Mid-Day Meal में बड़ी लापरवाही, नमक समझ बच्चों को बांट दिया डिटर्जेंट, 35 बीमार

Sanjay Dhiman | Aug 19, 2026, 20:00 IST
bihar-mid-day-meal-detergent-children-nalanda
बिहार के नालंदा जिले के परासी मिडिल स्कूल में मिड-डे मील के दौरान बड़ी लापरवाही सामने आई। अतिरिक्त नमक मांगने पर रसोइये ने गलती से बच्चों को डिटर्जेंट पाउडर परोस दिया, जिससे 34 बच्चे बीमार हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा।

बिहार के नालंदा जिले से स्कूल भोजन को लेकर चौंकाने वाली खबर सामने आई। नूरसराय प्रखंड के परासी मिडिल स्कूल में मंगलवार को बच्चे बीमार पड़े।



बताया गया कि खाना खाने के बाद 34 बच्चों ने परेशानी बताई। इन बच्चों में 17 छात्र और 17 छात्राएं शामिल बताए गए हैं। बच्चों ने खाना खाने के बाद गले और पेट में दर्द बताया। इसके बाद स्कूल प्रबंधन ने तुरंत बच्चों को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की। सभी प्रभावित बच्चों को इलाज के लिए बिहारशरीफ सदर अस्पताल ले जाया गया।



जिला प्रशासन के अनुसार डॉक्टरों ने बच्चों की जांच करके इलाज किया। अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल सभी बच्चे स्वस्थ और खतरे से बाहर हैं। हालांकि घटना ने सरकारी स्कूलों की भोजन व्यवस्था पर सवाल जरूर उठाए।



आखिर नमक की जगह बच्चों को डिटर्जेंट कैसे मिला?

स्कूल के प्रधानाध्यापक शैलेंद्र कुमार सिंह ने घटना की जानकारी दी। उनके अनुसार स्कूल में खाना अलग-अलग चरणों में बच्चों को परोसा जाता है। दूसरे चरण में एक छात्रा ने खाने के साथ अतिरिक्त नमक मांगा। बताया गया कि छात्रा स्कूल की रसोइया की पोती थी।



आरोप है कि रसोइया ने नमक समझकर डिटर्जेंट पाउडर उठा लिया। इसके बाद कथित तौर पर पाउडर छात्रा के खाने में मिला दिया। दूसरे बच्चों ने यह देखकर अपने लिए भी अतिरिक्त नमक मांगा। आरोप के मुताबिक कुछ बच्चों को वही पाउडर दे दिया गया। इसके थोड़ी देर बाद बच्चों ने शारीरिक परेशानी की शिकायत शुरू की। तभी स्कूल प्रबंधन को कथित गलती की जानकारी हुई।



34 बच्चों के अस्पताल पहुंचने से मचा हड़कंप

घटना सामने आने के बाद स्कूल में अफरा-तफरी जैसी स्थिति बन गई। स्कूल प्रबंधन ने प्रभावित बच्चों को तत्काल प्राथमिक मदद उपलब्ध कराई। इसके बाद बच्चों को उपचार के लिए अस्पताल ले जाया गया।



शुरुआत में बच्चों को भागन बिगहा स्थित अस्पताल ले जाने की जानकारी है। वहां से कुछ बच्चों को बिहारशरीफ सदर अस्पताल भेजा गया। बाद में सदर अस्पताल में बच्चों की चिकित्सकीय जांच की गई।



जिला प्रशासन के अनुसार डॉक्टरों ने सभी बच्चों की हालत स्थिर बताई। फिलहाल किसी गंभीर स्वास्थ्य खतरे की पुष्टि प्रशासन ने नहीं की है। हालांकि भोजन में डिटर्जेंट पहुंचने की वजह जांच का विषय बनी हुई है।



खाना कहां से आया था, व्यवस्था भी जानना जरूरी है

बताया गया कि स्कूल में भोजन केंद्रीय रसोई व्यवस्था से पहुंचता है। रिपोर्ट के अनुसार भोजन एकता शक्ति फाउंडेशन की रसोई से आया। यह केंद्रीय रसोई नगरनौसा प्रखंड के रामघाट क्षेत्र में बताई गई है। अधिकारियों के मुताबिक भोजन कई स्कूलों में रोजाना भेजा जाता है। बताई गई व्यवस्था के अनुसार 206 स्कूलों तक भोजन पहुंचाया जाता है। इन स्कूलों में करीब 23 हजार बच्चों के भोजन का दावा है।



