कौन हैं मनन मिश्रा जिनको हटाने के लिए अड़ गए कॉकरोच, अब बार काउंसिल में भी फूट

Manya Jain | Aug 23, 2026, 12:29 IST
bar council manan mishra resign row
बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन कुमार मिश्रा से सह अध्यक्ष रेड्डी ने इस्तीफा मांगा है। फंड, नियुक्ति और NALSAR विवाद बड़े आरोप हैं। मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा है।

बीसीआई चेयरमैन मनन मिश्रा चौदह साल से इस कुर्सी पर बैठे हैं। अब उन्हीं की परिषद के सह अध्यक्ष ने उनसे इस्तीफा मांग लिया है। सवाल यह है, आखिर एक हफ्ते के अंदर इतना कुछ कैसे बदल गया?



बार काउंसिल ऑफ इंडिया के सह अध्यक्ष वाई आर सदाशिव रेड्डी ने चेयरमैन मनन मिश्रा से इस्तीफा मांगा है। कार्यकारी समिति के उपाध्यक्ष मनोज कुमार एन ने भी यही मांग जनरल काउंसिल की बैठक में उठाई। रेड्डी ने डेढ़ सौ करोड़ रुपए के एक निजी ट्रस्ट में फंड ट्रांसफर के आरोप भी लगाए हैं। इधर सुप्रीम कोर्ट में मिश्रा के लंबे कार्यकाल को चुनौती देने वाली याचिका भी दाखिल हुई है।



यह आपसे क्यों जुड़ा है

बार काउंसिल ऑफ इंडिया देश के करीब सत्ताईस लाख वकीलों को नियंत्रित करने वाली संस्था है। अगर आप वकील हैं, वकालत की पढ़ाई कर रहे हैं या आपका कोई मामला किसी वकील के भरोसे अदालत में चल रहा है, तो यह संस्था सीधे आपसे जुड़ी है। इसकी साख पर सवाल उठने का मतलब है, पूरी कानूनी व्यवस्था पर भरोसे का सवाल।



पहले क्या था

मनन कुमार मिश्रा पहली बार 2012 में बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन चुने गए थे। 2014 में वो थोड़े समय के लिए पद से हटे, लेकिन उसी साल नवंबर में वापस आ गए। तब से लगातार इस पद पर बने हुए हैं। 2025 में उन्हें सातवीं बार निर्विरोध चुना गया। वो बिहार से भाजपा के राज्यसभा सांसद भी हैं।



क्या हुआ और क्यों

दरअसल 13 अगस्त 2026 को बार काउंसिल के चेयरमैन कार्यालय से एक निर्देश जारी हुआ। इसमें राज्य बार काउंसिलों से कहा गया कि वो NALSAR यूनिवर्सिटी, हैदराबाद के 2026 बैच के छात्रों का पंजीयन न करें। वजह थी, करीब साढ़े चार सौ छात्रों का विरोध, जिन्होंने चीफ जस्टिस सूर्यकांत को अपने कॉन्वोकेशन में बुलाए जाने का विरोध किया था। यह सर्कुलर कुछ ही घंटों में वापस ले लिया गया।



लेकिन तब तक नुकसान हो चुका था।

बॉम्बे बार एसोसिएशन ने इसे चेयरमैन पद का दुरुपयोग बताया। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने भी विरोध जताया। दिल्ली में युवा वकीलों ने बार काउंसिल के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन किया। पंद्रह अगस्त को मिश्रा ने खेद जताया, लेकिन आलोचकों ने कहा कि यह माफी बहुत देर से आई।



अब बार काउंसिल के ही सह अध्यक्ष रेड्डी ने 22 अगस्त को छह पन्नों की चिट्ठी लिखी है। इसमें उन्होंने 2020 में बने एक निजी ट्रस्ट 'पर्ल फर्स्ट' का जिक्र किया। आरोप है कि इस ट्रस्ट में बार काउंसिल के डेढ़ सौ करोड़ रुपए ट्रांसफर करने का प्रस्ताव लाया गया था। रेड्डी का यह भी दावा है कि लॉ कॉलेजों से मान्यता के बदले पच्चीस लाख से एक करोड़ रुपए तक की रकम मांगी जाती रही है। हालांकि यह आरोप अभी किसी अदालत या जांच एजेंसी से प्रमाणित नहीं हुआ है।



दरअसल, बार काउंसिल एक बड़े परिवार की तरह है। जिसका मुखिया पिछले चौदह साल से एक ही व्यक्ति है। परिवार के कुछ सदस्य अब पूछ रहे हैं, हिसाब- किताब कौन देख रहा है? फैसले किसकी मर्जी से हो रहे हैं?



