अमेरिका-ईरान में डील पक्की! ट्रंप बोले- होर्मुज खुलेगा और माइंस हटेंगी
Iran Israel War Update: ईरान-इजराइल जंग के 92वें दिन बहुत बड़ी खबर आ रही है। अमेरिका और ईरान के बीच जल्द महाडील होने वाली है। खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर यह बड़ा दावा किया है। ट्रंप के मुताबिक, दोनों देश अब ऐतिहासिक समझौते के बेहद करीब पहुंच चुके हैं।
इस डील के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पूरी तरह खोल दिया जाएगा। वहां बिछी सभी खतरनाक समुद्री बारूदी सुरंगें भी तुरंत हटाई जाएंगी। ईरान को परमाणु हथियार न बनाने का सख्त वादा करना होगा। पहाड़ों के नीचे छिपा उसका एनरिच्ड यूरेनियम भी नष्ट किया जाएगा। बदले में ईरान को रीकंस्ट्रक्शन के लिए भारी-भरकम फंड मिलेगा।
हालांकि, ईरान ने बाहरी दबाव वाले किसी भी समझौते को खारिज कर दिया है। इधर अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने साफ कहा कि अब मुफ्त की सुरक्षा का जमाना खत्म हो चुका है।
अमेरिका-ईरान में डील पक्की!
अमेरिका और ईरान के बीच बहुत जल्द एक बड़ा समझौता (डील) होने जा रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने खुद यह दावा किया है। उन्होंने इस समझौते की कुछ खास शर्तें बताते हुए कहा कि दोनों देश होर्मुज स्ट्रेट को खोलने, परमाणु कार्यक्रम को रोकने और समुद्री रास्तों की सुरक्षा जैसे बड़े मुद्दों पर एक राय बनाने के बेहद करीब आ चुके हैं।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि ईरान को यह वादा करना होगा कि वह कभी भी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। इसके अलावा, होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत पूरी तरह से खोला जाएगा ताकि वहां से आने-जाने वाले जहाजों पर कोई टोल टैक्स न लगे और दोनों तरफ से जहाज बिना किसी रुकावट के आ-जा सकें।
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ईरान और अमेरिका के बीच चल रही जुबानी जंग और समुद्र में बढ़ती हलचल को आप इस आसान रिपोर्ट से समझ सकते हैं:
1. समंदर से हटेंगे बारूद के गोले: ट्रंप का दावा
ट्रंप की मानें तो होर्मुज स्ट्रेट में बिछाई गई सभी समुद्री माइंस (बारूदी सुरंगों) को हटाया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिका पहले ही कई माइंस को खत्म कर चुका है और जो बची हैं, उन्हें अब ईरान खुद हटाएगा या नष्ट करेगा।
इतना ही नहीं, ट्रंप ने कहा कि ईरान के पास जो एनरिच्ड यूरेनियम का भंडार है, उसे अमेरिका, ईरान और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) मिलकर वहाँ से बाहर निकालेंगे और नष्ट कर देंगे।
2. ईरान को रीकंस्ट्रक्शन के लिए मिलेंगे 25 लाख करोड़
इस बीच, अमेरिका और ईरान के बीच होने वाले 60 दिनों के युद्धविराम (सीजफायर) समझौते की पूरी शर्तें भी सामने आ गई हैं। इसके तहत ईरान को दोबारा से खड़ा करने (रीकंस्ट्रक्शन) के लिए 300 अरब डॉलर यानी करीब 25 लाख करोड़ रुपए का फंड देने और अमेरिकी कंपनियों द्वारा वहां निवेश करने का प्रस्ताव रखा गया है।
न्यूयॉर्क टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच इस नए ड्राफ्ट पर बातचीत चल रही है। समझौते के पहले फेज (चरण) का सबसे बड़ा मकसद लड़ाई को रोकना, होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों का आना-जाना फिर से शुरू करना और इलाके में बने तनाव को कम करना है।
3. जबरदस्ती का समझौता मंजूर नहीं- ईरान
दूसरी तरफ, ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप की उस कोशिश को साफ खारिज कर दिया है, जिसमें कई मुस्लिम देशों को अब्राहम अकॉर्ड्स (शांति समझौते) में शामिल करने की बात कही गई थी।
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फतहली ने इस पर कहा कि अगर इलाके में सच में शांति और स्थिरता चाहिए, तो कोई भी फैसला वहां की जमीनी हकीकत और वहां के देशों के फायदे को देखकर होना चाहिए। उन्होंने दो टूक कहा कि किसी बाहरी दबाव में किए गए समझौते लंबे समय तक नहीं टिकते। कई देश इस प्रस्ताव के खिलाफ हैं और उन पर ऐसा समझौता थोपना बिल्कुल भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
4. पहाड़ों के नीचे छिपा यूरेनियम होगा नष्ट: ट्रंप
ट्रंप ने एक बार फिर दोहराया कि ईरान अब परमाणु बम नहीं बना पाएगा। इसके साथ ही जहाजों के लिए होर्मुज स्ट्रेट का रास्ता हमेशा खुला रहेगा और कोई टैक्स नहीं लिया जाएगा।
ट्रंप ने सोशल मीडिया पर बताया कि अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकेबंदी (नेवल ब्लॉकेड) को हटा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरान का जो एनरिच्ड यूरेनियम पहाड़ों के नीचे बने परमाणु ठिकानों में छिपा है, उसे नष्ट कर दिया जाएगा।
बता दें कि इन ठिकानों पर 11 महीने पहले अमेरिकी B-2 बॉम्बर्स ने हमला किया था। ट्रंप के मुताबिक, इस समझौते पर बहुत जल्द आखिरी फैसला हो जाएगा। रिपोर्ट्स कहती हैं कि इस वक्त ईरान के पास 60% तक एनरिच्ड करीब 440 किलोग्राम यूरेनियम मौजूद है।
5. मुफ्त की सुरक्षा का जमाना गया- अमेरिकी रक्षा मंत्री
इधर, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने साफ शब्दों में कह दिया है कि अमीर देशों को अमेरिका की तरफ से मिलने वाली सब्सिडी (आर्थिक या सैन्य मदद) का दौर अब खत्म हो चुका है।
सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला वार्ता सुरक्षा सम्मेलन में बोलते हुए हेगसेथ ने कहा कि अगर प्रशांत क्षेत्र (पैसिफिक रीजन) में कोई एक ताकत अपना दबदबा बनाने की कोशिश करेगी, तो इससे इलाके का संतुलन बिगड़ेगा।
उन्होंने भरोसा दिया कि अमेरिका एक स्वतंत्र और खुले एशिया प्रशांत क्षेत्र को बनाए रखने के लिए पूरी तरह तैयार है, भले ही पिछले कुछ महीनों से वाशिंगटन का पूरा ध्यान ईरान के साथ चल रहे युद्ध पर रहा हो। इसके साथ ही हेगसेथ ने चेतावनी दी कि चीन समेत कोई भी देश अपनी मनमानी नहीं चला सकता और न ही हमारे देश या हमारे साथियों की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है।
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