कौन हैं शगुन परिहार? आतंकी हमले में पिता को खोया, 29 साल की उम्र में बनीं विधायक, अब BJP ने दी बड़ी जिम्मेदारी
भाजयुमो की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष शगुन परिहार
शगुन परिहार जम्मू-कश्मीर में बीजेपी का एक बड़ा युवा चेहरा बन चुकी हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उन्हें यह जिम्मेदारी देकर चिनाब घाटी के युवा नेतृत्व को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है।
नई जिम्मेदारी मिलने पर शगुन परिहार ने पार्टी के नेतृत्व का आभार जताया। उन्होंने कहा कि वह अपनी जिम्मेदारी पूरी ईमानदारी और लगन से निभाएंगी। शगुन ने कहा, मैं हमारे प्रदेश अध्यक्ष सतपाल शर्मा को धन्यवाद देती हूं।
साथ ही केंद्रीय नेतृत्व, गृह मंत्री अमित शाह और पूरे देश की जनता का भी दिल से शुक्रिया अदा करती हूं। पार्टी ने मुझ पर जो भरोसा जताया है, उस पर खरा उतरने के लिए मैं अपनी तरफ से पूरी मेहनत करूंगी।
सबसे कम उम्र की विधायक
शगुन परिहार (Shagun Parihar) ने साल 2024 में पहली बार विधानसभा का चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उतरते ही उन्होंने इतिहास रच दिया। 29 साल की उम्र में चुनाव जीतकर वह जम्मू-कश्मीर विधानसभा की सबसे युवा विधायक बन गईं।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के सीनियर नेता से मुकाबला
शगुन परिहार की किश्तवाड़ सीट पर जीत बहुत चर्चा में रही थी क्योंकि इस सीट पर उनका मुकाबला नेशनल कॉन्फ्रेंस के सीनियर नेता और पूर्व मंत्री सज्जाद अहमद किचलू से था।
शगुन ने सज्जाद अहमद किचलू को 521 वोटों के बेहद करीबी अंतर से मात दी। इस चुनाव में...
- शगुन परिहार को कुल 29 हजार 53 वोट मिले थे।
- वहीं उनके सामने खड़े सज्जाद अहमद किचलू को 28 हजार 532 वोट हासिल हुए थे।
घर में झेला आतंकी हमला, पर नहीं रुकी पढ़ाई
शगुन परिहार की जिंदगी संघर्षों भरी रही है। साल 2018 में पंचायत चुनाव होने वाले थे। उन चुनावों से ठीक कुछ दिन पहले आतंकवादियों ने उनके पिता अजीत परिहार (जो बीजेपी के पदाधिकारी थे) और उनके चाचा अनिल की हत्या कर दी थी।
परिवार पर इतना बड़ा पहाड़ टूटने के बाद भी शगुन ने अपनी हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने पढ़ाई जारी रखी।
- उनके पास इलेक्ट्रिकल पावर सिस्टम्स में एमटेक (MTech) की डिग्री है।
- जब वह 2024 में चुनाव लड़कर विधायक बनीं, तब वह इलेक्ट्रॉनिक्स विषय में पीएचडी (PhD) कर रही थीं।
- इसके अलावा वह जम्मू-कश्मीर लोक सेवा आयोग की परीक्षा की तैयारी में भी जुटी हुई थीं।
राजनीति में आना तय नहीं था
29 साल की उम्र में राजनीति में कदम रखना शगुन का कोई पहले से तय प्लान नहीं था। वह अपनी किताबों, रिसर्च और पढ़ाई-लिखाई में ही पूरी तरह व्यस्त थीं। उनका राजनीति में आने का कोई इरादा भी नहीं था। अपने समाज के प्रति जिम्मेदारी और परिवार की राजनीतिक विरासत को जिंदा रखने के लिए उन्होंने सियासत के मैदान में उतरने का फैसला किया।
अपने पहले ही चुनावी अभियान में शगुन परिहार (Shagun Parihar, National Vice President of BJYM) ने सीधे जनता के दिल को छुआ था। उन्होंने लोगों के बीच जाकर कहा था कि यह चुनाव दो सोच के बीच है। एक तरफ वो लोग हैं जिन पर कारोबार लूटने और हिंसा फैलाने के आरोप लगते रहे हैं। दूसरी तरफ वो लोग हैं जो जनता के लिए शांति, सुरक्षा और खुशहाली लाने का वादा कर रहे हैं।
शगुन ने साफ लफ्जों में कहा था कि उन्हें मिलने वाला हर एक वोट सिर्फ उनके परिवार के लिए नहीं है। यह उन तमाम परिवारों के हक का वोट है जिन्होंने जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की वजह से अपनों को खोया है।