कोई बॉन्ड नहीं भरा, फिर सड़कों पर उतरेंगे: दिल्ली पुलिस के दावे पर अभिजीत दिपके का जवाब, बॉन्ड विवाद गरमाया

Sanjay Dhiman | Sootr Creatives | Oct 11, 2026, 19:04 IST
50 हजार रुपए का मुचलका सच या दावा? अभिजीत दिपके और दिल्ली पुलिस आमने-सामने
अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस के पीस बॉन्ड वाले दावे को नकारा है। कॉकरोच जनता पार्टी के संयोजक के मुताबिक उन्होंने कोई बॉन्ड नहीं भरा। दिल्ली पुलिस का कहना है कि 50 हजार रुपए का मुचलका भरा गया। हिरासत से रिहा हुए तीनों नेताओं को लेकर यह बॉन्ड विवाद गरमा गया है। दिपके ने सड़कों पर लौटने का ऐलान भी किया है।

अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस का पीस बॉन्ड वाला दावा खारिज कर दिया है। वे कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संयोजक हैं। रविवार को उन्होंने कहा कि कार्यकर्ता फिर सड़कों पर उतरेंगे।



रविवार को खबर आई कि दिपके समेत तीन नेता रिहा हो गए हैं। पुलिस का दावा है कि 50 हजार रुपए का मुचलका (पीस बॉन्ड) भरा गया। दिपके ने इसे नकार दिया।



समझें क्या है पूरा मामला

सीजेपी (CJP – Cockroach Janta Party) के तीन नेता दिल्ली आए थे। तारीख थी 10 अक्टूबर 2026, मकसद था मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन। दिल्ली पुलिस ने अभिजीत दिपके, आशुतोष रांका और सौरव दास को हिरासत में लिया। 11 अक्टूबर को तीनों रिहा हो गए। पुलिस के मुताबिक 50 हजार रुपए का बॉन्ड भरा गया, दिपके नहीं मानते।



बॉन्ड पर दिपके का जवाब क्या?

दिपके ने यह बात रविवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखी। उनका बयान दिल्ली पुलिस के दावे से उलट है। एक पक्ष कहता है कि बॉन्ड भरा गया। दूसरा कहता है कि उसने कोई बॉन्ड नहीं भरा।



तो सच क्या है? फिलहाल दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं। यही बॉन्ड विवाद की असली जड़ है।



सीजेपी नेता हिरासत में क्यों?

एक दिन पहले, यानी 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हलचल रही। सीजेपी की अगुवाई में जंतर-मंतर प्रदर्शन की कोशिश हुई। प्रदर्शन ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर था।



पुलिस ने कार्रवाई करते हुए बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। तीनों नेताओं को विमान के दिल्ली पहुंचने के बाद हिरासत में लिया गया। यह निवारक कार्रवाई (गड़बड़ी होने से पहले रोकथाम) थी। मकसद संभावित कानून-व्यवस्था की दिक्कत को रोकना माना जा रहा है।



क्या प्रदर्शन का अधिकार असीमित है?

भारत में शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना संवैधानिक अधिकार का हिस्सा है। लेकिन यह अधिकार सार्वजनिक व्यवस्था, कानून और दूसरों के अधिकारों के अधीन है। यानी हर प्रदर्शन की कुछ सीमाएं तय हैं।



पीस बॉन्ड की शर्त क्या है?

तीनों नेता 11 अक्टूबर को कार्यकारी मजिस्ट्रेट (प्रशासनिक अधिकारी) के सामने पेश हुए। जगह थी दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन। इसके बाद तीनों रिहा हो गए।



रिपोर्टों के अनुसार शर्त थी पीस बॉन्ड (एक साल शांति बनाए रखने का वादा)। तीनों को एक साल तक अच्छा व्यवहार रखना है। दिल्ली पुलिस के मुताबिक इसके लिए 50 हजार रुपए का मुचलका दिया गया।



सीजेपी की कानूनी प्रमुख ने क्या कहा?

