर जारी की थी। उस समय शिवलिंग करीब सात फीट ऊंचा नजर आया था। सोमवार 29 जून को पहली पूजा के दिन भी इसकी ऊंचाई पांच फीट से ज्यादा थी।



वहीं छह जुलाई को सामने आई तस्वीर में तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी थी। हिम शिवलिंग अब लगभग 90% गायब हो चुका है। इसका मौजूदा आकार सिर्फ एक फीट के करीब रह गया है।



तीन दिन में 56 हजार दर्शन

पिछले तीन दिनों में 56 हजार से ज्यादा तीर्थयात्री दर्शन कर चुके हैं। यह आंकड़ा पिछले साल के मुकाबले 18.6% ज्यादा है। साल 2025 में पहले तीन दिन में 47 हजार 972 श्रद्धालु पहुंचे थे।



इस साल अमरनाथ यात्रा के लिए करीब चार लाख श्रद्धालुओं ने रजिस्ट्रेशन कराया है। यह संख्या हर दिन दर्शन के लिए आ रहे यात्रियों से साफ झलकती है। प्रशासन इस बढ़ती भीड़ को संभालने में जुटा है।



ग्रैफिक से समझिए हिमलिंग का आकार कैसे घट रहा है.....



शिवलिंग गायब होने से यात्रा पर क्या असर पड़ेगा


रजिस्ट्रेशन स्लॉट फुल, नई सलाह

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने बड़ा बयान जारी किया है। गुरूवार नौ जुलाई तक सभी रजिस्ट्रेशन स्लॉट पूरी तरह भर चुके हैं। बिना रजिस्ट्रेशन पहुंच रहे यात्रियों को कुछ दिन यात्रा टालने की सलाह दी गई है।



प्रशासन के मुताबिक बालटाल या पहलगाम रूट पर बिना रजिस्ट्रेशन आगे बढ़ने वालों को रोका जाएगा। उन्हें चेक पॉइंट्स पर ही रोक दिया जाएगा। नौ जुलाई के बाद ही उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति मिलेगी। रविवार से सिर्फ रजिस्टर्ड यात्री ही कश्मीर की ओर जा सकेंगे।



प्राकृतिक तरीके से बनता है शिवलिंग

अमरनाथ का हिम शिवलिंग किसी बर्फ के टुकड़े को तराशकर नहीं बनाया जाता। यह पूरी तरह प्राकृतिक आइस स्टैलेग्माइट है। जैसे चूना-पत्थर की गुफाओं में मिनरल जमा होकर आकार बनता है, वैसे ही यहां बर्फ जमती है।



गुफा की छत से टपकने वाला पानी धीरे-धीरे जमकर शिवलिंग का रूप लेता है। इसका आकार हर साल मौसम, तापमान और पानी की मात्रा पर निर्भर करता है। यही वजह है कि हर साल इसकी ऊंचाई अलग-अलग होती है।



दो रास्तों से हो रहे दर्शन

अमरनाथ यात्रा दो अलग-अलग रास्तों से पूरी होती है। पारंपरिक नुनवान-पहलगाम रूट करीब 48 किलोमीटर लंबा है, लेकिन अपेक्षाकृत आसान माना जाता है। दूसरा रास्ता गांदरबल जिले के बालटाल से है, जो सिर्फ 14 किलोमीटर लंबा है।



बालटाल रूट छोटा जरूर है, लेकिन इसकी चढ़ाई काफी कठिन मानी जाती है। दोनों रास्तों से श्रद्धालु लगातार दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं। यात्रा 28 अगस्त तक जारी रहेगी।



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