सड़क के गड्ढों ने ब्रेन डेड महिला को दिया नया जीवन दान, जानें कैसे

Anjali Dwivedi | Mar 11, 2026, 18:28 IST
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बरेली में मृत घोषित विनीता शुक्ला की सांसें एम्बुलेंस में अचानक लौट आईं। डॉ. राकेश न्यूरो सिटी हॉस्पिटल में स्नेक बाइट के इलाज के बाद वह अब पूरी तरह स्वस्थ हैं।

बरेली. उत्तर प्रदेश केबरेली के अस्पताल में ब्रेन डेड घोषित की गई महिला विनीता शुक्ला को फिर से जिंदा पाया गया। यह चमत्कारी घटना तब घटी जब उन्हें अस्पताल से वापस लाया जा रहा था। एंबुलेंस में अचानक झटका लगने के बाद विनीता के शरीर में हलचल शुरू हो गई और उनकी सांसें वापस चलने लगीं।



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ब्रेन डेड क्या होता है

ब्रेन डेड (मस्तिष्क मृत्यु) का सीधा सा अर्थ है कि इंसान का दिमाग और उसका सबसे मुख्य हिस्सा (ब्रेन स्टेम) हमेशा के लिए काम करना बंद कर चुके हैं। अब वहां से वापसी की कोई गुंजाइश नहीं है।



चिकित्सकीय और कानूनी तौर पर इसे मृत ही माना जाता है। हालांकि, वेंटिलेटर जैसी मशीनों के सहारे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाई जा सकती है जिससे दिल कुछ समय तक धड़कता रहता है, लेकिन इंसान न तो कभी होश में आ सकता है और न ही बिना मशीनों के खुद से सांस ले सकता है।



एम्बुलेंस के झटके ने फूंकी नई जान

मामला तब शुरू हुआ जब विनीता शुक्ला को बरेली के एक अस्पताल में उन्हें ब्रेन डेड (brain dead) घोषित कर दिया गया। निराश परिजन उन्हें एम्बुलेंस से वापस घर ला रहे थे। रास्ते में सड़क के एक गड्ढे के कारण एम्बुलेंस को जोरदार झटका लगा। इसी झटके के साथ विनीता के शरीर में अचानक हलचल हुई और उनकी बंद पड़ चुकी सांसें दोबारा चलने लगीं।



ब्रेन डेड या स्नेक बाइट?

परिजन आनन-फानन में उन्हें नगर के डॉ. राकेश न्यूरो सिटी हॉस्पिटल ले गए। जहां न्यूरो सर्जन डॉ. राकेश सिंह ने मरीज की गंभीर स्थिति को देखते हुए गहन जांच की। शुरुआती लक्षणों के आधार पर डॉक्टरों को संदेह हुआ कि यह सामान्य न्यूरोलॉजिकल फेलियर नहीं, बल्कि स्नेक बाइट (Snake Bite - सांप का काटना) का मामला हो सकता है। इसी संदेह के आधार पर विनीता को तुरंत एंटी वेनम इंजेक्शन दिए गए और जरूरी उपचार शुरू किया गया।



डॉ. राकेश सिंह के अनुसार, सांप के जहर या कुछ विशेष न्यूरोलॉजिकल स्थितियों में मरीज का शरीर पूरी तरह सुन्न पड़ जाता है और वह ब्रेन डेड जैसा दिखने लगता है। ऐसे मामलों में बेहद सतर्कता की जरूरत होती है। अस्पताल में लगभग 13 दिनों तक चले गहन उपचार के बाद विनीता अब पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है।



यह घटना हमें याद दिलाती है कि ब्रेन डेड जैसी गंभीर स्थिति में भी सेकंड ओपिनियन और लक्षणों की बारीक पहचान कितनी जरूरी है। विनीता का मामला मेडिकल हिस्ट्री में एक मिसाल की तरह देखा जा रहा है।



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