राज्यसभा में बीजेपी को बहुमत: जानिए कैसे जीतीं अतिरिक्त सीटें और क्या होगा असर?
News In Short
- बीजेपी ने राज्यसभा में अब पूर्ण बहुमत पा लिया है।
- एनडीए के पास अब कुल 140 सांसद हो गए हैं।
- ओडिशा और बिहार में बीजेपी ने अतिरिक्त सीटें जीतीं है।
- विपक्ष के कई विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की है।
- अब सरकार को छोटे दलों पर निर्भर नहीं रहना होगा।
News In Detail
राज्यसभा का नया समीकरण
राज्यसभा में बहुमत मिलना सरकार के लिए बहुत जरूरी है। इसके बिना संसद में बड़े कानून बनाना कठिन होता है। इस बार के चुनाव रणनीतिक रूप से बहुत ऐतिहासिक रहे हैं। बीजेपी ने अपने सटीक गणित से सबको हैरान कर दिया है।
अब राज्यसभा में एनडीए के कुल 140 सांसद हैं। यह संख्या बहुमत के आंकड़े से 17 अधिक है। अब सरकार को बीजेडी या वाईएसआरसीपी की जरूरत नहीं होगी। वह अपने दम पर कोई भी बिल पास करा सकेगी। यह जीत केवल भाग्य नहीं बल्कि, चुनावी रणनीति है।
बिहार में कैसे हुआ बड़ा खेल
बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों पर चुनाव हुआ है। वहां का राजनीतिक माहौल काफी तनावपूर्ण बना रहा है। वोटिंग के दौरान महागठबंधन के चार विधायक गायब रहे है। आरजेडी के फैसल रहमान का फोन भी बंद पाया गया है।
कांग्रेस के मनोहर प्रसाद और मनोज विश्वास भी नहीं आए थे। तीसरे विधायक सुरेंद्र कुशवाहा ने भी मतदान नहीं किया था। इन चारों विधायकों की अनुपस्थिति ने विपक्ष को कमजोर किया है। इससे एनडीए के उम्मीदवारों की राह बहुत आसान हो गई है।
नितिन नबीन और नीतीश कुमार को 44-44 वोट मिले हैं। शिवेश राम की जीत में दूसरी वरीयता के वोट काम आए हैं। उन्होंने आरजेडी के एडी सिंह को अंत में हरा दिया है। बिहार जैसी ही रणनीतिक जीत ओडिशा में भी दिखी है।
ओडिशा में रणनीति की जीत
ओडिशा विधानसभा में कुल 147 विधायक मौजूद हैं। यहां की 4 सीटों के लिए कड़ा मुकाबला हुआ। दिलीप राय की जीत सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी है। विपक्ष के 11 विधायकों ने उनके पक्ष में वोट दिया है।
इनमें कांग्रेस के रमेश जेना और सोफिया फिरदौस शामिल थे। बीजेडी के देवी रंजन और सौविक ने भी क्रॉस वोटिंग की थी। इनके साथ चक्रमणि कहार और सुभाषिनी जेना ने भी साथ दिया। बीजेडी के 8 विधायकों ने पार्टी के खिलाफ जाकर वोट दिया।
हरियाणा में आधी रात का फैसला
हरियाणा चुनाव के नतीजे देर रात को घोषित हुए थे। रात सवा एक बजे परिणामों ने सबको चौंका दिया है। वोट की गोपनीयता लीक होने पर खूब हंगामा हुआ है। इसके बाद चुनाव आयोग को दखल देना पड़ा है।
मल्लिकार्जुन खरगे ने आयोग को एक कड़ी चिट्ठी लिखी है। जांच के बाद परमवीर सिंह का वोट रद्द कर दिया गया है। हालांकि अनिल विज का वोट बिल्कुल सही पाया गया है। वहीं इनेलो के विधायक वोटिंग की प्रक्रिया से दूर रहे।
इसका असर जीत के लिए जरूरी वोटों पर पड़ा है। अंत में संजय भाटिया और कर्मवीर सिंह बौध जीत गए। सतीश नांदल को इस चुनाव में हार का सामना करना पड़ा है। अब राज्यसभा वोटिंग के नियमों को समझना भी जरूरी है।
कैसे चुना जाता है सांसद?
