पहले राम अब घनश्याम; मथुरा के बांके बिहारी मंदिर से चांदी का रथ और पलंग गायब
मथुरा के बांके बिहारी मंदिर से बेशकीमती चांदी का सामान गायब होने का दावा किया जा रहा है। ठाकुर जी का चांदी का रथ, सिंहासन और चार पलंग नहीं मिल रहे हैं। संत फलाहारी महाराज ने इसे बड़ी चोरी बताया है। उन्होंने सीएम योगी को पत्र लिखकर सीबीआई जांच की मांग की है। साधु-संतों और श्रद्धालुओं में इस दावे से नाराजगी है।
अयोध्या राम मंदिर से जुड़ा चंदा चोरी विवाद अभी थमा भी नहीं था कि मथुरा से एक और मामला सामने आ गया है। इस बार बात हो रही है वृंदावन के विश्व प्रसिद्ध ठाकुर बांके बिहारी मंदिर की। दावा किया जा रहा है कि यहां से भगवान का चांदी का रथ, सिंहासन और कई कीमती सामान गायब हो गए हैं। यह खबर सामने आते ही श्रद्धालुओं में हलचल मच गई है।
बीस साल पुराना रथ अचानक गायब
संत फलाहारी महाराज का आरोप है कि पिछले करीब बीस वर्षों से रथ यात्रा में इस्तेमाल होने वाला चांदी का भव्य रथ इस बार नहीं दिखा। इसी रथ पर सवार होकर ठाकुर जी भक्तों को दर्शन देते थे। उनका कहना है कि रथ के साथ चांदी का सिंहासन और सेवा में इस्तेमाल होने वाले चार चांदी के पलंग भी गायब हैं। यह दावा मंदिर प्रशासन के लिए मुश्किल खड़ी कर सकता है।
सीएम योगी को लिखा पत्र
मामले की गंभीरता देखते हुए संत फलाहारी ने सीएम योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने पूरे मामले की सीबीआई या एसआईटी (SIT – Special Investigation Team) से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि देश-विदेश से भक्त बड़ी श्रद्धा से सोने-चांदी के आभूषण दान करते हैं। भक्तों की मंशा रहती है कि यह सामान भगवान की सेवा में लगे। लेकिन आरोप है कि सालों से यह कीमती सामान धीरे-धीरे गायब हो रहा है।
संतों का यह भी कहना है कि अगर पिछले कुछ सालों के सीसीटीवी फुटेज की जांच की जाए, तो पूरा सच सामने आ सकता है। यह मांग मंदिर प्रशासन की जवाबदेही को लेकर बड़ा सवाल उठाती है।
टूट सकती है सदियों पुरानी परंपरा
संतों का आरोप है कि यह मामला सिर्फ रथ और सिंहासन गायब होने तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि इससे मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा भी प्रभावित हो रही है। मंदिर के सेवायत गोस्वामी और हाई पावर्ड कमेटी (HPC – High Powered Committee) के पूर्व सदस्य का कहना है कि इस बार बिहारी जी को चांदी के घोड़े पर सवार नहीं कराया गया। उनके मुताबिक यह परंपरा का सीधा उल्लंघन है और आगे भी ऐसा होता रहा तो पुरानी रीति-रिवाज खत्म हो सकते हैं।
साध्वी इंदुलेखा ने भी उठाई आवाज
साध्वी इंदुलेखा ने भी मंदिर के खजाने और दान के सामान को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। संतों को भरोसा है कि सीएम योगी आदित्यनाथ ही सनातन आस्था से जुड़े इस मामले में न्याय दिला सकते हैं। उनकी मांग है कि दोषियों को कड़ी सजा मिले, ताकि आगे कोई मंदिर की संपत्ति के साथ छेड़छाड़ न कर सके।
अयोध्या विवाद से जुड़ी कड़ी
इस मामले को अयोध्या राम मंदिर के चंदा चोरी विवाद से भी जोड़ा जा रहा है। संतों का कहना है कि एक के बाद एक बड़े मंदिरों से जुड़े ऐसे मामले सामने आना चिंता की बात है। इससे श्रद्धालुओं का भरोसा कमजोर हो सकता है। कई संतों ने मांग की है कि प्रमुख मंदिरों में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
अभी तक मंदिर प्रशासन की तरफ से इस पूरे मामले पर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यह कहना जल्दबाजी होगी कि आरोप कितने सही हैं। जांच पूरी होने के बाद ही असली तस्वीर साफ हो पाएगी।
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बांके बिहारी मंदिर कॉरिडोर