SIT ने चंपत राय को दी क्लीन चिट, राम मंदिर विवाद में अनिल मिश्रा के साथ आया था नाम

Aman Vaishnav | Aug 18, 2026, 14:18 IST
राम मंदिर विवाद
अयोध्या राम मंदिर दान चोरी मामले में SIT ने चंपत राय और अनिल मिश्रा को क्लीन चिट दे दी है। चंपत राय ने पूछताछ के दौरान अपने ऊपर लगे सभी आरोपों से इनकार किया। चंपत राय ने बताया कि उन्होंने ही गड़बड़ी का पता चलते ही कार्रवाई शुरू करवाई थी।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व जनरल सेक्रेटरी चंपत राय को SIT से क्लीन चिट मिल गई है।
  • यह मामला दान और चढ़ावे में कथित चोरी से जुड़ा है।
  • SIT ने ट्रस्ट के पूर्व सदस्य अनिल मिश्रा को भी बरी कर दिया है।
  • दोनों ने आरोप लगने के बाद अपने पद छोड़ दिए थे।
  • अब SIT की फाइनल रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी गई है।

अयोध्या राम मंदिर में दान की चोरी की खबरें जून में सामने आई थीं। इसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया था। अब जाकर मामले में एक बड़ा मोड़ आया है।



SIT रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंपी

उत्तर प्रदेश के गृह विभाग ने सोमवार को SIT की फाइनल रिपोर्ट ट्रस्ट को सौंप दी। यह रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए भेजी गई है। ट्रस्ट अब इस रिपोर्ट के आधार पर अगला कदम तय करेगा।



राज्य सरकार ने यह SIT ट्रस्ट के अनुरोध पर बनाई थी। 13 जून को तीन सदस्यीय टीम का गठन हुआ था। यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप से पहले लिया गया था। इसी टीम ने पूरे मामले की जांच की।



FIR में किसे बनाया गया आरोपी

SIT की शुरुआती रिपोर्ट के आधार पर 25 जून को FIR दर्ज की गई थी। इसमें आठ लोगों को नामजद किया गया। साथ ही कुछ अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज हुआ। यह FIR ट्रस्ट सदस्य कृष्णमोहन की शिकायत पर दर्ज हुई थी।



नामजद आरोपियों में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और मनीष कुमार यादव शामिल हैं। इनके अलावा करुणेश पांडे, रमाशंकर मिश्रा, सुभाष श्रीवास्तव और राम शंकर यादव उर्फ टीनू का नाम भी FIR में है।



इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 13(1)(ए) भी लगाई गई है।



अधिकारियों का कहना है कि SIT की शुरुआती रिपोर्ट ही FIR और गिरफ्तारियों का आधार बनी। यानी जांच की पहली रिपोर्ट में ही काफी अहम जानकारी सामने आ गई थी।



चंपत राय ने क्या कहा

जानकारी के अनुसार पूछताछ के दौरान चंपत राय ने किसी भी गलत काम से साफ इनकार किया। उन्होंने SIT को बताया कि शिकायत उन्होंने खुद दर्ज कराई थी। इसी शिकायत के बाद संदिग्धों की गिरफ्तारी हुई थी।



राय ने यह भी कहा कि दान इकट्ठा करने में पारदर्शिता रखना उनकी जिम्मेदारी थी। उनका कहना है कि गड़बड़ी का पता चलते ही उन्होंने तुरंत कदम उठाए। इस तरह उन्होंने अपनी भूमिका को साफ बताने की कोशिश की।



SIT टीम में कौन शामिल था

उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 जून को तीन सदस्यीय SIT बनाई थी। इसकी अध्यक्षता लखनऊ के डिविजनल कमिश्नर विजय विश्वास पंत ने की। टीम में रेंज इंस्पेक्टर जनरल किरण एस और स्पेशल सेक्रेटरी नील रतन कुमार भी शामिल थे।



पैनल ने 23 जून को अपनी शुरुआती रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी थी। इसमें कई सिफारिशें की गई थीं। इसके तुरंत बाद कृष्णमोहन ने पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई। फिर 25 जून को FIR दर्ज हुई।



राम मंदिर चढ़ावा चोरी की शुरुआत कैसे हुई

बता दें कि जून की शुरुआत में राम मंदिर के दान की गिनती में गड़बड़ी की खबरें आईं। इसके बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया। मंदिर ट्रस्ट की सिफारिश पर राज्य सरकार ने SIT बनाई।



जांच में SIT को फंड के गलत इस्तेमाल के शुरुआती सबूत मिले। इसके बाद FIR दर्ज करने का फैसला लिया गया। फिलहाल इस मामले में आठ लोग आरोपी हैं।



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