सावधान! आपका ब्लड ग्रुप B है तो बढ़ सकता है डायबिटीज का खतरा

Aman Vaishnav | Jun 24, 2026, 11:15 IST
B ब्लड ग्रुप वालों को डायबिटीज का खतरा
B ब्लड ग्रुप वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज होने का खतरा अन्य लोगों से 28% ज्यादा हो सकता है। एक नई स्टडी में यह दावा किया गया है। यह रिसर्च 6 हजार 870 लोगों से जुड़े बड़े आंकड़ों और हेल्थ रिकॉर्ड्स पर आधारित है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • एक नई स्टडी में ब्लड ग्रुप और डायबिटीज के बीच कनेक्शन मिला है।
  • B ब्लड ग्रुप वालों में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा 28% ज्यादा बताया गया है।
  • यह नतीजा 51 पुरानी स्टडी के आंकड़ों की जांच के बाद आया है।
  • रिसर्च में 6 हजार 870 लोगों के डेटा को शामिल किया गया था।
  • वहीं एक्सपर्ट्स कहते हैं कि सिर्फ ब्लड ग्रुप से घबराने की जरूरत नहीं है।

डायबिटीज की बात होते ही ज्यादातर लोग खानपान और मोटापे की चर्चा करते हैं। लेकिन अब एक नई स्टडी ने एक अलग एंगल सामने रखा है। दावा किया गया है कि आपका ब्लड ग्रुप भी इस बीमारी से जुड़ा हो सकता है। यह बात सुनकर कई लोगों को हैरानी हो सकती है।



रिसर्चर्स ने पहले हुई 51 स्टडी के डेटा को इकट्ठा किया है। इसके बाद उनकी आपस में तुलना की गई। इस जांच में पता चला कि B ब्लड ग्रुप वाले लोगों में टाइप-2 डायबिटीज का खतरा बाकी ग्रुप्स से ज्यादा है। यह आंकड़ा लगभग 28% ज्यादा का निकला है।



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क्या कहती है यह स्टडी

जानकारी के अनुसार यह स्टडी 6 हजार 870 लोगों के डेटा पर आधारित है। वैज्ञानिकों ने इसे अब तक का सबसे मजबूत स्वास्थ्य संबंधी नतीजा बताया है। स्टडी में जिन भी कनेक्शनों की जांच हुई उनमें यह सबसे साफ नजर आया।



हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर B ब्लड ग्रुप वाले व्यक्ति को डायबिटीज होगी। यह सिर्फ एक संकेत है। यह बताता है कि खतरा थोड़ा बढ़ सकता है। बाकी सब चीजें पहले जैसी ही अहम बनी रहती हैं।



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क्या B ग्रुप वालों को डर जाना चाहिए

एक्सपर्ट्स साफ कहते हैं कि सिर्फ ब्लड ग्रुप के आधार पर चिंता करना सही नहीं है। डायबिटीज होने के पीछे कई और बड़े कारण भी होते हैं। ज्यादा वजन और मोटापा अब भी सबसे बड़ी वजहों में शामिल हैं। कम चलना-फिरना और बैठे रहने वाली लाइफस्टाइल भी खतरा बढ़ाती है।



खराब खानपान का असर भी इसमें बड़ी भूमिका निभाता है। वहीं अगर परिवार में पहले से किसी को डायबिटीज रही हो, तो खतरा और बढ़ जाता है। इन सभी कारणों के सामने ब्लड ग्रुप को सिर्फ एक अतिरिक्त संकेत माना जा रहा है। यह किसी की बीमारी तय नहीं करता।



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आखिर वजह क्या हो सकती है

अभी तक वैज्ञानिक यह पूरी तरह नहीं समझ पाए हैं कि B ब्लड ग्रुप वालों में यह खतरा ज्यादा क्यों दिखता है। कुछ हालिया स्टडीज में एक संभावित कारण सामने आया है। माना जा रहा है कि आंतों में मौजूद बैक्टीरिया यानी गट माइक्रोबायोम इसमें भूमिका निभा सकता है।



वहीं यह अभी शुरुआती संकेत ही है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस पूरे कनेक्शन को ठीक से समझने के लिए और रिसर्च की जरूरत है। फिलहाल इसे पूरी तरह साबित नहीं माना जा सकता है।



