बंगाल मतगणना पर सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल सुनवाई : TMC की अर्जी पर शनिवार सुबह बैठेगी विशेष बेंच
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में मतगणना की प्रक्रिया को लेकर एक बड़ा विवाद सामने आया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। इस याचिका में उन्होंने राज्य में चुनाव की मतगणना के दौरान केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सुपरवाइजर के रूप में तैनात करने के फैसले को चुनौती दी है। यह फैसला चुनाव आयोग द्वारा लिया गया था और TMC का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण है।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका
TMC ने पहले कलकत्ता हाईकोर्ट में यह याचिका दायर की थी, लेकिन कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया। कोर्ट ने कहा कि यह मामला चुनाव आयोग के अधिकार क्षेत्र में आता है और इसमें कोई अवैधता नहीं है। हाईकोर्ट ने इस आदेश के बाद, TMC को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाने का अधिकार दिया।
सुप्रीम कोर्ट में विशेष बेंच का गठन
चुनाव की प्रक्रिया की गंभीरता को देखते हुए, सुप्रीम कोर्ट ने 2 मई को एक विशेष बेंच गठित करने का फैसला लिया। इस बेंच में न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा और न्यायमूर्ति जोयमल्या बागची शामिल होंगे। TMC ने यह तर्क दिया है कि यदि मामले में कोई देरी हुई, तो 4 मई को शुरू होने वाली मतगणना पर असर पड़ेगा। पार्टी का कहना है कि केवल केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सुपरवाइजर के रूप में तैनात करना निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया में खलल डाल सकता है।
चुनाव आयोग की सुरक्षा व्यवस्था
चुनाव आयोग का कहना है कि यह कदम सुरक्षा और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। आयोग का तर्क है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सुपरवाइजर के रूप में नियुक्त करने से मतगणना की प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहती है। TMC ने आरोप लगाया है कि इससे राज्य कर्मचारियों के अधिकारों का उल्लंघन हो रहा है।
पुनर्मतदान की भी खबर
इस बीच, भारत निर्वाचन आयोग ने घोषणा की है कि पश्चिम बंगाल के 15 मतदान केंद्रों पर पुनर्मतदान होगा। यह पुनर्मतदान 2 मई को दक्षिण 24 परगना और डायमंड हार्बर विधानसभा क्षेत्रों के कुछ बूथों पर होगा। पुनर्मतदान का यह आदेश चुनाव आयोग ने राज्य चुनाव तंत्र से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर दिया है। मतदान सुबह 7 बजे से शाम 6 बजे तक चलेगा।
टीएमसी ने कहा: पक्षपातपूर्ण निर्णय
टीएमसी का कहना है कि चुनाव में निष्पक्षता बनाए रखने के लिए राज्य कर्मचारियों को भी सुपरवाइजर के रूप में शामिल किया जाना चाहिए। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार के कर्मचारियों को ही तैनात करना एक पक्षपातपूर्ण कदम है। पार्टी के नेताओं ने कहा है कि इससे चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठ सकते हैं और जनता के विश्वास को ठेस पहुंच सकती है।
चुनाव आयोग बोला: निष्पक्षता जरूरी
चुनाव आयोग ने इस फैसले को सुरक्षा और निष्पक्षता के लिए आवश्यक बताया है। आयोग का कहना है कि यदि राज्य कर्मचारियों को तैनात किया जाता, तो इससे चुनाव की पारदर्शिता पर असर पड़ सकता था।
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