केंद्रीय कैबिनेट की बैठक, UDAN 2.0 योजना को मिली हरी झंडी
News in Short
- केंद्रीय मंत्रिमंडल ने उड़ान-2 योजना को मंजूरी दी।
- 100 नए एयरपोर्ट्स और 200 हेलीपैड्स का निर्माण होगा।
- इस योजना के लिए 28 हजार 840 करोड़ रुपए का बजटीय सपोर्ट प्रदान किया गया है।
- उड़ान-2 योजना से छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में एयर कनेक्टिविटी बढ़ेगी।
- यह योजना रोजगार और पर्यटन के अवसरों को बढ़ावा देगी।
News in Detail
केंद्रीय कैबिनेट बैठक में उड़ान-2 योजना को मंजूरी मिली है। इसके तहत 100 नए एयरपोर्ट्स और 200 हेलीपैड्स का निर्माण किया जाएगा। इसके लिए 28 हजार 840 करोड़ रुपए का बजट प्रदान किया गया है। उड़ान-2 योजना वित्त वर्ष 2026-27 से 2035-36 तक लागू होगी।
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100 नए एयरपोर्ट्स का निर्माण
उड़ान-2.0 के तहत 100 नए एयरपोर्ट्स बनाए जाएंगे। इन एयरपोर्ट्स को चैलेंज मोड में विकसित किया जाएगा। प्रति एयरपोर्ट की औसत लागत 100 करोड़ रुपए होगी। कुल मिलाकर इस परियोजना के लिए 12 हजार 159 करोड़ रुपए का बजटीय सपोर्ट है। यह योजना अनसर्व्ड एयरट्रिप्स को लक्षित करेगी।
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200 नए हेलीपैड्स का निर्माण
इसके अलावा उड़ान-2.0 योजना के तहत 200 मॉडर्न हेलीपैड्स का भी निर्माण किया जाएगा। इन हेलीपैड्स को पहाड़ी क्षेत्रों, पूर्वोत्तर राज्यों और द्वीपीय क्षेत्रों में स्थापित किया जाएगा। इससे इन इलाकों में एयर कनेक्टिविटी बेहतर होगी। इसके लिए 3,661 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है।
वायबिलिटी गैप फंडिंग
इस योजना के तहत एयरलाइंस को 80 से 90 फीसदी वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) मिलेगी। केंद्र सरकार अगले पांच साल तक यह फंडिंग प्रदान करेगी। इसके लिए 10 हजार 43 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। यह कदम केंद्र सरकार के 2047 के विजन को ध्यान में रखकर उठाया गया है। इसका उद्देश्य छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में एयर कनेक्टिविटी बढ़ाना है।
उड़ान-2.0 योजना के लिए 28 हजार 840 करोड़ रुपए का बजटीय सपोर्ट रखा गया है। यह योजना सरकार के 2047 तक भारत को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी एविएशन पावर बनाने के लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद करेगी।
उड़ान-2 योजना से छोटे शहरों और दूरदराज क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही, यह योजना देशभर में रोजगार के अवसर पैदा करने में भी मदद करेगी।
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क्या है उड़ान योजना?
उड़ान योजना अक्टूबर 2016 में लॉन्च की गई थी। इसका मुख्य उद्देश्य छोटे और टियर-2, टियर-3 शहरों में हवाई यात्रा की उपलब्धता बढ़ाना था। पिछले 9 सालों में 95 एयरपोर्ट्स, हेलीपोर्ट्स और एयरोड्रोम्स में 663 रूट्स ऑपरेशनल किए गए हैं। इससे नागरिक उड्डयन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आया है।