राम मंदिर में वीआईपी दर्शन बंद, एक ही लाइन में खड़े होकर मिलेंगे रामलला के दर्शन
समझें क्या है पूरा मामला...
- अयोध्या के श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन व्यवस्था बदल दी गई है।
- अब वीआईपी दर्शन की सुविधा खत्म कर दी गई है।
- राम दरबार के दर्शन के लिए भी अब किसी पास की जरूरत नहीं होगी।
- श्रद्धालु सामान्य कतार से सीधे दर्शन कर सकेंगे।
- यह बदलाव चंपत राय की डिजिटल आईडी से जुड़े विवाद के बाद हुआ है।
दरअसल राम मंदिर में अब तक कुछ श्रद्धालुओं को विशेष पास मिलता था। इस पास से वे बिना लंबी कतार के दर्शन कर पाते थे। अब यह सुविधा पूरी तरह बंद कर दी गई है। हर कोई अब एक ही सामान्य कतार से दर्शन करेगा।
नई दर्शन व्यवस्था
ट्रस्ट के पास व्यवस्था प्रभारी नरेंद्र के मुताबिक, यह बदलाव दर्शन प्रक्रिया को आसान बनाएगा। उनका कहना है कि इससे व्यवस्था और पारदर्शी होगी। श्रद्धालुओं को अब अलग-अलग सुविधा नहीं मिलेगी। सभी को एक जैसी प्रक्रिया से गुजरना होगा।
पहले यह पास वीआईपी श्रेणी के लोगों को मिलता था। कई बार आम श्रद्धालुओं को इसकी वजह से इंतजार करना पड़ता था। अब यह असमानता खत्म हो जाएगी।
आईडी विवाद और जांच
बता दें कि पहले ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपत राय (ट्रस्ट महासचिव चंपत राय) की डिजिटल आईडी से विशेष पास जारी होते थे। यह आईडी दर्शन पास बनाने का मुख्य जरिया थी। इसी आईडी को लेकर अब विवाद खड़ा हुआ है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी की एसआईटी जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ है। जांच में सामने आया कि डिजिटल आईडी का दुरुपयोग हुआ था। साथ ही कई अनियमित वीआईपी पास भी जारी किए गए थे।
इसके बाद ट्रस्ट ने बड़ा फैसला लिया। 10 जुलाई 2026 को चंपत राय, अनिल मिश्रा और गोपाल राव की आईडी निष्क्रिय कर दी गई। तीनों की डिजिटल आईडी से अब कोई पास नहीं बन सकेगा।
तत्काल पास कैसे बनेगा
अब पास व्यवस्था पूरी तरह बदल दी गई है। किसी एक व्यक्ति की आईडी से पास बनाने का सिस्टम खत्म कर दिया गया है। आरती दर्शन के लिए अब अलग व्यवस्था बनाई गई है।
अगर किसी को नियमित पास नहीं मिलता, तो वे तत्काल पास ले सकते हैं। रोज सिर्फ 14 तत्काल पास ही जारी होंगे। जरूरत पड़ने पर इनकी संख्या बढ़ाई जा सकेगी।
तत्काल पास के लिए बिरला धर्मशाला के सामने एक सुविधा केंद्र बनाया गया है। यहां एक अलग काउंटर से पास दिए जाएंगे। यह व्यवस्था किसी एक अधिकारी की आईडी पर निर्भर नहीं होगी।
बदलाव का असर
इस बदलाव से आम श्रद्धालुओं को राहत मिल सकती है। अब हर किसी को एक जैसी कतार से गुजरना होगा। किसी खास वर्ग को अलग सुविधा नहीं मिलेगी।
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