मध्य प्रदेश में हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी

वहीं मध्य प्रदेश की बात करें ते प्रदेश में हाई ब्लड प्रेशर की बीमारी बहुत तेजी से फैल रही है। अब इसने एक महामारी का रूप ले लिया है। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे-5 (NFHS-5) की एक रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है।



इस रिपोर्ट के मुताबिक प्रदेश की करीब 25% आबादी यानी हर चौथा इंसान इस साइलेंट किलर की गिरफ्त में आ चुका है।



इस मामले में एक और सबसे ज्यादा डरने वाली बात है। हाई बीपी से पीड़ित लोगों में से 40% लोगों को तो यह पता ही नहीं है कि उन्हें कोई ऐसी बीमारी भी है। डॉक्टरों का कहना है कि इस बीमारी के लक्षण शुरुआत में बिल्कुल पता नहीं चलते हैं।



इसकी वजह से लोग बेफिक्र रहते हैं। देर से पता चलने के कारण यह एक अकेली बीमारी शरीर में छोटी-बड़ी लगभग 15 और गंभीर बीमारियों की वजह बन सकती है।



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बच्चों- युवाओं को बूढ़ा बना रही बीमारी

विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि हाई ब्लड प्रेशर अब सिर्फ बड़ी उम्र या बुजुर्गों की बीमारी नहीं रह गई है। यह लाइफस्टाइल की खराबी की वजह से हमारे घर के युवाओं और स्कूल जाने वाले छोटे बच्चों को भी अपनी चपेट में ले रही है। बीपी की वजह से कम उम्र में ही बच्चों और युवाओं के शरीर के अंग समय से पहले बूढ़े हो रहे हैं।



नेशनल हेल्थ मिशन के एक बड़े स्क्रीनिंग प्रोग्राम के तहत जब प्रदेश के दो करोड़ लोगों की जांच की गई, तो उसमें से अब तक मध्य प्रदेश में 37 लाख 52 हजार मरीजों की पहचान हो चुकी है।



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उम्र के हिसाब से समझिए खतरा

जबलपुर बना बीपी कैपिटल

NHM के NCD प्रोग्राम की साल 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक, मध्य प्रदेश का जबलपुर जिला पूरे प्रदेश में बीपी कैपिटल बनकर उभरा है। यहां सबसे ज्यादा मरीज मिले हैं। वहीं राजधानी भोपाल इस लिस्ट में 12वें नंबर पर आता है, जहां मरीजों की संख्या 88 हजार 235 है।



मध्य प्रदेश के टॉप 10 जिले और मरीजों की संख्या



  • जबलपुर: दो लाख 23 हजार 352 मरीज
  • छिंदवाड़ा: दो लाख आठ हजार 295 मरीज
  • इंदौर: एक लाख 93 हजार 354 मरीज
  • ग्वालियर: एक लाख 33 हजार 915 मरीज
  • रीवा: एक लाख 19 हजारह 631 मरीज
  • बालाघाट: एक लाख 19 हजार 275 मरीज
  • धार: एक लाख आठ हजार179 मरीज
  • बैतुल: एक लाख चार हजार 27 मरीज
  • सतना: एक लाख तीन हजार 960 मरीज
  • होशंगाबाद: 94 हजार 314 मरीज
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देर रात तक मोबाइल चलाना मुख्य कारण

आजकल की बिगड़ी हुई आदतें और गैजेट्स का जरूरत से ज्यादा इस्तेमाल सीधे हमारे ब्लड प्रेशर पर असर डाल रहा है। डॉक्टरों ने इसके पीछे कुछ मुख्य कारण बताए हैं।



स्ट्रेस हार्मोन का खेल

जो लोग देर रात तक मोबाइल फोन और लैपटॉप का इस्तेमाल करते हैं, उनके शरीर में कोर्टिसोल नाम के स्ट्रेस हार्मोन का लेवल बहुत ज्यादा बढ़ जाता है। यही बढ़ा हुआ कोर्टिसोल आगे चलकर ब्लड प्रेशर को बढ़ा देता है।



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