Apple iPhone की पोल खुली? नया आते ही पुराना फोन क्यों होने लगता है धीमा, जानें पूरा सच
जैसे ही मार्केट में कोई नया Apple iPhoneआता है, सोशल मीडिया पर ये मीम और चर्चाएं तेज हो जाती हैं कि अब पुराने आईफोन स्लो होने वाले हैं। ज्यादातर लोग इसे मजाक में टाल देते थे। वहीं अब एक पूर्व एप्पल सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने आग में घी डालने का काम किया है।
उन्होंने एक वीडियो पोस्ट करके दावा किया है कि एप्पल पुराने डिवाइस में जानबूझकर मालवेयर जैसा कुछ भेजता है, ताकि फोन धीमा हो जाए और आप नया फोन खरीदने पर मजबूर हो जाएं।
ये आरोप गंभीर हैं, खासकर इसलिए क्योंकि एप्पल पहले भी इस चक्कर में करोड़ों का जुर्माना भर चुका है। क्या वाकई कहानी इतनी सीधी है? या इसके पीछे कुछ तकनीकी पेच फंसे हैं? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
2017 का वो कांड
बात जनवरी 2017 की है। एप्पल ने iOS 10.2.1 अपडेट जारी किया था। उस समय आईफोन 6 के यूजर्स एक अजीब समस्या से जूझ रहे थे। फोन की बैटरी जैसे ही 30% पर पहुंचती थी फिर फोन अचानक बंद हो जाता था।
एप्पल ने अपडेट निकाला, दिक्कत तो ठीक हो गई, लेकिन लोगों को महसूस हुआ कि उनके फोन पहले जैसे तेज नहीं रहे। बाद में खुलासा हुआ कि एप्पल ने बिना बताए फोन की स्पीड कम यानी थ्रॉटल कर दी थी।
- नतीजा ये हुआ कि एप्पल को करीब 500 मिलियन डॉलर का हर्जाना भरना पड़ा था।
- फ्रांस और इटली जैसे देशों ने भी एप्पल पर भारी जुर्माना लगाया था।
- हैरानी की बात ये है कि जुर्माना फोन स्लो करने के लिए नहीं था। जुर्माना तो जानकारी छिपाने के लिए लगा था। कंपनी ने अपडेट के नोट्स में यह साफ-साफ नहीं लिखा था कि वे फोन की परफॉर्मेंस घटा रहे हैं।
थ्रॉटल (Throttle) क्या है?
इसे एक उदाहरण से समझते हैं। मान लीजिए आपके पास एक पुरानी बाइक है। आप उसे न्यूट्रल में डालकर पूरा एक्सीलेटर घुमा दें, तो इंजन बहुत गर्म हो जाएगा और धुआं भी दे सकता है। वहीं अगर बाइक पुरानी है तो शायद वो लोड न सह पाए और बंद हो जाए।
- आईफोन के साथ भी यही होता है। इसमें लगी लिथियम-आयन बैटरी वक्त के साथ कमजोर होने लगती है।
- लगभग तीन साल या 80% हेल्थ के बाद बैटरी उतनी ताकत नहीं दे पाती जितनी नए फोन को चाहिए होती है।
- जब आप फोन पर भारी काम करते हैं या नया अपडेट इंस्टॉल करते हैं, तो प्रोसेसर को अचानक ज्यादा बिजली चाहिए होती है।
- कमजोर बैटरी वो बिजली नहीं दे पाती, जिससे वोल्टेज गिर जाता है। फोन खुद को बचाने के लिए बंद हो जाता है।
- फोन अचानक बंद न हो, इसलिए एप्पल सॉफ्टवेयर के जरिए प्रोसेसर की रफ्तार कम कर देता है ताकि बैटरी पर दबाव न पड़े। इसी को थ्रॉटल कहते हैं।
इंजीनियर का दावा, क्या वाकई ये मालवेयर है?
पूर्व इंजीनियर का कहना है कि ये सब जानबूझकर किया जाता है। हालांकि तकनीकी एक्सपर्ट्स का एक दूसरा नजरिया भी है। वे कहते हैं कि एप्पल का मकसद फोन बेचना तो हो सकता है, लेकिन आईफोन की उम्र आज भी मार्केट में सबसे ज्यादा है।
अक्सर देखा गया है कि लोग 4-5 साल पुराने आईफोन 11 या आईफोन - 12आज भी मजे से चला रहे हैं। वहीं कई एंड्रॉयड फोन 2-3 साल में ही दम तोड़ देते हैं। एप्पल के सीईओ टिम कुक भी सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि वे हर साल फोन बदलने की सलाह नहीं देते हैं।
तो क्या कंपनी वाकई मालवेयर भेज रही है। या फिर ये पुराने हार्डवेयर और नए भारी सॉफ्टवेयर के बीच का तालमेल बिठाने की एक नाकाम कोशिश है?
पुराने आईफोन आज भी क्यों चलते हैं?
- बेहतरीन चिपसेट: एप्पल के प्रोसेसर अपनी उम्र से आगे के होते हैं।
- बैटरी बदलना है समाधान: यदि आपको आपका फोन स्लो लग रहा है, तो अक्सर सिर्फ बैटरी बदलवाने से वो फिर से नए जैसा तेज चलने लगता है।
- नया बनाम पुराना: जब हम Apple iPhone 15के सामने आईफोन 11 चलाते हैं, तो वो स्लो ही लगेगा । इसकी वजह कोई साजिश नहीं, बल्कि नई रैम और तेज चिप होती है।
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