इधर मनन मिश्रा ने सारे आरोपों को बेबुनियाद बताया है। उनका कहना है कि रेड्डी अब काउंसिल के सदस्य भी नहीं हैं, और निजी राजनीति के चलते आरोप लगा रहे हैं। मिश्रा ने यह भी कहा कि एडवोकेट्स एक्ट में चेयरमैन के कार्यकाल की कोई सीमा तय नहीं है। इसलिए वो चुनाव जीतकर पद पर बने रह सकते हैं।



इस विवाद में कौन-कौन शामिल है

इस विवाद में कई किरदार हैं। चेयरमैन मनन मिश्रा खुद, जो चौदह साल से पद पर हैं। सह अध्यक्ष रेड्डी और कार्यकारी समिति के उपाध्यक्ष मनोज कुमार, जो इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। NALSAR के छात्र, जिनका भविष्य कुछ घंटों के लिए दांव पर लगा था। और सुप्रीम कोर्ट, जहां मिश्रा के कार्यकाल को चुनौती देने वाली याचिका पहुंच चुकी है।



दोनों पक्षों की बात

एक तरफ रेड्डी और मनोज कुमार का कहना है कि इतने लंबे समय तक एक व्यक्ति के हाथ में सत्ता रहना, किसी भी लोकतांत्रिक संस्था के लिए ठीक नहीं। दूसरी तरफ मिश्रा और उनके समर्थक वकील कहते हैं कि वो हर बार निर्विरोध चुने गए हैं, इसलिए उनका पद संवैधानिक और वैध है। दोनों दावे अपनी जगह हैं, फैसला अब काउंसिल की आगामी बैठक और अदालत पर निर्भर करेगा।



मध्य प्रदेश कनेक्शन

मध्य प्रदेश का भी इस पूरे ढांचे से सीधा नाता है। मध्य प्रदेश बार काउंसिल, जिसका मुख्यालय जबलपुर में है, बार काउंसिल ऑफ इंडिया की ही एक इकाई है। तेरह अगस्त वाला सर्कुलर तकनीकी रूप से देश के सभी राज्य बार काउंसिलों पर लागू होता, मध्य प्रदेश भी इसमें शामिल था। हालांकि मध्य प्रदेश बार काउंसिल की ओर से इस पूरे विवाद पर अब तक कोई अलग सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया है।



आगे क्या होगा

आने वाले दिनों में सबकी नजर तीन चीजों पर रहेगी। क्या मिश्रा पंद्रह दिन की तय समयसीमा में जवाब देंगे? क्या बार काउंसिल की विशेष बैठक बुलाई जाएगी? और सुप्रीम कोर्ट में लंबित याचिका पर क्या रुख अपनाया जाएगा? फिलहाल तीनों सवालों के जवाब भविष्य के गर्भ में हैं।



एक बात जो आप नहीं जानते थे

ज्यादातर लोगों को नहीं पता कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन का चुनाव हर दो साल में होता है। मिश्रा हर बार निर्विरोध चुने गए, यानी उनके खिलाफ कभी किसी ने पर्चा ही नहीं भरा। यही वजह है कि वो लगातार चौदह साल से इस पद पर टिके हुए हैं।



यह खबर क्यों जरूरी है

संविधान वकीलों की स्वतंत्र और जवाबदेह प्रतिनिधि संस्था की कल्पना करता है। जब किसी संस्था का प्रमुख चौदह साल तक एक ही पद पर रहे और भीतर से ही सवाल उठें, तो यह लोकतांत्रिक संस्थाओं की जवाबदेही से जुड़ा गंभीर मसला बन जाता है। फंड के इस्तेमाल में पारदर्शिता, नियुक्तियों में निष्पक्षता, और छात्रों के भविष्य से जुड़े फैसलों में उचित प्रक्रिया, ये सब कानून के राज की बुनियादी शर्तें हैं।




FAQ

  1. बार काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन मनन मिश्रा से इस्तीफा क्यों मांगा जा रहा है?
    सह अध्यक्ष रेड्डी ने फंड में गड़बड़ी, परिवारवाद और NALSAR छात्रों के खिलाफ गलत सर्कुलर जैसे आरोप लगाए हैं। उन्होंने पंद्रह दिन के भीतर इस्तीफे की मांग की है। मिश्रा ने सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
  2. NALSAR विवाद क्या था?
    तेरह अगस्त को बार काउंसिल ने राज्य बार काउंसिलों से NALSAR के 2026 बैच का पंजीयन रोकने को कहा था। यह सर्कुलर चीफ जस्टिस को कॉन्वोकेशन में बुलाए जाने के विरोध से जुड़ा था। कुछ ही घंटों में सर्कुलर वापस ले लिया गया।
  3. क्या मनन मिश्रा का कार्यकाल कानूनी रूप से चुनौती में है?
    हां, सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल हुई है जो उनके लंबे कार्यकाल को चुनौती देती है। याचिका में एडवोकेट्स एक्ट के नियम 12(2) का हवाला दिया गया है। यह मामला अभी अदालत में विचाराधीन है।

ये भी पढ़ें...



सुप्रीम कोर्ट से NALSAR छात्रों को बड़ी राहत: वकालत पंजीकरण पर लगी रोक रद्द



नालसार यूनिवर्सिटी विवाद: BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने छात्रों से मांगी माफी



CJP, छात्र आंदोलन को बताया राष्ट्र विरोधी, BCI चेयरमैन मनन मिश्रा के बयान पर वकीलों में बढ़ा विरोध



कौन हैं मनन मिश्रा जिनको हटाने के लिए अड़ गए कॉकरोच, अब बार काउंसिल में भी फूट



Tags:
  • सुप्रीम कोर्ट
  • मध्य प्रदेश
  • संविधान
  • बार काउंसिल ऑफ इंडिया
  • बीसीआई चेयरमैन मनन मिश्रा