रत्ना सिंह ने यह बात एक्स पर बताई। हिरासत से रिहा होने के बाद पार्टी ने रविवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। उन्होंने बताया कि पेशी के बाद तीनों को रिहा किया गया।



यहां एक पेच है। पार्टी की कानूनी प्रमुख शर्त का जिक्र करती हैं। संयोजक किसी बॉन्ड से इनकार करते हैं।



क्या एक साल प्रदर्शन पर पूरी रोक है?

इसका मतलब प्रदर्शन पर पूरी रोक नहीं है। लेकिन उस दौरान शांति बनाए रखना जरूरी है। सोचिए एक बार। शांति की शर्त और सड़कों पर वापसी, साथ कैसे चलेंगे?



दादी के निधन से शोक में दिपके

एक तरफ आंदोलन, दूसरी तरफ घर में शोक।



दिपके की दादी का 85 साल की उम्र में निधन हो गया। उनका नाम सावित्रीबाई शंकरराव दिपके था। वे महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी गांव में रहती थीं। लंबी बीमारी और उम्र की दिक्कतों से कुछ दिनों से उनकी तबीयत खराब थी।



दादी के निधन की खबर मिलते ही दिपके गांव की ओर निकले। वे परिवार के साथ रहने के लिए गांव जा रहे हैं।



क्या रुकेगा सीजेपी आंदोलन?

दिपके का जवाब साफ है। सीजेपी न पीछे हटेगी, न डराई जा सकेगी। कार्यकर्ता फिर सड़कों पर उतरेंगे।



लेकिन यह कब और कहां होगा, इसकी तारीख अभी सामने नहीं आई है। पुलिस के मुताबिक पीस बॉन्ड की शर्त लागू है। दिपके के मुताबिक कोई बॉन्ड भरा ही नहीं गया।



अब नजर इस पर रहेगी कि सीजेपी का अगला कदम क्या होता है। और क्या मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन दोबारा खड़ा होता है?



पीस बॉन्ड क्या होता है, यह कब भरवाया जाता है

पीस बॉन्ड एक निवारक उपाय है, सजा नहीं। इसका मतलब है - कोर्ट / मजिस्ट्रेट किसी व्यक्ति से लिखित वादा लेता है कि वो एक निश्चित समय तक शांति बनाए रखेगा और कोई अपराध नहीं करेगा।



BNSS में 2 मुख्य तरह के पीस बॉन्ड हैं:

1. BNSS धारा 125 - सजा होने पर शांति के लिए बॉन्ड



जब कोई व्यक्ति मारपीट, आपराधिक धमकी, शांति भंग करने वाले अपराधों में दोषी पाया जाता है, तो Session Court या First Class Magistrate सजा के साथ-साथ उसे 3 साल तक शांति बनाए रखने के लिए बॉन्ड भरने का आदेश दे सकता है।



2. BNSS धारा 126 - अन्य मामलों में शांति के लिए बॉन्ड



जब Executive Magistrate को जानकारी मिलती है कि कोई व्यक्ति शांति भंग कर सकता है या लोक शांति में खलल डाल सकता है, तो वो उसे नोटिस देकर पूछता है कि 1 साल तक के लिए



  1. अभिजीत दिपके और सीजेपी के नेताओं को हिरासत में लेने का कारण क्या था?
    अभिजीत दिपके और सीजेपी के नेताओं को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने के प्रयास के कारण हिरासत में लिया गया था। प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ था और पुलिस ने निवारक कार्रवाई के तहत यह कदम उठाया।
  2. दिपके द्वारा पीस बॉन्ड भरने की बात का क्या है?
    अभिजीत दिपके ने दिल्ली पुलिस के द्वारा पीस बॉन्ड भरने के दावे को खारिज कर दिया है। उन्होंने कहा है कि उन्होंने कोई ऐसा बॉंड नहीं भरा है जिसमें प्रदर्शन न करने की शर्त हो।
  3. क्या सीजेपी का प्रदर्शन फिर से होगा?
    सीजेपी के संयोजक अभिजीत दिपके ने स्पष्ट किया है कि पार्टी न पीछे हटेगी और न डराई जाएगी। कार्यकर्ता फिर सड़कों पर उतरने की योजना बना रहे हैं, लेकिन इसका समय और स्थान अभी तय नहीं हुआ है।
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