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया थोड़ी कठिन होती है। इसे हरियाणा के उदाहरण से आसानी से समझें। वहां 90 विधायक थे और 2 सीटें खाली थीं। जीतने के लिए एक विशेष फार्मूले का उपयोग होता है।
फार्मूला है: कुल विधायक / (खाली सीटें + 1) + 1
90 को (2+1) यानी 3 से भाग दिया गया। नतीजे में 30 आया और फिर 1 जोड़ दिया गया। इस तरह जीत के लिए 31 वोट जरूरी हुए। राज्यसभा में ओपन वोटिंग की व्यवस्था लागू होती है।
विधायकों को अपना वोट पार्टी एजेंट को दिखाना पड़ता है। वोट न दिखाने पर उसे रद्द कर दिया जाता है। इस चुनाव में पार्टियों का व्हिप लागू नहीं होता। यही कारण है कि विधायक खुलकर क्रॉस वोटिंग करते हैं।
अब और मजबूत होगी मोदी सरकार
सदन में बहुमत मिलने के कई बड़े फायदे होते हैं। मोदी सरकार अब राज्यसभा में बहुत स्वतंत्र होगी। विशेषज्ञ अमिताभ के अनुसार सरकार अब अधिक साहसी होगी। उसे अब क्षेत्रीय दलों की शर्तें नहीं माननी पड़ेंगी।
अब विवादास्पद बिल भी बिना किसी रुकावट के पास होंगे। हालांकि विपक्ष की भूमिका अब बहुत कम रह जाएगी। आम सहमति बनाने की परंपरा अब कमजोर हो सकती है। सरकार अब सीधे अपने एजेंडे पर काम कर सकेगी।
बहुमत के मुख्य फायदे:
- महत्वपूर्ण बिल अब आसानी से पास हो सकेंगे।
- सहयोगी दलों के दबाव से पूरी मुक्ति मिलेगी।
- सरकार विधायी कार्यों में अधिक स्वतंत्र होगी।
लोकतांत्रिक चुनौतियां:
- विपक्ष के साथ चर्चा की गुंजाइश कम होगी।
- छोटे दलों की आवाज दबाई जा सकती है।
निष्कर्ष: लोकतंत्र का नया अध्याय
यह चुनाव परिणाम भारतीय राजनीति की दिशा बदल देंगे। बीजेपी ने अपनी सांगठनिक शक्ति को फिर से साबित किया। राज्यसभा में बहुमत से अब विधायी कार्य तेज होंगे। यह जीत मोदी सरकार के भविष्य की राह आसान करेगी।
FAQ
- 1. राज्यसभा चुनाव में क्रॉस वोटिंग पर क्या कार्रवाई हो सकती है?
पार्टी अपने विधायक को दल से निकाल सकती है। इसके लिए विधानसभा अध्यक्ष को अर्जी देनी होती है। फिर विधायक की सदन की सदस्यता खत्म हो सकती है। हालांकि राजनीतिक दल अक्सर ऐसी कड़ी कार्रवाई नहीं करते। - 2. राज्यसभा में बहुमत मिलने से कामकाज में क्या बदलाव आएगा?
अब सरकार को बाहरी दलों का समर्थन नहीं चाहिए। बड़े और कड़े बिल अब बिना रुके पास होंगे। विपक्ष के विरोध का सरकार पर असर नहीं पड़ेगा। सरकार अब अपने फैसले अधिक मजबूती से ले सकेगी। - 3. राज्यसभा चुनाव में ओपन वोटिंग की व्यवस्था क्यों शुरू की गई?
यह व्यवस्था साल 2003 में अटल सरकार ने बनाई थी। इसका मुख्य उद्देश्य भ्रष्टाचार और नोट का खेल रोकना था। इससे विधायक दूसरे दलों से पैसा लेकर वोट नहीं पाएंगे। पारदर्शिता के लिए एजेंट को वोट दिखाना जरूरी है।
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