अमेरिका इस दिन देगा 166 अरब डॉलर टैरिफ रिफंड, भारत को करोड़ों का हो सकता है फायदा

Amresh Kushwaha | Apr 30, 2026, 15:24 IST
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अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को अवैध बताया था। अब 166 अरब डॉलर का रिफंड 11 मई से शुरू होगा। इससे भारतीय निर्यातकों को 10 से 12 अरब डॉलर तक का फायदा मिलने का अनुमान है।

News In Short

  • अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को 6-3 से अवैध घोषित किया था।
  • अब 166 अरब डॉलर का रिफंड 11 मई 2025 से शुरू होने वाला है।
  • करीब 53 मिलियन आयातों पर लिया गया शुल्क वापस होगा।
  • भारतीय निर्यातकों को 10 से 12 अरब डॉलर तक मिलने का अनुमान है।
  • रिफंड सीधे नहीं मिलेगा, अमेरिकी खरीदारों से बातचीत करनी होगी।

News In Detail

अमेरिका क्यों लौटाएगा इतना पैसा?

अमेरिका अब इतिहास का सबसे बड़ा टैरिफ रिफंड करने जा रही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनियाभर के देशों से आने वाले आयात पर भारी-भरकम टैरिफ लगाया था।



20 फरवरी 2025 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से यह टैरिफ रद्द कर दिया था। कोर्ट ने माना कि ट्रंप ने IEEPA (International Emergency Economic Powers Act) यानी अंतर्राष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम, 1977 का दुरुपयोग किया है। यह कानून मूल रूप से प्रतिबंधों और संपत्ति जब्ती के लिए बना था, आयात टैरिफ के लिए नहीं। संविधान के मुताबिक यह अधिकार कांग्रेस यानी अमेरिकी संसद के पास है।



अमेरिका देगा 166 अरब डॉलर

अमेरिकी अंतर्राष्ट्रीय व्यापार न्यायालय में दायर दस्तावेजों से पता चलता है कि करीब 53 मिलियन आयातों के जरिए तीन लाख 30 हजार से ज्यादा इम्पोर्टर्स से यह रकम वसूली गई थी। अब यह पूरी रकम यानी करीब 166 अरब डॉलर वापस की जाएगी।



इस प्रक्रिया की देखरेख जज रिचर्ड ईटन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि CAPE (Consolidated Administration and Processing of Entries) नाम के नए सिस्टम के जरिए टैरिफ के दायरे में आए करीब 21 फीसदी आयातित सामानों को रिफंड के लिए मंजूरी दी जा चुकी है। 26 अप्रैल तक लगभग 17 लाख मंजूर सामानों का सेटलमेंट हो चुका था।



भारत को कितना मिल सकता है?

यह खबर भारतीय कारोबारियों के लिए राहत की है। अनुमान है कि भारतीय निर्यातकों को रिफंड के रूप में 10 से 12 अरब डॉलर तक का फायदा हो सकता है। भारतीय रुपए में यह रकम करीब 84 हजार करोड़ से एक लाख करोड़ रुपए के बीच बैठती है।



हालांकि यह पैसा सीधे भारतीय एक्सपोर्टर्स के बैंक खातों में नहीं आएगा। नियमों के अनुसार रिफंड क्लेम केवल अमेरिकी इम्पोर्टर्स ही दाखिल कर सकते हैं।



भारतीय कारोबारियों को क्या करना होगा?

भारतीय निर्यातकों को अपने अमेरिकी खरीदारों से बातचीत करनी होगी। उन्हें यह तय करना होगा कि रिबेट यानी छूट की राशि को किस अनुपात में बांटा जाएगा। जब दोनों पक्षों में सहमति बन जाएगी, तभी भारतीय निर्यातक के खाते में पैसा आ सकेगा।



यह प्रक्रिया थोड़ी लंबी जरूर है, लेकिन जिन भारतीय कंपनियों के अमेरिकी खरीदारों के साथ मजबूत संबंध हैं। इन्हें इससे सबसे ज्यादा फायदा मिलने की उम्मीद है। कपड़ा, फार्मास्युटिकल, इंजीनियरिंग और आईटी हार्डवेयर जैसे क्षेत्रों के निर्यातकों पर सबसे ज्यादा नजर होगी।



पहली किस्त कब आएगी?

पहली किस्त का भुगतान लगभग 11 मई 2025 से शुरू होने की उम्मीद है। अमेरिकी ट्रेजरी (US Treasury) यानी वित्त विभाग इस भुगतान की जिम्मेदारी संभालेगा। अभी करीब तीन फीसदी सामानों का सेटलमेंट हो चुका है और वे सक्रिय रिफंड प्रक्रिया में हैं।



पूरी प्रक्रिया में कुछ महीने लग सकते हैं क्योंकि 53 मिलियन से ज्यादा आयात प्रविष्टियों को जांचना और मंजूरी देना एक बड़ा काम है।



भारत-अमेरिका व्यापार पर क्या असर?

यह रिफंड उस वक्त आ रहा है जब भारत और अमेरिका के बीच एक बड़े व्यापार समझौते पर बातचीत चल रही है। रिफंड से भारतीय निर्यातकों का भरोसा बढ़ेगा और द्विपक्षीय व्यापार को भी गति मिल सकती है।



यह फैसला इस बात का भी संकेत है कि अमेरिकी न्यायपालिका राष्ट्रपति के आर्थिक फैसलों को भी चुनौती दे सकती है और संविधान की रक्षा करती है।



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