घटना के दिन स्कूल में 132 बच्चों को खाना परोसा गया। अधिकारियों के अनुसार भोजन परोसने से पहले कुछ लोगों ने खाना चखा। इसके बावजूद बच्चों तक कथित डिटर्जेंट पहुंचना गंभीर सवाल खड़े करता है। अब भोजन के नमूनों की जांच कराए जाने की बात सामने आई।



टेस्ट करके दिया जाना था भोजन

सरकारी स्कूलों के भोजन की व्यवस्था अब PM POSHAN कहलाती है। इस योजना का उद्देश्य बच्चों के पोषण और स्कूल उपस्थिति को मजबूत करना है। केंद्र सरकार की आधिकारिक जानकारी में योजना के उद्देश्य स्पष्ट बताए गए हैं।



सरकार के मुताबिक योजना बच्चों की पोषण स्थिति सुधारने पर केंद्रित है। PM POSHAN की गाइडलाइन भोजन परोसने से पहले tasting अनिवार्य बताती है। इसके लिए शिक्षक को भोजन चखकर उसका रिकॉर्ड रखना होता है। SMC सदस्य को भी rotation के आधार पर भोजन चखना चाहिए।



गाइडलाइन भोजन की गुणवत्ता जांचने के लिए laboratory testing भी बताती है। यही व्यवस्था ऐसी घटनाओं में निगरानी की अहम भूमिका दिखाती है। इसलिए नालंदा की घटना में जिम्मेदारी तय करना बेहद जरूरी होगा। सिर्फ गलती बताकर मामला खत्म करना पर्याप्त जवाब नहीं माना जाएगा।



अब जांच और जवाबदेही पर सबकी नजर रहेगी

इस घटना के बाद प्रशासनिक जांच सबसे महत्वपूर्ण कदम बन जाती है। सबसे पहले भोजन का sample लेकर उसकी जांच जरूरी होगी। इसके साथ रसोई की पूरी प्रक्रिया भी जांच के दायरे में आएगी। नमक और सफाई सामग्री रखने की व्यवस्था भी देखी जानी चाहिए। भोजन पैकिंग और स्कूल तक पहुंचने की प्रक्रिया भी जांचनी होगी।



स्कूल स्तर पर tasting register की स्थिति भी जांची जानी चाहिए। किसने भोजन चखा और कब चखा, इसका रिकॉर्ड सामने आना चाहिए। केंद्रीय रसोई में खाद्य सुरक्षा नियमों के पालन की जांच जरूरी है। प्रशासन को जांच पूरी होने के बाद तथ्य सार्वजनिक करने चाहिए। इससे बच्चों के अभिभावकों का भरोसा दोबारा मजबूत किया जा सकेगा। नालंदा जिला प्रशासन की वेबसाइट पर शिक्षा विभाग संबंधी जानकारी उपलब्ध है।



बच्चों की सुरक्षा और सिस्टम की निगरानी पर सवाल

मिड-डे मील(mid day meal) गरीब और जरूरतमंद बच्चों के लिए महत्वपूर्ण योजना है। इस भोजन से बच्चों की पढ़ाई और पोषण दोनों जुड़े हैं। सरकारी योजना का उद्देश्य भूख और शिक्षा की समस्या घटाना है। ऐसे में भोजन की छोटी गलती भी बड़ी चिंता बन जाती है। यह मामला केवल एक रसोइये की कथित गलती तक सीमित नहीं रहना चाहिए। पूरी निगरानी व्यवस्था की जिम्मेदारी भी तय होनी जरूरी है।



अभिभावक चाहते हैं कि स्कूल में बच्चों को सुरक्षित भोजन मिले। सरकार और प्रशासन की जिम्मेदारी उस भरोसे को बनाए रखना है। नालंदा की घटना इसलिए व्यवस्था के लिए एक गंभीर चेतावनी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम जिम्मेदारी तय हो सकेगी। फिलहाल प्रशासन के मुताबिक सभी प्रभावित बच्चे खतरे से बाहर हैं।



यह खबरें भी पढ़ें...



मंदिरों की लूट बंद हो, BJP विधायक चिंतामणि मालवीय ने उठाई सनातन बोर्ड की मांग



जबलपुर मेडिकल कॉलेज में 1.63 करोड़ का पर्ची घोटाला, तीन गिरफ्तार, दो फरार



एमपी में सरकारी कोचिंग का सच : स्कीम और बजट है, लेकिन 3 साल से क्लासेस नहीं



सरकार समय पर पेमेंट नहीं करती, इसलिए महंगा पड़ा गुड़ खरीदना



Tags:
  • mid day meal
  • बिहार
  • सरकारी योजना
  • मिड-डे मील
  • नालंदा
  • डिटर्जेंट पाउडर