केवाईसी और इनाम वाले SMS से सावधान, मिनटों में खाली हो रहा बैंक खाता
समझें क्या है पूरा मामला
- बैंक, केवाईसी या इनाम के नाम पर आने वाले SMS अब बेहद खतरनाक हो गए हैं।
- एक साल में इस तरह की साइबर ठगी 146% बढ़ी है।
- वर्ष 2025 में देशभर में साइबर ठगी की शिकायतों में 22,496 करोड़ रुपये की रकम शामिल रही।
- ठग अब कुछ ही मिनटों में बैंक खातों से रकम निकाल लेते हैं।
- मनी म्यूल खातों के जरिए यह पैसा तेजी से अलग-अलग खातों में भेज दिया जाता है।
SMS बना ठगी का सबसे तेज हथियार
आपके मोबाइल पर बैंक, केवाईसी, इनाम या निवेश के नाम से कोई मैसेज आता है तो सतर्क हो जाइए।देश में साइबर ठगी (Cyber Fraud) का सबसे तेजी से बढ़ता तरीका अब SMS बन गया है। बायोकैच की रिपोर्ट के अनुसार, एक साल में SMS से जुड़ी साइबर ठगी 146% बढ़ी है।
मोबाइल बैंकिंग (Mobile Banking) का इस्तेमाल बढ़ने के साथ ठगों ने अपने तरीके भी बदल लिए हैं। वे फर्जी मैसेज भेजकर निवेश, इनाम या केवाईसी अपडेट का झांसा देते हैं।इसके बाद वे पीड़ित से फोन पर संपर्क करते हैं और कुछ ही मिनटों में बैंक खाते से रकम निकाल लेते हैं।
ठगी की कोशिशें कम, लेकिन रकम ज्यादा
रिपोर्ट के अनुसार, फ्रॉड की कोशिशों में 12% की कमी आई है। इसके बावजूद ठगी की रकम में 35% की बढ़ोतरी दर्ज हुई है।इसका मतलब है कि साइबर ठग अब कम कोशिशों में ज्यादा रकम उड़ा रहे हैं।
मोबाइल बैंकिंग से जुड़े फ्रॉड सेशन में भी 67% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
मनी म्यूल नेटवर्क से छिपाया जाता है पैसा
साइबर गिरोह ठगी की रकम छिपाने के लिए देशभर में फैले मनी म्यूल फ्रॉड (Money Mule Fraud) खातों का इस्तेमाल करते हैं।इन खातों के जरिए पैसा तेजी से कई अलग-अलग खातों में भेज दिया जाता है। इससे जांच एजेंसियों के लिए रकम का पता लगाना मुश्किल हो जाता है।
रिपोर्ट के अनुसार, साइबर गिरोह (Cyber gang)अब दक्षिण-पूर्व एशिया के बजाय भारत के भीतर ही मनी म्यूल नेटवर्क तैयार कर रहे हैं। अपराधी आम लोगों के बैंक खातों का इस्तेमाल म्यूल खाते के रूप में करते हैं। वर्ष 2025 में 26.48 लाख मनी म्यूल मामले दर्ज हुए। सीबीआई ने देशभर की 700 से ज्यादा बैंक शाखाओं में 8.5 लाख म्यूल खातों की पहचान की।
पहले और अब में क्या बदला
पहले ठग लंबे समय तक लोगों को उलझाकर रखते थे और छोटी रकम निकालते थे।वे ज्यादातर वेब के जरिए हमला करते थे और मैनुअल तरीकों का इस्तेमाल करते थे।
अब स्थिति बदल गई है। ठग कुछ ही मिनटों में पूरा ट्रांजैक्शन कर लेते हैं।एक ही ट्रांजैक्शन में बड़ी रकम निकाल ली जाती है। मोबाइल पर होने वाले हमले बढ़े हैं और साइबर फ्रॉड पहले से ज्यादा ऑटोमेटेड हो गया है।
🔄 डिजिटल फ्रॉड: पहले और अब में क्या बदला?
| तुलना का आधार | ⏳ पहले | ⚡ अब |
| समय (Time Taken) | लंबे समय तक लोगों को बातों में उलझाए रखते थे | महज कुछ ही मिनटों में फ्रॉड पूरा कर लेते हैं |
| रकम (Amount Scammed) | छोटी-छोटी रकम उड़ाते थे | एक ही ट्रांजैक्शन में बड़ी रकम साफ कर देते हैं |
| माध्यम (Target Medium) | ज्यादातर वेब (Web/Laptops) पर हमला करते थे | अब सीधे मोबाइल (Smartphone) को निशाना बनाते हैं |
| तरीका (Method Used) | काम करने का मैनुअल तरीका अपनाते थे | फ्रॉड अब पूरी तरह से ऑटोमेटेड (Automated) हो गया है |
2025 में ठगी के आंकड़े
वर्ष 2025 में देशभर में साइबर फ्रॉड से जुड़ी शिकायतों में 22,496 करोड़ रुपये की रकम शामिल रही।यह आंकड़ा बताता है कि साइबर ठगी अब कितनी गंभीर समस्या बन चुकी है।
मोबाइल बैंकिंग (Mobile Banking), का इस्तेमाल करने वाले लोगों को विशेष रूप से सतर्क रहने की जरूरत है।
कैसे रहें सुरक्षित
- बैंक या केवाईसी अपडेट के नाम पर आए किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
- OTP, UPI पिन, CVV और बैंक खाते की जानकारी किसी के साथ साझा न करें।
- संदिग्ध मैसेज मिलने पर बैंक की आधिकारिक वेबसाइट या हेल्पलाइन से संपर्क करें।
- साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर कॉल करें और राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
बैंक और केवाईसी के नाम पर होने वाली साइबर ठगी तेजी से बढ़ रही है। ठग कम समय और कम कोशिशों में बड़ी रकम निकाल रहे हैं। ऐसे में किसी भी संदिग्ध SMS, लिंक या फोन कॉल पर भरोसा करने से पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि करना जरूरी है।
FAQ
- बैंक और केवाईसी SMS स्कैम कितना बढ़ा है?
एक साल में बैंक और केवाईसी से जुड़ा SMS स्कैम 146% बढ़ा है। ठग फर्जी मैसेज भेजकर कुछ ही मिनटों में बैंक खाते से रकम निकाल लेते हैं। - वर्ष 2025 में साइबर ठगी से कितना नुकसान हुआ?
वर्ष 2025 में देशभर में साइबर ठगी की शिकायतों में 22,496 करोड़ रुपये की रकम शामिल रही। - मनी म्यूल खाता क्या होता है?
मनी म्यूल खाता वह बैंक खाता होता है, जिसका इस्तेमाल साइबर ठगी की रकम को छिपाने या दूसरे खातों में भेजने के लिए किया जाता है। वर्ष 2025 में देशभर में 26.48 लाख ऐसे मामले दर्ज हुए।
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