बॉम्बे हाईकोर्ट का अनोखा फैसला, कहा-तोता जंगली जानवर है, फसल नुकसान पर सरकार को देना होगा मुआवजा
क्या आपने कभी सोचा है कि तोते भी जंगली जानवर है। अक्सर किसान पक्षियों से अपनी फसल बचाने के लिए परेशान रहते हैं। पक्षी किसानों का जो भी नुकसान करते हैं, इसके लिए उन्हें कोई भी मदद नहीं मिलती है, लेकिन अब कानून आपकी मेहनत की पाई-पाई वसूल करवाएगा।
बॉम्बे हाईकोर्ट ने किसानों के हित में एक ऐतिहासिक फैसला (बॉम्बे हाईकोर्ट का फैसला) सुनाया है। कोर्ट का कहना है कि तोता भी जंगली जानवर की लिस्ट में शामिल है।
तोता भी जंगली जानवर
बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ के फैसले (बॉम्बे हाईकोर्ट फैसला) में कहा गया कि तोते भी जंगली जानवर की श्रेणी में आते हैं। ये तोते किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाते हैं तो सरकार को मुआवजा देना होगा। यह फैसला महाराष्ट्र सरकार के लिए एक कड़ा संदेश है। खासकर उन किसानों के लिए जो वन्यजीवों से प्रभावित होते हैं।
क्या है पूरा माजरा?
दरअसल यह मामला वर्धा जिले के हिंगी गांव के 70 वर्षीय किसान महादेव डेकाटे से जुड़ा है। उन्होंने कोर्ट में बताया कि पास के वन्यजीव अभयारण्य से आए तोतों ने उनके अनार के बगीचे को भारी नुकसान पहुंचाया था। महादेव ने इसके लिए मुआवजा मांगा था। उनका कहना था कि उनके करीब 200 अनार के पेड़ प्रभावित हुए हैं।
इस पर कोर्ट ने सरकार को आदेश दिया कि किसान को प्रति पेड़ 200 रुपए के हिसाब से कुल 40 हजार रुपए मुआवजा दिया जाए।
अदालत ने खारिज की सरकार की दलील
सरकार ने अदालत में अपनी दलील दी। कहा कि पुराने सरकारी आदेशों के मुताबिक केवल हाथी और बाइसन जैसे बड़े जंगली जानवरों द्वारा फसलों को नुकसान पहुंचाने पर ही मुआवजा दिया जा सकता है।
अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि अगर केवल कुछ जानवरों के कारण हुए नुकसान पर मुआवजा दिया जाए और बाकी जानवरों को नजरअंदाज किया जाए, तो यह बराबरी के सिद्धांत के खिलाफ होगा।
अदालत ने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन माना। इसके अलावा अदालत ने यह भी कहा कि वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत तोते और उनके जैसे अन्य कई प्रजातियां भी संरक्षित हैं। इसलिए उन्हें भी मुआवजे का अधिकार है।
किसान का दावा 20 लाख का नुकसान
कोर्ट ने कहा कि तोते और अन्य जंगली जानवर राज्य की संपत्ति माने जाते हैं। जब कानून नागरिकों से यह उम्मीद करता है कि वे वन्यजीवों की रक्षा करें, तो सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह इन जानवरों के कारण हुए नुकसान की भरपाई करे।
अदालत ने चेतावनी दी कि अगर किसानों को मुआवजा नहीं दिया जाता, तो वे अपनी फसलों की सुरक्षा के लिए ऐसे कदम उठा सकते हैं, जो वन्यजीवों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इससे कानून का उद्देश्य ही खत्म हो जाएगा।
महादेव डेकाटे ने दावा किया था कि उन्हें करीब 20 लाख रुपए का नुकसान हुआ था। वन विभाग और कृषि विभाग के अधिकारियों ने भी निरीक्षण के दौरान माना था कि लगभग 50 प्रतिशत फल पक्षियों द्वारा खराब किए गए थे। इस फैसले को किसानों और वन्यजीव संरक्षण दोनों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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