भोजशाला मामले में सुप्रीम कोर्ट का दखल से इनकार, मुस्लिम पक्ष को झटका, हाईकोर्ट में 2 अप्रैल को सुनवाई
News in Short
- सुप्रीम कोर्ट ने मुस्लिम पक्ष को हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया।
- 2 अप्रैल को मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में मामले की सुनवाई होगी।
- मुस्लिम पक्ष ने एएसआई सर्वे और वीडियोग्राफी पर आपत्ति जताई।
- सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट आपत्तियों पर निष्पक्ष निर्णय करेगा।
- भोजशाला विवाद में धार्मिक और ऐतिहासिक विवाद जारी है, जो राजनीतिक मुद्दा बन चुका है।
News in Detail
मध्यप्रदेश के धार स्थित भोजशाला विवाद एक बार फिर सुर्खियों में है। इस बार मुस्लिम पक्ष को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने मुस्लिम याचिकाकर्ताओं को फिलहाल हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया। इस फैसले के बाद, मुस्लिम पक्ष अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में अपनी आपत्तियां दर्ज कर सकेगा। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप से इनकार करते हुए कहा कि हाईकोर्ट इस विवाद के सभी पहलुओं पर विचार करेगा और उसी आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
इस मामले को लेकर क्या बोले अधिवक्ता
वहीं इस मामले में वकील विष्णु शंकर जैन ने कहा कि भोजशाला मामले में मौला कमालुद्दीन ने सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटीशन (SLP) दायर की। याचिका में 11 मार्च, 2024 के कोर्ट आदेश के पालन में की गई वीडियोग्राफी की कॉपी मांगी गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वीडियोग्राफी से जुड़ी आपत्तियों पर हाई कोर्ट विचार करेगा। इस मामले की सुनवाई 2 अप्रैल को हाई कोर्ट की इंदौर बेंच में शुरू होगी।
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2 अप्रैल को होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट के इस रुख के बाद अब गेंद पूरी तरह से मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के पाले में है। कोर्ट ने भरोसा जताया है कि हाईकोर्ट वीडियोग्राफी देखने के बाद सभी आपत्तियों पर निष्पक्षता से विचार करेगा और साक्ष्यों के आधार पर ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। इस निर्देश के बाद अब 2 अप्रैल को होने वाली हाईकोर्ट की सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।
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क्या है पूरा मामला ?
मुस्लिम पक्ष ने एएसआई (आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) की सर्वे रिपोर्ट और वीडियोग्राफी पर अपनी आपत्तियां जताई थीं। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें सर्वे के दौरान अपनी आपत्तियां दर्ज करने का पर्याप्त अवसर नहीं मिला था। उनका कहना था कि वीडियोग्राफी के दौरान केवल दो लोग उपस्थित हो सकते थे। ये दो लोग हर स्थान पर मौजूद नहीं रह सकते थे।
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सुप्रीम कोर्ट का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने सभी आपत्तियों का निस्तारण सुनिश्चित किया है। याचिकाकर्ता वीडियोग्राफी की प्रति प्राप्त कर सकते हैं। वे अपनी आपत्तियां दर्ज कर सकते हैं। कोर्ट ने हाईकोर्ट को निर्देश दिया कि सभी आपत्तियों पर विचार किया जाए।
इस फैसले का प्रभाव यह होगा कि मुस्लिम पक्ष को अब अपनी आपत्तियां दर्ज करने का मौका मिलेगा। लेकिन इस प्रक्रिया को अब हाईकोर्ट द्वारा ही संचालित किया जाएगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभी हस्तक्षेप की आवश्यकता नहीं है। हाईकोर्ट ने पहले ही इस पर निर्णय लेने की जिम्मेदारी ली है।
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मुस्लिम पक्ष की मांग
मुस्लिम पक्ष की ओर से सलमान खुर्शीद ने कहा कि वीडियोग्राफी के दौरान उनकी आपत्तियां अनदेखी की गईं। उन्हें पूरी जानकारी नहीं दी गई। उनका कहना था कि दस्तावेजों का अध्ययन करने का पर्याप्त समय नहीं मिला। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह मामला हाईकोर्ट में सुलझाया जाएगा।
धार भोजशाला विवाद
यह विवाद भोजशाला स्थल की धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व के कारण लगातार चर्चा में रहा है। भोजशाला को एक प्रमुख ऐतिहासिक स्थल माना जाता है, जहां मुस्लिम समुदाय द्वारा जुमे की नमाज पढ़ने की परंपरा है। लेकिन हिंदू समुदाय इसे शिव मंदिर मानता है। इस विवाद ने धार्मिक भावनाओं को प्रभावित किया है और यह राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है।