अटल पेंशन योजना में 28 लाख अपात्र, कैग की रिपोर्ट में खुलासा, अब वसूली की तैयारी
अटल पेंशन योजना 2015 में शुरू हुई थी। टैक्सपेयर्स और दूसरी स्कीम वाले लोग इसमें पात्र नहीं हैं। कैग की रिपोर्ट में 28 लाख से ज्यादा अपात्र लाभार्थी मिले। इनमें 14 लाख टैक्सपेयर्स और 13 लाख अन्य स्कीम धारक शामिल हैं। कैग ने सरकार से जांच और निगरानी बढ़ाने की सिफारिश की है।
कैग यानी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक ने हाल ही में एक बड़ी रिपोर्ट जारी की है। इसमें अटल पेंशन योजना को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक बड़ी संख्या में अपात्र लोग इस योजना का फायदा उठा रहे हैं।
क्या है अटल पेंशन योजना
अटल पेंशन योजना केंद्र सरकार ने साल 2015 में शुरू की थी। यह योजना कमजोर वर्ग के बुजुर्गों को आर्थिक सुरक्षा देने के लिए बनाई गई थी। इसके तहत 60 साल के बाद 1 हजार से 5 हजार रुपए तक गारंटीशुदा पेंशन मिलती है। पेंशनर की मौत के बाद पति या पत्नी को यह पेंशन मिलती रहती है। दोनों की मौत होने पर नॉमिनी को पूरा जमा पैसा वापस मिल जाता है।
नियम के अनुसार कोई भी इनकम टैक्स देने वाला व्यक्ति इस योजना का हिस्सा नहीं बन सकता। इसी तरह जो लोग पहले से किसी और सामाजिक सुरक्षा स्कीम का फायदा ले रहे हैं, वे भी पात्र नहीं माने जाते।
28 लाख से ज्यादा अपात्र
कैग की रिपोर्ट में पाया गया कि 14 लाख से ज्यादा इनकम टैक्सपेयर्स इस योजना का लाभ ले रहे हैं। इसके अलावा 13 लाख से ज्यादा लोग ऐसे मिले जो पहले से दूसरी स्कीमों का फायदा उठा रहे हैं। इस तरह कुल मिलाकर 28 लाख 12 हजार अपात्र लोग पेंशन उठा रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार सितंबर 2022 तक इस योजना में कुल 4 करोड़ 6 लाख से ज्यादा लोग पंजीकृत हो चुके थे। इनमें से 14 लाख 14 हजार 947 लोग टैक्सपेयर पाए गए। वहीं 13 लाख 67 हजार 80 लोग दूसरी स्कीमों का लाभ भी ले रहे थे। करीब 4 लाख लोग तो टैक्सपेयर होने के साथ-साथ दूसरी स्कीम का फायदा भी उठा रहे थे।
शुरुआत से थी गड़बड़ी
साल 2015-16 में जब यह योजना शुरू हुई थी, तब 24 लाख 84 हजार 895 लोग इससे जुड़े थे। उस समय भी करीब 1 लाख 91 हजार लोग टैक्सपेयर थे। शुरुआत में उम्र सीमा जैसे नियम तो तय थे, लेकिन टैक्सपेयर्स को लेकर साफ गाइडलाइन नहीं थी। साल 2022 में जाकर यह नियम स्पष्ट किया गया कि कोई भी टैक्सपेयर इस योजना के लिए पात्र नहीं होगा।
क्रॉस चेकिंग नहीं हुई
कैग की रिपोर्ट में इसकी वजह भी बताई गई है। आवेदन के समय लोगों ने जो जानकारी दी, उसी पर भरोसा कर लिया गया। किसी भी आवेदक की जानकारी की क्रॉस चेकिंग नहीं कराई गई। इसी ढीली जांच प्रक्रिया के कारण बड़ी संख्या में अपात्र लोग योजना में शामिल हो गए।
सरकार ने क्या कहा
डिपार्टमेंट ऑफ फाइनेंशियल सर्विसेज ने इस पर सफाई दी है। विभाग का कहना है कि इस गड़बड़ी के लिए लाभार्थी खुद जिम्मेदार हैं। नियमों के मुताबिक आवेदकों को लिखकर देना होता है कि उनकी जानकारी पूरी तरह सही है। टैक्सपेयर बनने या किसी और बदलाव पर उन्हें तुरंत बैंक को बताना होता है। भविष्य में ऐसे अपात्र लोगों से पेंशन की रिकवरी भी हो सकती है।
कैग ने दी सिफारिशें
कैग(CAG) ने केंद्र सरकार से अपात्र लोगों को योजना से बाहर करने की सिफारिश की है। इसके साथ ही लाभार्थियों की निगरानी के लिए सेबी और आईआरडीएआई (IRDAI – Insurance Regulatory and Development Authority of India) जैसी अलग इकाई बनाने पर भी जोर दिया गया है। यह रिपोर्ट संविधान के आर्टिकल 151 के तहत राष्ट्रपति को सौंपी जाएगी।
रिपोर्ट परफॉर्मेंस ऑडिटिंग गाइडलाइंस 2014 और ऑडिट व अकाउंट्स रेगुलेशन 2020 के तहत तैयार की गई है। इसमें अप्रैल 2017 से मार्च 2024 तक के आंकड़े शामिल किए गए हैं। यह रिपोर्ट 12 अगस्त 2026 को जारी की गई थी।
देश की पेंशन योजनाएं
भारत में अलग-अलग वर्ग के लिए कई पेंशन योजनाएं चल रही हैं। सरकारी कर्मचारियों के लिए ओल्ड पेंशन स्कीम, एनपीएस (NPS – National Pension System) और एकीकृत पेंशन योजना जैसी स्कीमें हैं। प्राइवेट कर्मचारियों के लिए ईपीएस (EPS – Employees Pension Scheme) और कॉर्पोरेट एनपीएस है।
आम नागरिकों के लिए एनपीएस का ऑल सिटीजन मॉडल, बच्चों के लिए एनपीएस वात्सल्य और गरीब बुजुर्गों के लिए अटल पेंशन योजना है। पीआईबी (PIB – Press Information Bureau) के मुताबिक पिछले 10 साल में देश में पेंशन कवरेज तेजी से बढ़ा है। मार्च 2026 तक एनपीएस से 2.17 करोड़ से ज्यादा लोग जुड़ चुके हैं। वहीं अप्रैल 2026 तक ईपीएस के सदस्यों की संख्या 7.89 करोड़ पार कर गई।
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